राज कॉमिक्स के बड़े और रंग-बिरंगे ब्रह्मांड में ‘शक्ति’ एक बिल्कुल अलग और खास किरदार है। जहाँ नागराज और ध्रुव जैसे हीरो अपनी ताकत या दिमाग से अपराधियों से लड़ते हैं, वहीं शक्ति का जन्म ही महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों और मासूमों के हक की रक्षा के लिए हुआ है। चंदा, जो दिल्ली के एक अस्पताल में काम करती है, एक आम सी महिला से देवी ‘शक्ति’ में बदलकर समाज की गंदगी साफ करने निकलती है। “आई शक्ति” इसी न्याय की राह का एक बेहद अहम पड़ाव है।
संजय गुप्ता द्वारा प्रस्तुत और तरुण कुमार वाही व विवेक मोहन द्वारा लिखी गई यह कॉमिक नारी शक्ति, ममता और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने की कहानी है। धीरज वर्मा की शानदार आर्टवर्क ने इस कहानी को और भी ज्यादा असरदार और जीवंत बना दिया है।
कहानी का सारांश: ममता और इंसाफ की आग
कहानी की शुरुआत दिल्ली के ‘न्यू दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ से होती है। यहीं हमारी मुलाकात नायिका चंदा से होती है, जो अस्पताल के रिसेप्शन पर काम करती है। वह अपने काम को पूरी ईमानदारी और समय की पाबंदी के साथ करती है। चंदा का मानना है कि अस्पताल में बिताया गया हर एक पल किसी मरीज के लिए जिंदगी और मौत का फर्क बन सकता है।
अनाथ बच्चों के साथ पिकनिक और टूटी उम्मीदें:

चंदा दिल से बहुत नरम और संवेदनशील है। ड्यूटी खत्म होने के बाद वह ‘आश्रम’ नाम के एक अनाथालय के बच्चों को मनोरंजन पार्क ले जाने का अपना वादा निभाने निकलती है। बच्चे बेहद खुश और उत्साहित होते हैं। चंदा उन्हें बस में बैठाकर पार्क तक ले जाती है, लेकिन वहाँ पहुँचकर सबकी खुशी पल भर में टूट जाती है। सरकार द्वारा टैक्स बढ़ाए जाने की वजह से पार्क का प्रबंधन उसे बंद कर चुका होता है। अनाथ बच्चों की आँखों में आए आँसू चंदा के भीतर छुपी ‘शक्ति’ को जगा देते हैं।
शक्ति का प्रकट होना और अनोखा मनोरंजन:
बच्चों की खुशी वापस लाने के लिए चंदा एकांत में जाकर देवी ‘शक्ति’ का रूप धारण करती है। यहाँ शक्ति का एक अलग ही अंदाज देखने को मिलता है—वह सिर्फ विनाश करने वाली देवी नहीं, बल्कि एक रक्षक और खुशी देने वाली माँ जैसी नजर आती है। वह पार्क के बड़े-बड़े झूलों जैसे कोलम्बस और ड्रैगन ट्रेन को उखाड़कर पार्क के बाहर ले आती है, ताकि बच्चे बिना पैसे दिए मस्ती कर सकें। इतना ही नहीं, झूलों को चलाने के लिए वह भारी जनरेटर तक उठा लाती है। यह पूरा दृश्य शक्ति की जबरदस्त ताकत के साथ-साथ उसके संवेदनशील दिल को भी दिखाता है।
साजिश और जानलेवा हादसा:

जब बच्चे खुशी-खुशी वापस लौट रहे होते हैं, तभी कहानी एक खतरनाक मोड़ ले लेती है। बस के ब्रेक अचानक फेल हो जाते हैं और बच्चे उल्टियाँ करने लगते हैं। बाद में पता चलता है कि उन्हें दिए गए फ्रूटी और बर्गर में जहर मिला हुआ था, यानी यह फूड पॉइजनिंग का मामला था। बस तेज रफ्तार से एक टूटे हुए फ्लाईओवर की ओर बढ़ती जा रही होती है, और हालात बेहद डरावने हो जाते हैं।
पात्रों का चरित्र चित्रण (Character Analysis)
चंदा / शक्ति:
चंदा एक आदर्श कामकाजी महिला है, जो अपने काम को पूरी जिम्मेदारी से निभाती है। वह तब तक शक्ति का रूप नहीं लेती, जब तक इंसानी कोशिशें नाकाम न हो जाएँ। शक्ति का अवतार बेहद उग्र और प्रभावशाली है। वह बाघ की खाल जैसे वस्त्र पहनती है और उसका नीला शरीर उसे बाकी हीरोज़ से अलग पहचान देता है। इस अंक में वह एक माँ की तरह अनाथ बच्चों की रक्षा करती नजर आती है।
आश्रम का मैनेजर (विलेन):
इस कहानी का खलनायक समाज के उस गंदे चेहरे को दिखाता है, जो धर्म और सेवा के नाम पर सिर्फ अपना फायदा देखता है। वह मासूम बच्चों के खाने में जहर मिलाने और उनकी बस का एक्सीडेंट करवाने जैसी घिनौनी हरकतें करने से भी पीछे नहीं हटता। उसका पूरा सोच पैसों की अंधी दौड़ से चलता है।

अनाथ बच्चे:
कहानी में बच्चों की मौजूदगी पाठकों की भावनाओं को गहराई से छूती है। उनकी छोटी-छोटी खुशियाँ और फिर अचानक उन पर आया खतरा पाठक को कहानी से दिल से जोड़ देता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration Review)
धीरज वर्मा की शानदार कला इस कॉमिक की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। उन्होंने न सिर्फ पात्रों की बनावट को दमदार बनाया है, बल्कि एक्शन दृश्यों को भी एक अलग ही लेवल पर पहुँचा दिया है। उनके चित्रों में देवी ‘शक्ति’ का रूप बेहद ताकतवर और भव्य नजर आता है, लेकिन साथ ही उसकी आँखों में दिखने वाली करुणा उसके दिव्य स्वभाव को और गहराई देती है। कॉमिक के एक्शन सीन, खासकर झूलों को उठाने वाले पैनल और फ्लाईओवर पर लोहे को पिघलाने वाले दृश्य, इतने बारीक और डिटेल्ड हैं कि पाठक उन्हें देखकर चकित रह जाता है। वहीं सुनील पाण्डेय की शानदार रंग योजना ने इस कला में जान डाल दी है। शक्ति के चारों ओर बना सुनहरा ‘प्रभामंडल’ (Aura) उसकी ईश्वरीय आभा और असीम ऊर्जा को बहुत साफ और प्रभावशाली तरीके से दिखाता है।
कहानी के सामाजिक और नैतिक पहलू

“आई शक्ति” सिर्फ एक सुपरहीरो एक्शन कॉमिक नहीं है, बल्कि यह समाज के कई कड़वे सच भी सामने लाती है। अनाथालय जैसे पवित्र माने जाने वाले संस्थानों में फैले भ्रष्टाचार को यह कहानी बिना झिझक दिखाती है। कॉमिक अनाथ बच्चों की अनदेखी और उनकी बेबसी पर गहरी चोट करती है। शक्ति का यह संवाद कि “गरीब बच्चा तभी पार्क घूम पाएगा जब मनोरंजन सस्ता होगा” हमारी सरकारी नीतियों पर सीधा और तीखा तंज बन जाता है। चंदा का शक्ति में बदलना इस बात का प्रतीक है कि नारी उस व्यवस्था की गंदगी को साफ कर सकती है, जिसे पुरुष प्रधान सोच ने फैलाया है। यह सोच महिला सशक्तिकरण के विचार को और मजबूत करती है। अंत में शक्ति का यह कहना कि “पैसे की अंधी चमक ने मानवता को चूस डाला है” स्वार्थ और इंसानियत के बीच चल रही लड़ाई को साफ तौर पर सामने रख देता है।
कॉमिक्स की खूबियां और कमियां
खूबियां:
“आई शक्ति” की कहानी मनोरंजन के साथ-साथ गंभीर सामाजिक मुद्दों पर भी मजबूत संदेश देती है। शक्ति की ताकत का इस्तेमाल सिर्फ मार-धाड़ में नहीं, बल्कि बस बचाने और पुल बनाने जैसे रचनात्मक कामों में दिखाना इसे खास बनाता है। बच्चों के साथ शक्ति का भावनात्मक जुड़ाव पूरी कहानी को बेहद संवेदनशील और दिल को छू लेने वाला बना देता है।

कमियां:
विलेन के रूप में मैनेजर जैसे खतरनाक इंसान को पकड़ना शक्ति के लिए ज्यादा मुश्किल नहीं होता, जिससे उसका अंत थोड़ा कमजोर लगता है। अगर विलेन के पास भी कोई खास या अलौकिक ताकत होती, तो कहानी का रोमांच और बढ़ सकता था। साथ ही, शुरुआत में अस्पताल से जुड़े दृश्य थोड़े छोटे रखे जा सकते थे, ताकि मुख्य कहानी को और ज्यादा समय मिल पाता।
तकनीकी पक्ष: लेखन और संवाद
तरुण कुमार वाही और विवेक मोहन ने संवादों को काफी प्रभावशाली बनाया है। शक्ति के संवादों में देवी जैसा गंभीरपन और अधिकार साफ महसूस होता है। जैसे यह संवाद— “निर्दोष व मासूम बच्चों की जान से खेल कर तू आराम की नींद सो रहा है शैतान!”—पाठक के मन में अपराधी के लिए गुस्सा भर देता है।
टी. आर. आज़ाद की कैलीग्राफी साफ और स्पष्ट है, जिससे कॉमिक पढ़ने में कहीं भी दिक्कत नहीं होती। यह अंक राज कॉमिक्स की ‘शक्ति सीरीज’ की एक बेहद अहम कड़ी साबित होता है।
निष्कर्ष: अंतिम राय
“आई शक्ति” एक ऐसी कॉमिक है, जिसे हर उम्र का पाठक पसंद कर सकता है। यह हमें सिखाती है कि हमारे भीतर की शक्ति सिर्फ अपनी रक्षा के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी होनी चाहिए जो खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकते।
यह अंक शक्ति के किरदार की ममतामयी छवि को मजबूती से स्थापित करता है। अनाथ बच्चों के लिए उसकी चिंता उसे सिर्फ एक सुपरहीरोइन नहीं, बल्कि एक सच्चा ‘मसीहा’ बना देती है। धीरज वर्मा का दमदार आर्टवर्क और कहानी में छुपा मजबूत सामाजिक संदेश इस कॉमिक को राज कॉमिक्स के बेहतरीन अंकों में शामिल कर देता है।
अगर आप ऐसी कहानी पढ़ना चाहते हैं जिसमें जबरदस्त एक्शन के साथ गहरी भावनाएँ भी हों, तो “आई शक्ति” आपके लिए एक शानदार अनुभव होगी। यह हमें याद दिलाती है कि न्याय की देवी की आँखें बंद नहीं हैं, और जब अन्याय बढ़ता है, तो उसे सज़ा देने के लिए ‘शक्ति’ का अवतार जरूर होता है।
