भारतीय कॉमिक्स के इतिहास में दुर्गा कॉमिक्स का अपना एक अलग ही रुतबा रहा है। जहाँ राज कॉमिक्स के पास नागराज और परमाणु जैसे सुपरस्टार थे, वहीं दुर्गा कॉमिक्स ने हमें टोरा–टोरा और फाइटर मैन जैसे दमदार और जुझारू हीरो दिए। “इच्छाधारी नागों की जंग” फाइटर मैन सीरीज़ की वही कहानी है जिसमें बदला है, बहादुरी है और जमकर तबाही भी है। 32 पेज की यह कॉमिक पाठकों को रहस्यमयी नाग लोक से लेकर आधुनिक शहर की ऊँची-ऊँची इमारतों तक एक जबरदस्त रोमांचक सफर पर ले जाती है।
कथानक का विस्तृत विश्लेषण:
कहानी की नींव पिछली कड़ियों में हुए टकराव पर टिकी हुई है। फाइटर मैन पहले ही नाग लोक के राजकुमार ब्लैक कोबरा को एक भयानक युद्ध में हरा चुका है, जिसमें वह अपंग और अंधा हो जाता है। अपने राजकुमार की यह हालत देखकर नाग लोक का सम्राट और पूरी नाग जाति फाइटर मैन की जानी-दुश्मन बन जाती है। सम्राट का सेनापति भुजंग देव और ताकतवर त्रिमुखी यानी तीन फन वाला नाग कसम खाते हैं कि वे 24 घंटे के अंदर फाइटर मैन को पकड़कर नाग लोक के कदमों में पटक देंगे।

कहानी की शुरुआत होती है भुजंग देव के पृथ्वी लोक पर आने से। वह इंसान का रूप धरकर शहर के एक महंगे होटल में पहुँचता है और फाइटर मैन के बारे में पूछताछ करता है। जब होटल का स्टाफ कोई जानकारी नहीं दे पाता, तो भुजंग देव अपना असली रंग दिखा देता है। वह अपनी नाग सेना को होटल पर छोड़ देता है। पल भर में पूरा होटल अफरा-तफरी से भर जाता है और हर तरफ साँप ही साँप दिखाई देने लगते हैं। यह सीन इतना डरावना है कि पाठक के मन में अपने आप खौफ बैठ जाता है।
अगले दिन दुर्गा टाइम्स अखबार में भुजंग देव की खुली चेतावनी छपती है। उधर फाइटर मैन, जो उस समय आम कपड़ों में एक ढाबे पर बैठा होता है, वही खबर पढ़ रहा होता है। यहीं कहानी में एक मज़ेदार पल आता है, जब फाइटर मैन एक सरदार जी की मोटरसाइकिल “उधार” लेकर मिशन पर निकल पड़ता है। पीछे से सरदार जी का चिल्लाना—“ओए चोर… मेरी मोटरसाइकिल ले गया!”—कहानी में हल्की-सी कॉमिक राहत जोड़ देता है।

अपनी साजिश के तहत भुजंग देव और त्रिमुखी एक स्कूल पिकनिक पर हमला करते हैं। वे सिर्फ बच्चों को डराते ही नहीं, बल्कि हद से ज़्यादा क्रूरता दिखाते हुए टीचर और बच्चों को साँपों की मदद से पेड़ों पर लटका देते हैं। यह सब जानबूझकर किया जाता है ताकि फाइटर मैन को उकसाया जा सके। फाइटर मैन मौके पर पहुँचता है और यहीं पहली बार उसका टाइगर प्रिंट वाला सुपरहीरो लुक पूरी शान के साथ सामने आता है।
युद्ध और शक्तियों का प्रदर्शन:
फाइटर मैन और भुजंग देव के बीच की टक्कर इस कॉमिक का पहला बड़ा एक्शन सीन है। भुजंग देव अपनी जहरीली फुंकार छोड़ता है, लेकिन फाइटर मैन पर उसका कोई असर नहीं होता। यह देखकर भुजंग देव खुद हैरान रह जाता है कि एक इंसान उसके ज़हर से कैसे बच सकता है। यहाँ फाइटर मैन की मजबूत काया और ज़हर के खिलाफ उसकी ताकत को साफ दिखाया गया है।

इसके बाद भुजंग देव विशाल नाग का रूप ले लेता है और फाइटर मैन को अपनी कुंडली में जकड़ लेता है। फाइटर मैन पूरी ताकत लगाकर खुद को छुड़ाने की कोशिश करता है, लेकिन भुजंग देव की पकड़ बेहद मजबूत होती है। जब वह फाइटर मैन को नाग लोक ले जाने ही वाला होता है, तभी फाइटर मैन अपनी आँखों से एक तेज़ प्रकाश पुंज छोड़ता है। इस रोशनी से भुजंग देव अंधा हो जाता है और उसे पकड़ ढीली करनी पड़ती है। अंत में फाइटर मैन अपने विशाल चक्र से भुजंग देव के शरीर को दो हिस्सों में काट देता है। ऊपर वाले हिस्से को वह अपनी आँखों की आग से जला देता है, लेकिन निचला हिस्सा रहस्यमय तरीके से गायब हो जाता है।
महाविनाश का तांडव:
भुजंग देव की मौत की खबर मिलते ही त्रिमुखी पूरी तरह बेकाबू हो जाता है। अब उसका मकसद सिर्फ फाइटर मैन को मारना नहीं, बल्कि पूरे शहर को तबाह करना होता है। त्रिमुखी की ताकतें भुजंग देव से कहीं ज़्यादा खतरनाक हैं। वह शहर की सड़कों पर विषैली फुंकार छोड़ता है, जिससे लाशों के ढेर लग जाते हैं। उसकी तूफानी फुंकार पेड़ों और लोगों को हवा में उड़ा देती है और अग्नि फुंकार से ऊँची-ऊँची इमारतें आग की चपेट में आ जाती हैं।

पूरा शहर किसी नरक से कम नहीं लगता। एक 22 मंज़िला बिल्डिंग में भीषण आग लग जाती है, जहाँ कई बच्चे फँसे होते हैं। यहीं फाइटर मैन का एक अलग ही रूप सामने आता है—एक ऐसा हीरो जो दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं करता। वह खिड़की तोड़कर अंदर घुसता है, बच्चों को हिम्मत देता है और रस्सी के सहारे सभी बच्चों को अपने शरीर से बाँधकर बिल्डिंग से नीचे छलांग लगा देता है। यह सीन रोमांच के साथ-साथ भावनाओं को भी छू जाता है।
अंतिम संघर्ष:
फाइटर मैन समझ जाता है कि अगर शहर के बीचों-बीच लड़ाई हुई तो और ज़्यादा तबाही होगी। वह त्रिमुखी को समुद्र के किनारे ले जाता है। समुद्र तट पर त्रिमुखी अपनी पूरी आसुरी ताकत झोंक देता है। वह तूफान, ज़हर और आग—तीनों को मिलाकर हमला करता है, लेकिन फाइटर मैन चट्टान की तरह डटा रहता है। आखिरकार, फाइटर मैन अपने चक्र के एक ही वार में त्रिमुखी के तीनों सिर धड़ से अलग कर देता है और उनके टुकड़ों को समुद्र में फेंक देता है।

कहानी का अंत एक कड़े संदेश के साथ होता है। फाइटर मैन नाग सम्राट को साफ चेतावनी देता है कि अगर उसने अपनी हरकतें नहीं बदलीं, तो वह खुद नाग लोक पहुँचकर सब कुछ तबाह कर देगा।
पात्र चित्रण (Character Sketches):
फाइटर मैन एक ऐसा सुपरहीरो है जिसमें ताकत और समझदारी दोनों का शानदार मेल है। उसका लुक दमदार है, लेकिन बच्चों के लिए उसका दिल बेहद नरम है। उसकी आँखें सिर्फ गुस्सा ही नहीं दिखातीं, बल्कि खतरनाक किरणें भी छोड़ सकती हैं।
भुजंग देव एक वफादार सेनापति है, लेकिन उसका घमंड ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनता है। वह मशीनों से ज़्यादा अपनी मायावी ताकतों पर भरोसा करता है।

त्रिमुखी इस कॉमिक का सबसे डरावना किरदार है। उसके तीन फन हवा, ज़हर और आग जैसे विनाशकारी तत्वों का प्रतीक हैं। उसका लुक उसे किसी अजेय राक्षस जैसा बना देता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):
कॉम–मैग आर्ट्स ने इस कॉमिक में सच में जान डाल दी है। एक्शन सीन में पैनल का इस्तेमाल बहुत सटीक है। जब भुजंग देव फाइटर मैन को जकड़ता है, तो पैनल इतने तंग महसूस होते हैं कि पाठक खुद घुटन महसूस करने लगता है।
नाग लोक के दृश्यों में गहरे हरे और पीले रंग उसे रहस्यमय बनाते हैं, जबकि जलते हुए शहर में लाल और नारंगी रंग गर्मी और डर दोनों का एहसास कराते हैं।
भाषा और संवाद:
लेखक डी.डी. पोशीवाल के संवाद सीधे और असरदार हैं। भुजंग देव के शब्दों में घमंड और नफरत साफ झलकती है, वहीं फाइटर मैन के संवाद आत्मविश्वास और इंसाफ की बात करते हैं। “प्यार और जंग में सब जायज़ होता है भुजंग देव!” जैसे फिल्मी लेकिन दमदार डायलॉग कहानी को और मज़ेदार बना देते हैं।
समीक्षात्मक टिप्पणी:

“इच्छाधारी नागों की जंग” सिर्फ हीरो और विलेन की लड़ाई नहीं है, बल्कि उस दौर की कॉमिक्स लेखन की कल्पनाशीलता का बढ़िया उदाहरण है। आज जहाँ कॉमिक्स ज़्यादा रियल बनने की कोशिश करते हैं, वहीं यह कहानी बिना झिझक फैंटेसी और एक्शन का खुलकर मज़ा देती है।
हाँ, कुछ जगह लॉजिक की अनदेखी ज़रूर हुई है, जैसे फाइटर मैन का पल भर में बच्चों को बचाकर कूद जाना, लेकिन कॉमिक्स की दुनिया में ऐसे बड़े और असंभव लगने वाले सीन ही बच्चों को सबसे ज़्यादा पसंद आते हैं। भुजंग देव के शरीर का आधा हिस्सा गायब होकर बाद में त्रिमुखी से जुड़ना एक अच्छा प्लॉट ट्विस्ट साबित होता है।
निष्कर्ष:
दुर्गा कॉमिक्स की यह प्रस्तुति अपने नाम की तरह ही एक सच्ची “जंग” है। फाइटर मैन का किरदार बच्चों को बहादुरी और कमजोरों की मदद करने की सीख देता है। कहानी का अंत सस्पेंस के साथ होता है, जो पाठक को अगले अंक “फाइटर मैन की रणयात्रा” के लिए बेसब्र कर देता है।
अगर आप पुरानी भारतीय कॉमिक्स के शौकीन हैं और नागों की पौराणिक कहानियों के साथ सुपरहीरो एक्शन देखना चाहते हैं, तो यह कॉमिक आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए। यह हमें उस दौर में वापस ले जाती है जब गर्मी की छुट्टियों का असली मज़ा नई कॉमिक्स के पन्नों में खो जाने में होता था।
