Close Menu
  • Home
  • Comics
  • Featured
  • Hindi Comics World
  • Trending
  • Blog
  • Spotlight
  • International

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from Comics Bio about art, design and business.

What's Hot

क्या तुरीन सच में ज़िंदा है? गुरु भोकाल की वो सच्चाई जिसने सब बदल दिया! | Amar Prem Part 3 Review

30 April 2026

Is Turin Really Alive? Guru Bhokal Review – A Shocking Emotional Twist: Amar Prem Part 3

30 April 2026

“ऑल-राउंडर वक्र: Haar-Jeet Comics Review – जब Cycling Race बनी Action-Crime Thriller Story!”

30 April 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
comicsbio.comcomicsbio.com
Subscribe
  • Home
  • Comics
  • Featured
  • Hindi Comics World
  • Trending
  • Blog
  • Spotlight
  • International
comicsbio.comcomicsbio.com
Home » जब दिल्ली बन गई माचिस की डिबिया! क्या परमाणु रोक पाएगा कैप्टन डूम का ‘कयामत वाला प्लान’?
Don't Miss Updated:22 March 2026

जब दिल्ली बन गई माचिस की डिबिया! क्या परमाणु रोक पाएगा कैप्टन डूम का ‘कयामत वाला प्लान’?

राज कॉमिक्स का क्लासिक साइंस-एक्शन एडवेंचर, जिसमें परमाणु की बुद्धि और बहादुरी ने कैप्टन डूम के खतरनाक प्लान को किया फेल।
ComicsBioBy ComicsBio2 March 2026Updated:22 March 202606 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Reddit Email
कैप्टन डूम कॉमिक रिव्यू | परमाणु vs कैप्टन डूम | Raj Comics Classic
जब कैप्टन डूम की श्रिंकिंग टेक्नोलॉजी के सामने खड़ा हुआ राज कॉमिक्स का वैज्ञानिक हीरो— परमाणु!
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

90 के दशक में भारतीय बच्चों के लिए सुपरहीरो का मतलब सिर्फ विदेशी फिल्में नहीं, बल्कि राज कॉमिक्स के रंगीन पन्ने हुआ करते थे। नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव के साथ-साथ एक और नाम था जो अपनी वैज्ञानिक ताकतों और ‘इंस्पेक्टर विनय’ की दोहरी पहचान के लिए जाना जाता था— परमाणु। आज हम जिस कॉमिक ‘कैप्टन डूम’ की बात कर रहे हैं, वह सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं है, बल्कि विज्ञान के उन आइडियाज (जैसे ब्लैक होल और मॉलिक्यूलर डेंसिटी) को भी छूती है, जिन्हें पढ़कर उस समय सच में रोंगटे खड़े हो जाते थे।
इस कॉमिक की कहानी ‘कैप्टन डूम’ नाम के एक चालाक विलेन और उसके खतरनाक इरादों के इर्द-गिर्द घूमती है। सोचिए, अगर कोई पूरी दुनिया को सिकोड़कर अपनी जेब में रखना चाहे तो क्या होगा? इसी डरावनी लेकिन रोमांचक कल्पना को यह कॉमिक हकीकत जैसा बना देती है।

एक ऐसी गन जो कुतुब मीनार को ‘खिलौना’ बना दे!

कहानी की शुरुआत एक ऐसी घटना से होती है जो दिल्ली पुलिस और प्रशासन के होश उड़ा देती है। ‘विनाश’ नाम का एक अपराधी, जो कैप्टन डूम का दाहिना हाथ है, दिल्ली के मशहूर टी.वी. टावर के पास पहुँचता है। उसके पास एक ऐसी ‘श्रिंकिंग गन’ (सिकोड़ने वाली बंदूक) है जो किसी भी बड़ी चीज़ को एक पल में चींटी जितना छोटा कर सकती है।
विनाश सिर्फ टावर को छोटा नहीं करता, बल्कि सुरक्षाकर्मियों को भी सिकोड़ देता है। यह सीन पाठक के मन में तुरंत सवाल पैदा करता है कि आखिर यह टेक्नोलॉजी क्या है और इसे कौन चला रहा है? यहीं से परमाणु की एंट्री होती है। परमाणु, जो खुद भी अपने सूट की मदद से छोटा हो सकता है, इस खतरे को तुरंत समझ लेता है।

परमाणु बनाम विनाश: जब ‘दर्द’ भी बन गया दुश्मन का साथी

परमाणु और विनाश के बीच की लड़ाई इस कॉमिक के शुरुआती सबसे मजेदार हिस्सों में से एक है। विनाश सिर्फ एक अपराधी नहीं है, बल्कि वह कैप्टन डूम के वैज्ञानिक प्रयोगों का हिस्सा भी है। लड़ाई के दौरान जब परमाणु उसे चोट पहुँचाता है, तो विनाश एक खास दवा खा लेता है जिससे उसे दर्द महसूस ही नहीं होता।
लेखक हनीफ अजहर ने यहाँ एक बहुत दिलचस्प मानसिक और शारीरिक टकराव दिखाया है। एक ऐसा दुश्मन जिसे दर्द ही न हो, उसे हराना परमाणु के लिए आसान नहीं रहता। परमाणु अपनी समझदारी से विनाश की उस ‘वॉइस एक्टिवेटेड’ गन को बेकार करने की कोशिश करता है, जो कहानी का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनता है।

‘डूम रेज़’ का आतंक: क्या है ब्लैक होल का रहस्य?

इस कॉमिक की सबसे बड़ी ताकत इसका साइंस वाला एंगल है। कैप्टन डूम का दावा है कि उसकी किरणें ‘मॉलिक्यूलर डेंसिटी’ (आणविक घनत्व) को इतना बढ़ा देती हैं कि चीजें सिकुड़कर लगभग गायब होने लगती हैं। कॉिक में प्रोफेसर (जो परमाणु के सलाहकार हैं) बताते हैं कि यह टेक्नोलॉजी ब्लैक होल के सिद्धांत से जुड़ी हुई है।
कैप्टन डूम का मकसद सिर्फ दिल्ली में लूटपाट करना नहीं है, बल्कि वह पूरी दुनिया को ‘डूम्स डे’ (प्रलय के दिन) की तरफ धकेलना चाहता है। वह भारत जैसे बड़े देश को सिकोड़कर पानी के एक छोटे से टब में समाने लायक बनाना चाहता है। यह आइडिया जितना डरावना है, उतना ही पढ़ने में रोमांचक भी लगता है।

दिल्ली में सैलाब: एक छोटे से कैप्सूल में बंद था ‘अरबों लीटर समंदर’

कैप्टन डूम का हमला सिर्फ चीजों को छोटा करने तक सीमित नहीं रहता। कॉमिक के बीच में एक ऐसा सीन आता है जो पाठकों को सच में चौंका देता है। डूम एक छोटा सा कैप्सूल शहर में फेंकता है। जैसे ही वह कैप्सूल फटता है, उसमें सिकुड़ा हुआ अरबों गैलन पानी बाहर निकल आता है, जिससे दिल्ली के आदर्श नगर जैसे इलाकों में अचानक बाढ़ आ जाती है।
यह परमाणु के लिए बहुत बड़ी दुविधा पैदा कर देता है। एक तरफ उसे डूबते लोगों को बचाना है और दूसरी तरफ कैप्टन डूम के उस रॉकेट/सैटेलाइट को रोकना है जो अंतरिक्ष से ‘डूम रेज़’ बरसाने वाला है। यहाँ परमाणु की बहादुरी और उसकी ‘परमाणु रस्सियों’ का शानदार इस्तेमाल देखने को मिलता है।

चूहे और मकड़ियों का खौफ: जब सुपरहीरो खुद बन गया शिकार

कहानी का क्लाइमेक्स एक स्पेस सेंटर में सेट है। यहाँ परमाणु को खुद छोटा होना पड़ता है ताकि वह कैप्टन डूम के कंट्रोल रूम तक पहुँच सके। लेकिन एक ‘नन्हे’ इंसान के लिए दुनिया कितनी खतरनाक हो सकती है, यह इन पन्नों में बहुत अच्छे से दिखाया गया है।
परमाणु को प्रयोगशाला के चूहों, बिल्लियों और विशाल मकड़ियों (जो असल में सामान्य आकार की थीं, लेकिन परमाणु के लिए राक्षस जैसी लग रही थीं) से भिड़ना पड़ता है। एक पैनल में परमाणु को एक बड़ी मकड़ी के जाले में फँसा हुआ और लेजर गन से लड़ते हुए देखना किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसा एहसास देता है। यह हिस्सा पाठक को ‘हनी, आई श्रंक द किड्स’ की याद दिलाता है, लेकिन एक जबरदस्त सुपरहीरो ट्विस्ट के साथ।

‘अर्थमूवर’ और परमाणु की अंतिम रणनीति

जब परमाणु देखता है कि कैप्टन डूम का हाथ एक बड़े लीवर पर है और बस उसी पल से भारी तबाही मच सकती है, तो वह हार मानने वालों में से नहीं निकलता। वह तुरंत आसपास नजर दौड़ाता है और उसे एक छोटा सा खिलौना जैसा दिखने वाला ‘ट्रक’ नजर आता है, जिसे डूम पहले ही सिकोड़ चुका होता है।
परमाणु अपनी परमाणु रस्सी की मदद से उस ट्रक को लीवर से कसकर बांध देता है और पूरी ताकत लगाकर उसका इंजन स्टार्ट कर देता है।

यह पूरा दृश्य परमाणु की असली ताकत दिखाता है। वह सिर्फ ताकत के भरोसे लड़ने वाला हीरो नहीं है, बल्कि दिमाग से खेल पलटने में माहिर है। आखिर में वह कमाल की चाल चलते हुए उन्हीं ‘डूम रेज़’ का रुख मोड़ देता है और कैप्टन डूम के साथ उसके पूरे स्पेस सेंटर को ही सिकोड़ देता है।

कलाकारी और संवाद: संजीव गुप्ता और टीम का जादू

इस कॉमिक की ड्राइंग अपने समय के हिसाब से काफी एडवांस मानी जाएगी। सुरेश दिगवाल और विनोद कुमार ने पात्रों के चेहरे के भाव इतने बढ़िया बनाए हैं कि कैप्टन डूम की शैतानी मुस्कान और परमाणु के सूट की चमक आज भी असर छोड़ती है।
वहीं पेंसिलिंग और इंकिंग में बने डायनेमिक पैनल लेआउट कहानी को और ज्यादा जीवंत बना देते हैं। खासकर जब टी.वी. टावर सिकुड़ता है, तब आर्टिस्ट की बनाई ‘मोशन लाइन्स’ उस खिंचाव और असर को लगभग महसूस करवाती हैं। इसके अलावा राज कॉमिक्स की पहचान रहे साउंड इफेक्ट्स— जैसे भड़ाक, कड़क और आह— की शानदार कैलीग्राफी लड़ाई वाले सीन में पूरी जान डाल देती है।

निष्कर्ष: क्यों पढ़नी चाहिए ‘कैप्टन डूम’?

‘कैप्टन डूम’ सिर्फ एक सुपरहीरो कॉमिक नहीं है, बल्कि उस दौर के लेखकों की जबरदस्त सोच का उदाहरण भी है। इसमें दिखाए गए वैज्ञानिक गैजेट्स और अंतरिक्ष वाली लड़ाई की कल्पना आज के मार्वल या डीसी यूनिवर्स से किसी भी तरह कम नहीं लगती।
सबसे मजेदार बात यह है कि इस कहानी का विलेन सिर्फ ताकतवर नहीं, बल्कि बेहद चालाक दिमाग वाला है, जो परमाणु को हर कदम पर मुश्किल में डाल देता है। इसके साथ ही बाढ़ वाले दृश्य और वैज्ञानिकों की सुरक्षा जैसे पहलुओं के जरिए कहानी वीरता के साथ-साथ नागरिक जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।
अगर आप 90 के दशक के बच्चे रहे हैं, तो परमाणु का ‘ट्रांसमिट’ होना और उसकी ‘परमाणु रस्सियों’ का इस्तेमाल देखना आपके अंदर का नॉस्टेल्जिया तुरंत जगा देगा।

 

कैप्टन डूम कॉमिक का यह विस्तृत हिंदी रिव्यू परमाणु की साइंस-पावर्ड लड़ाई राज कॉमिक्स के गोल्डन एरा के नॉस्टेल्जिया और दमदार विलेन के खतरनाक प्लान की पूरी कहानी बताता है।
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
ComicsBio
  • Website

Related Posts

क्या तुरीन सच में ज़िंदा है? गुरु भोकाल की वो सच्चाई जिसने सब बदल दिया! | Amar Prem Part 3 Review

30 April 2026 Hindi Comics World Updated:30 April 2026

Is Turin Really Alive? Guru Bhokal Review – A Shocking Emotional Twist: Amar Prem Part 3

30 April 2026 Don't Miss Updated:30 April 2026

“ऑल-राउंडर वक्र: Haar-Jeet Comics Review – जब Cycling Race बनी Action-Crime Thriller Story!”

30 April 2026 Editor's Picks
Add A Comment

Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Interesting Ways to Read Free Online Comics

2 September 2025

Deadliest Female Villains in Raj Comics: A Clash with Nagraj

11 September 2024

Read Free Online Comics: Your Ultimate Guide to Digital Comic Reading

30 August 2025

Badass Female of Indian Comics: More Than Just Sidekicks

11 May 2025
Don't Miss

क्या तुरीन सच में ज़िंदा है? गुरु भोकाल की वो सच्चाई जिसने सब बदल दिया! | Amar Prem Part 3 Review

By ComicsBio30 April 2026

राज कॉमिक्स के इतिहास में ‘अमर प्रेम’ श्रृंखला एक ऐसी कहानी के रूप में सामने…

Is Turin Really Alive? Guru Bhokal Review – A Shocking Emotional Twist: Amar Prem Part 3

30 April 2026

“ऑल-राउंडर वक्र: Haar-Jeet Comics Review – जब Cycling Race बनी Action-Crime Thriller Story!”

30 April 2026

All-Rounder Vakra: The Ultimate Battle of Haar-Jeet – Sports, Crime & Victory Unleashed!

30 April 2026
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from Comics Bio about art & design.

About Us
About Us

Welcome to ComicsBio, your one-stop shop for a colorful universe of cartoons, movies, anime, and feature articles!

Email Us: info@comicsbio.com

Our Picks

क्या तुरीन सच में ज़िंदा है? गुरु भोकाल की वो सच्चाई जिसने सब बदल दिया! | Amar Prem Part 3 Review

30 April 2026

Is Turin Really Alive? Guru Bhokal Review – A Shocking Emotional Twist: Amar Prem Part 3

30 April 2026

“ऑल-राउंडर वक्र: Haar-Jeet Comics Review – जब Cycling Race बनी Action-Crime Thriller Story!”

30 April 2026
Most Popular

Interesting Ways to Read Free Online Comics

2 September 2025

Deadliest Female Villains in Raj Comics: A Clash with Nagraj

11 September 2024

Read Free Online Comics: Your Ultimate Guide to Digital Comic Reading

30 August 2025
comicsbio.com
Facebook X (Twitter) Instagram
  • About Us
  • Terms
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • FAQ
© 2026 comicsbio

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.