‘अजगर और राजा टंग’ यह कॉमिक्स अजगर सीरीज का एक अहम हिस्सा है। इसमें शौर्य, बदले की भावना, जादू और अलौकिक ताकतों का जबरदस्त मेल देखने को मिलता है। 64 पेजों की यह कॉमिक अपनी तेज़ रफ्तार कहानी और शानदार चित्रों की वजह से आज भी एक क्लासिक मानी जाती है। कहानी कहीं भी ढीली नहीं पड़ती और हर कुछ पन्नों में नया मोड़ पाठक की दिलचस्पी बनाए रखता है।
कहानी का सारांश (Plot Summary):
कहानी की शुरुआत पृथ्वी के भीतर बसे एक छोटे लेकिन खुशहाल राज्य ‘गर्भी’ से होती है। यहाँ के राजा ‘गर्भराज’ एक दयालु शासक हैं, जो अपनी प्रजा और अपनी सुंदर बेटी ‘राजकुमारी हारून’ से बेहद प्रेम करते हैं। राज्य में सब कुछ शांत और सुखद लगता है, लेकिन यह शांति ज्यादा समय तक नहीं टिकती। गर्भी राज्य की सीमा से सटा हुआ एक विशाल और डरावना राज्य है—‘उदर’। इस राज्य का शासक है राजा ‘टंग’, जो घमंडी, निर्दयी और शक्तिशाली जादूगर है।

राजा टंग अपने जादुई भंवरे की मदद से दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री की खोज करता है और उसकी नज़र राजकुमारी हारून पर जा टिकती है। टंग, राजा गर्भराज को एक अपमानजनक संदेश भेजता है कि वह राजकुमारी हारून से विवाह करना चाहता है, और अगर यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया तो युद्ध के लिए तैयार रहें। राजा गर्भराज और उनके वीर सेनापति ‘गर्भहस्त’ इस घमंडी मांग को ठुकरा देते हैं और युद्ध की घोषणा कर देते हैं।
युद्ध बेहद भयानक होता है। सेनापति गर्भहस्त अपनी वीरता और युद्ध कौशल से टंग की विशाल सेना को बुरी तरह पीछे धकेल देता है। हार सामने देखकर राजा टंग बौखला जाता है और सीधे युद्ध की जगह छल का रास्ता अपनाता है। वह अपने जादू से युद्ध के नियम तोड़ता है और रात के अंधेरे में हमला कर देता है। इसी हमले में वह सेनापति गर्भहस्त और राजकुमारी हारून के नवजात पुत्र ‘हस्तशून’ का अपहरण कर लेता है। अपने पति और बच्चे को बचाने की कोशिश में राजकुमारी हारून एक गहरी खाई में गिर जाती है।
यहीं से कहानी में असली नायक का प्रवेश होता है। राजकुमारी हारून नदी की तेज़ धारा में बहते हुए एक घने जंगल तक पहुँच जाती है। वहीं उसकी मुलाकात ‘महाबली शेरा’ और ‘अजगर’ से होती है। अजगर एक इच्छाधारी मानव है, जो साँप से इंसान का रूप ले सकता है। हारून की दुखभरी कहानी सुनकर अजगर उसे अपनी बहन मान लेता है और वचन देता है कि वह राजा टंग का अंत करेगा और उसके पति व पुत्र को सुरक्षित वापस लाएगा।

कहानी का दूसरा हिस्सा अजगर के राजा टंग के ‘मौत के किले’ में प्रवेश पर केंद्रित है। यह किला खतरनाक जादुई जालों और घातक यांत्रिक हथियारों से भरा हुआ है। अजगर को आग की लपटों, नुकीले भालों, विशाल घूमती चक्कियों और टंग के मायावी राक्षसों से लगातार जूझना पड़ता है। आखिरकार, अजगर और राजा टंग के बीच एक निर्णायक और यादगार युद्ध होता है, जहाँ अजगर अपनी इच्छाधारी शक्तियों, धैर्य और समझदारी से टंग के घमंड को पूरी तरह कुचल देता है।
चरित्र चित्रण (Character Analysis):
अजगर (नायक):
अजगर इस कहानी की रीढ़ है। वह सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि बेहद धैर्यवान और दृढ़ निश्चयी भी है। उसका इच्छाधारी रूप उसे एक साधारण नायक से कहीं ऊपर ले जाता है। वह बिना किसी स्वार्थ के राजकुमारी हारून की मदद करता है, जो उसके ऊँचे चरित्र और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है।

राजा टंग (खलनायक):
राजा टंग एक बेहद प्रभावशाली और डर पैदा करने वाला खलनायक है। उसके कई सिर और उसकी भयानक शक्ल उसे और भी खतरनाक बना देती है। वह ताकत का भूखा है और अपने मकसद के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, यहाँ तक कि मासूम बच्चों को नुकसान पहुँचाने से भी नहीं हिचकता। उसका जादुई ज्ञान उसे अजगर के लिए एक कठिन और खतरनाक दुश्मन बनाता है।
राजकुमारी हारून:
हारून का चरित्र दर्द और करुणा का प्रतीक है। वह एक ऐसी माँ और पत्नी है जो अपने परिवार को खो देने के डर से टूट चुकी है। भले ही वह सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं लेती, लेकिन पूरी कहानी की प्रेरणा वही बनती है और अजगर के संघर्ष की वजह भी।
महाबली शेरा:
हालाँकि इस कॉमिक्स में शेरा की भूमिका सीमित है, लेकिन उसकी मौजूदगी कहानी को मनोज कॉमिक्स की दूसरी कहानियों और किरदारों से जोड़ती है। वह एक सच्चे और भरोसेमंद साथी के रूप में सामने आता है।
चित्रांकन और कला (Artwork and Illustration):

विजय कदम और आत्माराम पुंज का चित्रांकन इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकत है। राजा टंग के कई सिरों वाला डरावना रूप और उसकी चमकती हुई आँखों को जिस बारीकी से दिखाया गया है, वह सच में प्रभाव छोड़ता है। अजगर की शारीरिक बनावट, उसकी मजबूत मांसपेशियाँ और योद्धा जैसी मुद्रा उसे एक शक्तिशाली नायक के रूप में स्थापित करती हैं।
भले ही यह कॉमिक्स पुराने दौर की है, लेकिन रंगों का चयन आज भी शानदार लगता है। युद्ध के दृश्यों में लाल और पीले रंगों का तेज़ और उग्र इस्तेमाल हिंसा और तबाही का एहसास कराता है, जबकि ‘मौत के किले’ के दृश्यों में गहरे रंगों से रहस्य और डर का माहौल बनाया गया है। विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के लिहाज़ से राजा टंग का जादुई भंवरे में भविष्य देखना और अजगर का आग की खाई को पार करना जैसे पैनल बेहद गतिशील और जीवंत महसूस होते हैं, जो पाठक को कहानी में पूरी तरह खींच लेते हैं।
संवाद और पटकथा (Dialogue and Screenplay):

संदीप गुप्ता द्वारा लिखी गई पटकथा काफी कसी हुई और प्रभावशाली है। कहानी कहीं भी धीमी नहीं पड़ती और हर दृश्य अगले दृश्य से सहजता से जुड़ा रहता है। संवादों में वीरता और नाटकीयता का संतुलन बहुत सही बैठता है। उदाहरण के तौर पर, जब राजा टंग कहता है, “अजगर, तू इस मौत के जाल से जीवित नहीं निकल पाएगा,” और जवाब में अजगर कहता है, “पाप का घड़ा भरने के बाद टंग, मौत खुद अपना रास्ता ढूंढ लेती है,”—ऐसे संवाद पढ़ते समय रोमांच अपने चरम पर पहुँच जाता है।
कॉमिक्स में क्रूरता के कुछ दृश्य काफी डरावने हैं, जैसे कटे हुए अंगों को दिखाया जाना। यह उस दौर की मनोज कॉमिक्स की एक खास पहचान थी, जो इसे आम बच्चों की कहानियों से अलग कर एक गहरी और गंभीर ‘डार्क फैंटेसी’ का रूप देती है।
थीम और संदेश (Themes and Message):

अजगर की इस कहानी में तीन अहम विचारधाराएँ साफ दिखाई देती हैं। सबसे पहले, यह बुराई पर अच्छाई की जीत के उस शाश्वत सच को दोहराती है कि चाहे दुश्मन कितना ही शक्तिशाली और जादुई क्यों न हो, साहस और सच्चाई के सामने वह टिक नहीं सकता। दूसरा, वचन की ताकत को बेहद खूबसूरती से दिखाया गया है, जो भारतीय संस्कृति के उस मूल्य को दर्शाता है कि “प्राण जाए पर वचन न जाए।” यहाँ नायक अपनी बहन को दिए गए वचन को निभाने के लिए अपनी जान तक दांव पर लगाने को तैयार रहता है।
अंत में, कहानी में जादुई शक्तियों के साथ-साथ राजा टंग के यांत्रिक हथियारों, जैसे लेज़र गन, का इस्तेमाल इसे एक शुरुआती ‘साइंस-फैंटेसी’ का रूप देता है। उस समय के लिहाज़ से यह सोच काफी आगे की और प्रगतिशील मानी जा सकती है।
समीक्षात्मक विश्लेषण (Critical Analysis):

खूबियाँ:
कहानी की रफ्तार बहुत तेज़ है। एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद पाठक इसे बीच में छोड़ना नहीं चाहता। ‘मौत का किला’ यानी Fort of Death में लगाए गए ट्रैप्स बेहद रचनात्मक और कल्पनाशील हैं। अजगर के गुरु (कुलगुरु) द्वारा राजा टंग की कमजोरी बताना कहानी में एक अहम मोड़ लेकर आता है, जो आगे की घटनाओं को दिशा देता है।
कमियाँ:
कुछ पाठकों के लिए कटे हुए अंगों वाले दृश्य असहज हो सकते हैं, खासकर छोटे बच्चों के लिए।
इसके अलावा, अंत में राजा टंग का अंत थोड़ा जल्दी होता हुआ महसूस होता है। इतनी सारी शक्तियाँ होने के बावजूद उसका अजगर के सामने अपेक्षाकृत आसानी से हार जाना कुछ पाठकों को खटक सकता है।
निष्कर्ष:
‘अजगर और राजा टंग’ सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं है, बल्कि यह उस दौर की असीम कल्पनाशीलता का जीवंत उदाहरण है। यह हमें याद दिलाती है कि बिना आधुनिक तकनीक और एनीमेशन के, सिर्फ कलम और कागज़ के सहारे भी कितना विशाल और भव्य संसार रचा जा सकता है।
मनोज कॉमिक्स ने अजगर के रूप में एक ऐसा सुपरहीरो दिया, जो ज़मीन से जुड़ा हुआ था और जिसकी शक्तियाँ हमारी लोककथाओं, खासकर इच्छाधारी नाग की मान्यताओं से प्रेरित थीं। अगर आप पुरानी भारतीय कॉमिक्स के शौकीन हैं और रहस्य, रोमांच और जादू की दुनिया में खोना चाहते हैं, तो यह कॉमिक्स आपके संग्रह में ज़रूर होनी चाहिए।
आज के डिजिटल दौर में भी, जब इस कॉमिक्स के पन्ने पलटे जाते हैं, तो जो रोमांच महसूस होता है, वह आज भी उतना ही खास है। यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे भीतर का ‘अजगर’ यानी साहस, किसी भी ‘टंग’ यानी बुराई को हराने के लिए काफी है—बस नीयत साफ और उद्देश्य सही होना चाहिए।
रेटिंग: ४.५/५
