‘छोटा नागराज’ का कॉन्सेप्ट शायद इस सोच के साथ लाया गया था कि नए और युवा पाठकों को नागराज की दुनिया से जोड़ा जा सके और उसकी विरासत को एक नया रूप दिया जाए। इस कॉमिक्स का मुख्य किरदार ‘विषांक’ है, जिसे हम छोटा नागराज के नाम से जानते हैं। यह कॉमिक्स सिर्फ बच्चों के लिए बनी कोई साधारण कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक और दार्शनिक आधार छिपा हुआ है।
यह कॉमिक्स न सिर्फ नागराज के पुराने फैंस के लिए एक नया और अलग अनुभव लेकर आती है, बल्कि राज कॉमिक्स के ब्रह्मांड में एक नई पीढ़ी के आगमन का संकेत भी देती है। करीब 90 पन्नों की इस लंबी कहानी में विज्ञान, फैंटेसी, एक्शन और भावनाओं का ऐसा मेल देखने को मिलता है, जो इसे खास बनाता है।
कथानक का विस्तृत विश्लेषण

कहानी की शुरुआत अंटार्कटिका के ठंडे और बर्फ से ढके इलाके से होती है। लेखक शुरू से ही माहौल को शांत लेकिन रहस्यमय बना देता है। अंटार्कटिका, जहाँ इंसानी गतिविधियाँ बहुत कम हैं, वहाँ अचानक एक सफेद भालू का हिंसक हो जाना और उस पर एक बेहद आधुनिक गन से हमला होना, कहानी में तुरंत सस्पेंस पैदा कर देता है।
इसके बाद कहानी हमें महानिदेशक वेदाचार्य और नागराज के बीच होने वाली बातचीत तक ले जाती है। यहीं पर हमें विषांक यानी छोटा नागराज की असाधारण खूबियों के बारे में पता चलता है। विषांक सिर्फ सात साल का बच्चा है, लेकिन उसकी समझ और दिमाग किसी बड़े वैज्ञानिक से कम नहीं है। पहली कक्षा में पढ़ते हुए भी वह पाँचवीं कक्षा की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर लेता है। यहीं से कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा शुरू होता है—‘विषांक की उत्पत्ति’।

वेदाचार्य बताते हैं कि विषांक कोई आम बच्चा नहीं है। उसका जन्म नागपाशा, यानी नागराज के दुष्ट चाचा, की एक बेहद खतरनाक साजिश का नतीजा था। नागपाशा ने नागद्वीप के दिवंगत राजा मणिराज (जो नागराज के पिता समान थे) की भस्म और अपने ही डीएनए को मिलाकर एक कृत्रिम गर्भाशय में इस बच्चे को तैयार किया था। उसका मकसद था एक ऐसा योद्धा बनाना जो आगे चलकर नागराज का अंत कर सके। लेकिन वेदाचार्य ने अपनी विद्या और शक्तियों से उस बच्चे के भीतर मौजूद नकारात्मक कोशिकाओं को नष्ट कर दिया और सिर्फ सकारात्मक शक्तियों को रहने दिया। इसी तरह विषांक का जन्म हुआ, जिसके पास नागराज जैसी ताकतें और बेहद तेज दिमाग है।
मुख्य संघर्ष: ‘डीन’ और ‘सुपर किड्स’ का षड्यंत्र

कहानी का मुख्य विलेन ‘डीन’ है, जो एक अत्याधुनिक अनाथालय और शिक्षण संस्थान चलाता है। बाहर से यह जगह बच्चों के भविष्य को संवारने वाली लगती है, लेकिन असल में डीन का मकसद पूरी दुनिया के सिस्टम पर कब्जा करना है। इसके लिए उसने ‘सुपर किड्स’ नाम की एक खास फौज तैयार की है। ये बच्चे साधारण नहीं हैं, बल्कि ऐसे क्लोन हैं जिनके दिमाग में इंटरनेट और पूरी दुनिया का डेटा भरा गया है। डीन का मानना है कि अगर राष्ट्रपति के सलाहकार, सीईओ, जज जैसे अहम पदों पर उसके बनाए हुए ये सुपर किड्स बैठ जाएँ, तो पूरी दुनिया उसके इशारों पर चलने लगेगी।
यह सोच आज के दौर में एआई और डेटा कंट्रोल के खतरों की याद दिलाती है। डीन और उसके रहस्यमय पार्टनर, जो बाद में नागपाशा और गुरुदेव निकलते हैं, का यह गठजोड़ कहानी को और भी ज्यादा खतरनाक बना देता है।
एक्शन और रोमांच: नागराज की कैद और बच्चों का मिशन

जब अंटार्कटिका में मौजूद भारतीय बेस लैब से खतरे का संदेश आता है, तो नागराज तुरंत वहाँ पहुँचता है। वहाँ उसका सामना एक विशाल परजीवी से होता है, जो एक सफेद भालू के शरीर के अंदर पल रहा था। नागराज इस लड़ाई में अपनी पूरी ताकत लगा देता है, लेकिन आखिरकार वह डीन के बिछाए गए जाल में फँस जाता है। डीन के पास ऐसी तकनीक है जो नागराज की सबसे बड़ी कमजोरी—निर्दोषों की रक्षा—का फायदा उठाती है। इसी वजह से नागराज को एक खास चैंबर में कैद करके फ्रीज कर दिया जाता है।
यहीं से कहानी की कमान विषांक, साइब्रो (सिल्लू) और फ्लेमिना के हाथों में आ जाती है। ये तीनों ‘लिटिल सुपरहीरोज’ मिलकर नागराज को बचाने के मिशन पर निकलते हैं। स्कूल के अंदर होने वाली घटनाएँ, जैसे शौचालय में बुलीज से उनकी भिड़ंत, कहानी को और मजेदार बना देती हैं। ये सीन न सिर्फ रोमांच बढ़ाते हैं, बल्कि कहानी में हल्का-फुल्का मनोरंजन भी जोड़ते हैं।
पात्र चित्रण (Characterization)

विषांक (छोटा नागराज):
विषांक इस पूरी कहानी का केंद्र है। वह स्वभाव से शांत, गंभीर और बेहद शक्तिशाली है। उसके अंदर नागराज जैसी विनम्रता दिखाई देती है और साथ ही मणिराज जैसी राजसी गरिमा भी झलकती है। उसकी टेलीपैथी और मानसिक शक्तियाँ उसे नागराज से अलग पहचान देती हैं। वह सिर्फ ताकतवर नहीं है, बल्कि सोचने-समझने में भी बहुत आगे है, जो उसे एक खास नायक बनाता है।
नागराज:
हालाँकि कहानी के बीच के हिस्से में नागराज कैद रहता है, फिर भी उसकी मौजूदगी पूरी कॉमिक्स में महसूस होती रहती है। वह विषांक के लिए सिर्फ एक शक्तिशाली नायक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और आदर्श भी है। विषांक के फैसलों और सोच में नागराज की छवि साफ नजर आती है।
साइब्रो और फ्लेमिना:
ये दोनों किरदार विषांक को पूरी तरह संतुलित करते हैं। साइब्रो (सिल्लू) तकनीक, कंप्यूटर और गैजेट्स का उस्ताद है, जबकि फ्लेमिना आग की शक्ति को काबू में रखती है। इन तीनों की आपसी समझ और टीमवर्क देखकर ऐसा लगता है जैसे हम ‘जस्टिस लीग’ या ‘एवेंजर्स’ का कोई जूनियर वर्जन देख रहे हों।

नागपाशा और गुरुदेव:
ये दोनों पुराने दुश्मन हैं, लेकिन इस कहानी में नए अंदाज में सामने आते हैं। नागपाशा की चालाकी और गुरुदेव का वैज्ञानिक दिमाग उन्हें एक बेहद खतरनाक शत्रु बना देता है। ये सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि दिमाग से भी खेलते हैं।
कला और चित्रांकन (Art and Presentation)
इस कॉमिक्स का चित्रांकन अनुपम सिन्हा और उनकी टीम ने किया है। राज कॉमिक्स की पहचान हमेशा से उसका दमदार और जीवंत आर्टवर्क रहा है, और यहाँ भी वही देखने को मिलता है। अंटार्कटिका की बर्फीली दुनिया हो, नागराज के शरीर की स्केल्स हों या लैब के अंदर की मशीनें—हर चीज को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। रंगों का चयन, जो सुनील पांडेय ने किया है, कहानी के मूड के बिल्कुल अनुकूल है। खासतौर पर विषांक के ‘मानस रूप’ को दिखाने के लिए जिस तरह रोशनी और आभा का इस्तेमाल किया गया है, वह देखने में काफी प्रभावशाली और तकनीकी रूप से मजबूत लगता है।
वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण

‘छोटा नागराज’ सिर्फ एक काल्पनिक एक्शन कहानी नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था और विज्ञान की नैतिकता पर भी सवाल खड़े करती है। डीन का ‘सुपर किड्स’ प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि अगर बच्चों को भावनाओं से दूर रखकर सिर्फ जानकारी और डेटा से भर दिया जाए, तो उसका नतीजा कितना खतरनाक हो सकता है। यह कहानी बच्चों पर पढ़ाई के बढ़ते दबाव और उन्हें मशीन की तरह बनाने की सोच पर सीधा हमला करती है।
कॉमिक्स में क्लोनिंग और मेमोरी ट्रांसफर जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं का इस्तेमाल किया गया है, जो साइंस फिक्शन पसंद करने वाले पाठकों को जरूर आकर्षित करता है। साइब्रो का कंप्यूटर सिस्टम हैक करना और विषांक का टेलीपैथी से जानकारी मिटा देना, आधुनिक तकनीक और परा-मनोविज्ञान का एक शानदार मेल दिखाता है।
क्लाइमेक्स और अंत

कहानी का अंत काफी जोरदार और यादगार है। जब विषांक और उसके साथी डीन के हेडक्वार्टर में घुसते हैं, तो उनके सामने सैकड़ों सुपर किड्स खड़े होते हैं। यहाँ विषांक अपनी ताकत से ज्यादा अपनी समझदारी का इस्तेमाल करता है। वह जानता है कि ये बच्चे असल में दुश्मन नहीं हैं, बल्कि सिर्फ आदेशों का पालन कर रहे हैं।
क्लाइमेक्स में फ्लेमिना अपनी आग की शक्ति से नागराज को जमी हुई हालत से बाहर निकालती है। नागपाशा और गुरुदेव अपनी हार देखकर भाग निकलते हैं, लेकिन डीन और उसके पूरे सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है। सुपर किड्स, जो कृत्रिम रूप से बनाए गए थे, आखिरकार पिघलकर समाप्त हो जाते हैं। यह अंत थोड़ा दुखद भी लगता है, क्योंकि वे भी आखिरकार बच्चे ही थे, भले ही क्लोन क्यों न हों।
समीक्षा के मुख्य बिंदु: अच्छाइयां और कमियां

अच्छाइयां:
नागराज की दुनिया में बच्चों को नायक के रूप में पेश करना एक साहसी और सफल प्रयोग है, जो पूरी श्रृंखला में ताजगी भर देता है। कहानी की गति बहुत तेज है और हर 10–15 पन्नों में आने वाला नया मोड़ पाठक की दिलचस्पी बनाए रखता है। संवाद छोटे लेकिन असरदार हैं, खासकर विषांक के संवाद, जो उसकी उम्र से कहीं ज्यादा समझदारी दिखाते हैं। साथ ही, विलेन के रूप में डीन का दुनिया पर नियंत्रण करने का सपना तर्कसंगत लगता है और कहानी के संघर्ष को मजबूत आधार देता है।
कमियां:
क्लोनिंग और डीएनए जैसे तकनीकी विषय कहानी को थोड़ा जटिल बना देते हैं, जिन्हें छोटे पाठकों के लिए पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं हो सकता। इसके अलावा, नागपाशा जैसे ताकतवर और प्रतिष्ठित विलेन का अंत में जल्दी भाग जाना उसकी गंभीरता के साथ थोड़ा अन्याय सा लगता है। हालाँकि, यह जल्दी खत्म होना आगे की कहानियों के लिए सस्पेंस भी तैयार करता है।
निष्कर्ष
‘छोटा नागराज’ राज कॉमिक्स की एक यादगार और महत्वपूर्ण रचना है। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारी, समझदारी और वीरता का संदेश भी देती है। विषांक के रूप में हमें एक ऐसा नायक मिलता है, जिसमें भविष्य में नागराज की जगह लेने की पूरी क्षमता नजर आती है। यह कॉमिक्स साबित करती है कि भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री में आज भी मौलिक और विश्वस्तरीय कहानियाँ कहने की ताकत मौजूद है।
अगर आप नागराज के फैन हैं, तो यह कॉमिक्स आपके कलेक्शन में जरूर होनी चाहिए। और अगर आप नए पाठक हैं, तो ‘छोटा नागराज’ की दुनिया में कदम रखने के लिए यह एक बेहतरीन शुरुआत है। यह कहानी सिखाती है कि असली शक्ति सिर्फ शरीर की ताकत में नहीं, बल्कि सही सोच और निस्वार्थ भावना में होती है। विषांक, साइब्रो और फ्लेमिना की यह तिकड़ी आने वाले समय में और भी बड़े कारनामे करती नजर आएगी।
