90 के दशक में एक ऐसा किरदार आया जिसने सुपरहीरो की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया—वह था ‘एंथोनी’। एंथोनी कोई आम सुपरहीरो या जिंदा इंसान नहीं था, बल्कि एक ‘जिंदा मुर्दा’ था जो रात के अंधेरे में अपराधियों के खिलाफ लड़ाई लड़ता था। साल 1998 में आई कॉमिक ‘दो गज जमीन’ (संख्या 882) एंथोनी सीरीज की ऐसी शानदार कॉमिक है, जो सिर्फ रोमांच ही नहीं देती बल्कि समाज की उस कड़वी सच्चाई को भी दिखाती है, जहाँ इंसान का लालच कब्रिस्तान तक पहुँच जाता है। इस कॉमिक की कहानी मशहूर लेखक संजय गुप्ता के निर्देशन में तैयार की गई थी, जिसने पाठकों को डर, रहस्य और सस्पेंस से भरी एक अलग दुनिया में पहुंचा दिया। इस समीक्षा में हम इस कॉमिक के हर उस पहलू को देखेंगे जो इसे आज भी एक ‘मस्ट-रीड’ कॉमिक बनाता है।
दो गज जमीन और मुर्दा पार्किंग का डरावना खेल

कहानी की शुरुआत एक बहुत गहरी सोच के साथ होती है कि इंसान को मरने के बाद आखिर क्या चाहिए? जवाब मिलता है—दो गज जमीन। लेकिन इस कॉमिक में यही दो गज जमीन सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है। शहर के कब्रिस्तानों पर ‘भांजा’ नाम के एक अजीब विलेन और उसके गिरोह ‘कोबरा’ का कब्जा हो चुका है। उन्होंने एक नया और बेरहम धंधा शुरू किया है, जिसे वे ‘मुर्दा पार्किंग’ कहते हैं। उनका नियम साफ और डरावना है—अगर किसी को अपने घर के किसी सदस्य की लाश दफन करनी है, तो उसे पांच हजार रुपये ‘पार्किंग फीस’ देनी होगी।
कहानी की शुरुआत में ही दिखाया गया है कि कैसे एक गरीब परिवार अपने मृत सदस्य को दफनाने के लिए जगह-जगह भटक रहा है, क्योंकि उनके पास भांजा को देने के लिए पैसे नहीं हैं। वे चर्च के पादरी से मदद मांगते हैं, लेकिन भांजा के गुंडे वहाँ भी पहुँच जाते हैं और पादरी पर जानलेवा हमला कर देते हैं। यहीं से एंथोनी की एंट्री होती है, क्योंकि वह अन्याय सहन नहीं कर सकता, चाहे वह जमीन के ऊपर हो या जमीन के नीचे।
विलेन भांजा: मासूम चेहरा लेकिन खौफनाक ताकत

इस कॉमिक की सबसे खास बात इसका मुख्य विलेन ‘भांजा’ है। आमतौर पर कॉमिक्स के विलेन बड़े और डरावने दिखाए जाते हैं, लेकिन भांजा का अंदाज बिल्कुल अलग है। वह हाफ पैंट पहनता है, गले में बच्चों वाला बिब (Bib) डालता है और उसकी बातें किसी जिद्दी बच्चे जैसी लगती हैं, जो हर समय अपने ‘चंदा मामा’ को याद करता रहता है। लेकिन इस मासूम चेहरे के पीछे एक बेहद खतरनाक और निर्दयी दिमाग छिपा हुआ है।
भांजा के पास ऐसी अलौकिक शक्तियां हैं जो एंथोनी जैसे ताकतवर नायक को भी मुश्किल में डाल देती हैं। उसके चारों तरफ एक ‘अदृश्य दीवार’ रहती है, जिससे टकराकर हर हमला बेकार हो जाता है। इसके साथ ही वह गुरुत्वाकर्षण (Gravity) को कंट्रोल कर सकता है, जिससे वह दुश्मनों को हवा में उछाल देता है या जोर से जमीन पर पटक देता है। उसका यह अजीब व्यक्तित्व—एक बच्चे जैसा दिखना और शैतान जैसी हरकतें करना—पाठकों के मन में एक अलग तरह की बेचैनी पैदा करता है। यही बात इस किरदार को इतना यादगार बनाती है।
एंथोनी बनाम भांजा: जब ठंडी आग टकराई अदृश्य दीवार से
जब एंथोनी को पता चलता है कि मुर्दों की जमीन का सौदा किया जा रहा है, तो वह अपनी ‘ठंडी आग’ के साथ भांजा और उसके गिरोह पर हमला कर देता है। शुरुआत में एंथोनी का मुकाबला कोबरा और उसके गुंडों से होता है, जहाँ वह अपनी जादुई रस्सी और बेखौफ अंदाज का दम दिखाता है। लेकिन जैसे ही उसका सामना सीधे भांजा से होता है, लड़ाई पूरी तरह बदल जाती है।

एंथोनी अपनी पूरी ताकत से हमला करता है, लेकिन भांजा की अदृश्य दीवार की वजह से उसके सारे वार बेकार चले जाते हैं। यहाँ तक कि एंथोनी की सबसे बड़ी शक्ति ‘ठंडी आग’ भी भांजा का कुछ नहीं बिगाड़ पाती। लड़ाई के दौरान भांजा जिस तरह बचकानी हरकतें करते हुए एंथोनी को परेशान करता है और उस पर भारी पड़ता है, वे दृश्य काफी असरदार लगते हैं। एंथोनी को जल्दी ही समझ आ जाता है कि इस रहस्यमयी विलेन को हराना आसान नहीं होगा।
उधर सुबह होने का समय भी करीब आ रहा होता है और सूरज की पहली किरण एंथोनी की शक्तियों को खत्म कर सकती है। इसी वजह से उसे वापस अपनी कब्र में लौटना पड़ता है। एंथोनी की यह हार कहानी को और ज्यादा रोमांचक बना देती है और पाठकों की उत्सुकता अगले घटनाक्रम के लिए और बढ़ जाती है।
इंस्पेक्टर इतिहास की त्रासदी और जुर्म का वो काला चेहरा
कहानी में सिर्फ सुपरहीरो की लड़ाई नहीं दिखाई गई, बल्कि कानून की मजबूरी और उसकी बेबसी को भी अच्छे से दिखाया गया है। इंस्पेक्टर इतिहास, जो राज कॉमिक्स का एक मशहूर किरदार है, इस मामले में दखल देने की कोशिश करता है। वह एक लावारिस लाश को सम्मान के साथ दफनाने के लिए कब्रिस्तान पहुँचता है, लेकिन वहाँ भांजा के गुंडे उसे रोक लेते हैं। जब इंस्पेक्टर इतिहास कानून और अपनी ताकत का दबाव बनाने की कोशिश करता है, तब भांजा खुद उसके सामने आ जाता है।

रेस्टोरेंट में हुए मुकाबले के दौरान भांजा अपनी खतरनाक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इंस्पेक्टर इतिहास को बुरी तरह घायल कर देता है। वह दृश्य काफी डरावना और परेशान कर देने वाला है, जहाँ भांजा इंस्पेक्टर की आँखों की पुतलियों को ऊपर की तरफ खींच देता है, जिससे उसे दिखाई देना बंद हो जाता है। यह साफ दिखाता है कि भांजा सिर्फ कोई साधारण अपराधी या लुटेरा नहीं, बल्कि एक ऐसा सनकी इंसान है जिसे दूसरों को दर्द देकर मजा आता है। पुलिस की यह बेबसी शहर के लोगों के मन में डर को और बढ़ा देती है।
चित्रकारी और संवाद: क्या 1998 की यह कॉमिक आज भी असरदार है?
‘दो गज जमीन’ की सफलता में इसके आर्टिस्ट नीरज वर्मा और विवेक मोहन का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने जिस तरह कब्रिस्तान के माहौल को दिखाया है, वह सच में तारीफ के लायक है। रात का अंधेरा, पेड़ों की परछाइयां, कब्रों के पत्थर और हवा में लहराता एंथोनी का काला कोट—ये सब मिलकर जबरदस्त हॉरर और एक्शन वाला माहौल बना देते हैं।

अगर संवादों की बात करें, तो सुनील पांडेय ने उन्हें काफी दमदार और असरदार रखा है। एंथोनी के संवाद गंभीर और न्याय की बात करने वाले हैं, जबकि भांजा के संवाद डर और ताने से भरे हुए लगते हैं। “मुर्दा पार्किंग” जैसा शब्द उस दौर में काफी नया और अलग था, जो सीधे पाठकों के दिमाग में बैठ गया। यही वजह है कि यह कॉमिक आज भी प्रासंगिक लगती है, क्योंकि यह दिखाती है कि माफिया उन चीजों पर भी कब्जा करना चाहता है जो आम इंसान के लिए सबसे जरूरी होती हैं, यहाँ तक कि मौत के बाद मिलने वाला सुकून भी।
एंथोनी का वफादार साथी प्रिंस और आखिरी पन्नों का सस्पेंस
एंथोनी इस लड़ाई में अकेला नहीं है। उसका वफादार कौआ ‘प्रिंस’ हर समय उसके साथ खड़ा रहता है। इस कॉमिक में प्रिंस की भूमिका भी काफी अहम है, खासकर अंत में जब भांजा, एंथोनी की कब्र तक पहुँचने की कोशिश करता है। प्रिंस अपनी जान खतरे में डालकर एंथोनी की कब्र की रक्षा करता है।

कहानी का अंत एक बड़े सस्पेंस के साथ होता है। भांजा को एंथोनी की कब्र के बारे में पता चल जाता है और वह उसकी पत्नी जूली से पैसे वसूलने की योजना बनाता है। आखिरी पन्नों में प्रिंस की दर्दभरी चीखें और भांजा की चालाक मुस्कान पाठकों को अगले भाग ‘मुर्दा पार्किंग’ को पढ़ने के लिए मजबूर कर देती है। एक अच्छी कॉमिक वही होती है जो अंत में आपके मन में आगे की कहानी जानने की उत्सुकता छोड़ जाए, और ‘दो गज जमीन’ इसमें पूरी तरह सफल साबित होती है।
निष्कर्ष: क्यों हर कॉमिक प्रेमी को पढ़नी चाहिए ‘दो गज जमीन’
कुल मिलाकर, ‘दो गज जमीन’ राज कॉमिक्स के सुनहरे दौर की एक शानदार कॉमिक है। यह सिर्फ एक सुपरहीरो की कहानी नहीं, बल्कि लालच, भ्रष्टाचार और उसके खिलाफ खड़े होने वाले मजबूत हौसले की कहानी भी है। एंथोनी का किरदार, जो खुद एक दर्दनाक अतीत का शिकार है, दूसरों को बचाने के लिए अपनी ही ‘मौत’ को हथियार बना लेता है।
भांजा जैसा अलग और खतरनाक विलेन इस कहानी को कहीं भी बोर नहीं होने देता। अगर आप 90 के दशक की पुरानी यादों को फिर से जीना चाहते हैं, या भारतीय कॉमिक्स की दुनिया को करीब से समझना चाहते हैं, तो यह कॉमिक आपके कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो और उसके पीछे कितनी भी अदृश्य दीवारें क्यों न छिपी हों, न्याय की ‘ठंडी आग’ एक दिन उसे खत्म करके ही रहती है। एंथोनी की यह लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई, लेकिन इसकी शुरुआत इतनी दमदार है कि आप इसे बीच में छोड़ ही नहीं सकते।
