90 के दशक में भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में सिर्फ राज कॉमिक्स ही नहीं, बल्कि ‘मनोज कॉमिक्स’ ने भी अपनी अलग और यादगार पहचान बनाई थी। उस समय के सबसे लोकप्रिय नायकों में से एक ‘जटायु’ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी हर नई कॉमिक्स का पाठक बेसब्री से इंतजार करते थे। पपिन्दर जुनेजा द्वारा लिखी गई और ए.एम.जी. के शानदार चित्रों से सजी कॉमिक ‘जटायु और अखण्डा’ जटायु सीरीज की ऐसी क्लासिक कॉमिक है, जो सिर्फ रोमांच से भरी नहीं है, बल्कि फंतासी और अंतरिक्ष युद्ध का एक जबरदस्त मेल भी दिखाती है। इस कॉमिक की कहानी उस दौर के हिसाब से काफी एडवांस थी, जहाँ पृथ्वी के एक राजा और दूसरे ग्रह के सम्राट के बीच पुराने बदले की कहानी दिखाई गई थी। जटायु, जो अपनी ‘समयशक्ति’ तलवार के लिए मशहूर है, इस कहानी में अपनी बहादुरी के सबसे बड़े रूप में नजर आता है। आज की इस विस्तृत समीक्षा में हम इस कॉमिक के हर उस पहलू को देखेंगे, जो इसे आज भी कॉमिक्स प्रेमियों के लिए एक अनमोल खजाना बनाता है।
राजा शत्रुदमन पर टूटा अखण्डा का कहर: क्या था तिलक नगर के विनाश का रहस्य?

कहानी की शुरुआत किसी महाकाव्य की तरह होती है, जहाँ तिलक नगर के न्यायप्रिय राजा शत्रुदमन अपनी रानी प्रियदर्शी के साथ गणेश पूजा में लीन हैं। तभी अचानक आपातकालीन घंटी बजती है और पता चलता है कि न्यूवांटा ग्रह के राजा ‘अखण्डा’ ने अपनी विशाल और मायावी सेना के साथ तिलक नगर पर हमला कर दिया है। यह हमला कोई साधारण हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई सालों पुरानी नफरत छिपी थी। अखण्डा अपने साथ तांत्रिक ‘गिल्ला-बिल्ला’ और अपनी सेना को लेकर आता है, जिनके पास ऐसे दिव्यास्त्र हैं जिनका मुकाबला करना पृथ्वी के सैनिकों के लिए लगभग नामुमकिन था। राजा शत्रुदमन अपनी सेना के साथ युद्ध के मैदान में उतरते हैं और अपनी तलवार ‘शीशकटिका’ से दुश्मनों का संहार शुरू कर देते हैं। लेकिन जब उनका सामना सीधे अखण्डा से होता है, तब उन्हें पता चलता है कि उनकी तलवार अखण्डा के शरीर पर कोई असर नहीं कर रही। अखण्डा का जोरदार अट्टहास और तांत्रिक की मायावी शक्तियां राजा शत्रुदमन को बंदी बना लेती हैं, जिससे पूरे राज्य में हाहाकार मच जाता है।
जटायु बनाम तांत्रिक गिल्ला-बिल्ला: समयशक्ति और कपालदण्ड के बीच का खूनी महासंग्राम
जब रानी प्रियदर्शी अपने पति को बचाने के लिए युद्ध क्षेत्र में पहुँचती हैं, तब तांत्रिक गिल्ला-बिल्ला अपनी तांत्रिक शक्तियों से उन पर हमला कर देता है। रानी अचेत होकर आकाश से नीचे गिरने लगती हैं और यहीं से कहानी के महानायक ‘जटायु’ की एंट्री होती है। जटायु अपनी दिव्य दृष्टि से खतरे को पहचान लेता है और सही समय पर पहुँचकर रानी की जान बचा लेता है। जटायु का किरदार हमेशा से शांत लेकिन बेहद शक्तिशाली दिखाया गया है। जब उसे पूरी सच्चाई पता चलती है, तो वह अकेले ही न्यूवांटा ग्रह की तरफ निकल पड़ता है।
न्यूवांटा ग्रह पर जटायु का सामना सिर्फ अखण्डा की सेना से नहीं होता, बल्कि गिल्ला-बिल्ला के खतरनाक राक्षसों जैसे ‘बांगचू’ और एक विशाल डायनासोर जैसे जीव से भी होता है। यहाँ जटायु की तलवार ‘समयशक्ति’ और तांत्रिक के ‘कपालदण्ड’ के बीच जो मुकाबला दिखाया गया है, वह पाठकों की धड़कनें तेज कर देता है। समयशक्ति से निकलने वाली किरणें और तांत्रिक की काली शक्तियां जब आपस में टकराती हैं, तो पूरा दृश्य जादुई रोमांच से भर जाता है।
सिंहराज का अनसुलझा रहस्य: आखिर कौन था वो शेर जिसने जटायु का साथ दिया?

कहानी का सबसे रहस्यमयी किरदार ‘सिंहराज’ है, जो एक शेर के रूप में जटायु की मदद करता है। न्यूवांटा ग्रह की गुफाओं में जब जटायु चारों तरफ से घिर जाता है, तब यह शेर अपनी बहादुरी दिखाते हुए जटायु का साथ देता है। पाठक पूरी कहानी के दौरान यह सोचते रहते हैं कि आखिर एक जानवर में इंसानों जैसी समझ और युद्ध कला कैसे हो सकती है? बाद में पता चलता है कि यह कोई साधारण शेर नहीं, बल्कि देवपुत्र ‘मयंक’ है, जो अपनी माँ के श्राप की वजह से सिंह का रूप धारण करने को मजबूर था। मयंक का किरदार कहानी में एक भावनात्मक गहराई जोड़ता है। उसकी बेबसी और फिर जटायु के प्रति उसकी वफादारी यह दिखाती है कि न्याय की लड़ाई में कभी-कभी प्रकृति भी साथ देती है। मयंक और जटायु की जोड़ी ने इस कॉमिक को सिर्फ एक एक्शन कॉमिक से ऊपर उठाकर एक शानदार एडवेंचर गाथा बना दिया है।
गंधर्व पुत्री प्रियदर्शी और मृदुण्डा का वो खूनी स्वयंवर: जहाँ से शुरू हुई नफरत की कहानी
कॉमिक का फ्लैशबैक हिस्सा हमें पाँच साल पीछे ले जाता है, जहाँ इस पूरी दुश्मनी की असली जड़ छिपी है। रानी प्रियदर्शी, जो गंधर्व राज गंधर्वसेन की पुत्री थीं, उनके स्वयंवर में राजा शत्रुदमन ने जीत हासिल की थी। लेकिन न्यूवांटा का राजकुमार और अखण्डा का पुत्र ‘मृदुण्डा’ इस हार को सहन नहीं कर पाया और उसने भरी सभा में रानी का अपमान करने की कोशिश की। राजा शत्रुदमन ने अपनी तलवार ‘शीशकटिका’ से मृदुण्डा का वध कर दिया। जब मृदुण्डा का कटा हुआ सिर सीधे तपस्या में लीन अखण्डा की गोद में गिरा, तब उसके बदले की आग ने तिलक नगर के विनाश की कहानी लिख दी। यह हिस्सा कहानी को एक मजबूत नैतिक आधार देता है कि कैसे एक पिता का पुत्र-मोह उसे अंधा बना देता है और वह गलत का साथ देने लगता है। अखण्डा का गुस्सा सही लगता है, लेकिन उसका तरीका गलत है, और यही टकराव कहानी को और ज्यादा रोचक बनाता है।
न्यूवांटा ग्रह का भयानक मंजर: जटायु की सबसे कठिन और असंभव चुनौतियों में से एक

चित्रांकन के मामले में ए.एम.जी. ने न्यूवांटा ग्रह को जिस तरह दिखाया है, वह सच में तारीफ के काबिल है। उड़ने वाले घोड़े, अजीब आकार वाले राक्षस और अंतरिक्ष के नजारे उस दौर के बच्चों के लिए किसी सपनों की दुनिया से कम नहीं थे। जटायु को इस ग्रह पर हर कदम पर मौत का सामना करना पड़ता है। सेनापति ‘बन्दूका’ की गदा और जटायु की तलवार की टक्कर हो या तांत्रिक द्वारा छोड़े गए मायावी गोले, हर पैनल में नया रोमांच देखने को मिलता है। जटायु का अपनी समयशक्ति की किरणों का सही इस्तेमाल करना और मुश्किल हालात में अपनी समझदारी दिखाना उसे एक महान नायक के रूप में स्थापित करता है। यह कॉमिक हमें बताती है कि एक सच्चा योद्धा सिर्फ अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपनी समझ और धैर्य से भी जीतता है।
चक्र और हुड़दंगा की रहस्यमयी एंट्री: जब जीत के बीच में ही गायब हो गए महाखलनायक
कहानी के क्लाइमेक्स में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आता है। जब जटायु और मयंक लगभग जीत चुके होते हैं और तांत्रिक की शक्तियां खत्म हो जाती हैं, तभी अचानक आसमान में एक विशाल पक्षी के साथ दो नए किरदारों ‘चक्र’ और ‘हुड़दंगा’ की एंट्री होती है। ये दोनों जादूगर हैं, जो अखण्डा और गिल्ला-बिल्ला को अपनी कैद में लेकर अचानक गायब हो जाते हैं। यह कहानी का ऐसा मोड़ था जिसने पाठकों को अगली कॉमिक के लिए और ज्यादा उत्साहित कर दिया। अक्सर कॉमिक्स में विलेन हार जाता है या मारा जाता है, लेकिन यहाँ विलेन को किसी तीसरे पक्ष द्वारा उठा लिया जाना एक नई कहानी की शुरुआत जैसा लगता है। यह दिखाता है कि बुराई कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती, वह सिर्फ अपना रूप बदल लेती है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा बन जाती है।
अंत भला तो सब भला: मयंक की मुक्ति और जटायु की अमर गाथा का सुखद समापन

कॉमिक का अंत बेहद भावुक कर देने वाला है। देवपुत्र मयंक, जिसने जटायु की मदद करके अपनी माँ के श्राप की शर्त पूरी कर दी थी (कि जब वह किसी संकट में फंसे इंसान की मदद करेगा, तब उसे मुक्ति मिलेगी), वह अपने असली रूप में वापस आ जाता है। जटायु और मयंक के बीच का संवाद दोस्ती और सम्मान की एक खूबसूरत मिसाल बन जाता है। राजा शत्रुदमन को तिलक नगर वापस भेज दिया जाता है और राज्य में फिर से शांति लौट आती है। जटायु का अपनी दुनिया की ओर लौट जाना और मयंक का देवलोक जाना कहानी को एक संतोषजनक अंत देता है। यह कॉमिक हमें यह संदेश देती है कि चाहे दुश्मन कितना भी ताकतवर क्यों न हो, सच और साहस के सामने उसे आखिरकार झुकना ही पड़ता है।
निष्कर्ष: क्यों हर कॉमिक्स प्रेमी को एक बार जरूर पढ़नी चाहिए ‘जटायु और अखण्डा’
कुल मिलाकर, ‘जटायु और अखण्डा’ मनोज कॉमिक्स के स्वर्ण युग की एक शानदार धरोहर है। यह कॉमिक सिर्फ अपनी कहानी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने चरित्र चित्रण और शानदार विजुअल्स के लिए भी याद की जाती है। जटायु का आत्मविश्वास, अखण्डा का बदला और मयंक का त्याग—ये सब मिलकर एक ऐसी कहानी बनाते हैं जिसे आज भी पढ़ना उतना ही मजेदार लगता है जितना बीस-तीस साल पहले लगता था। पपिन्दर जुनेजा की लेखनी में वो जादू है, जो पाठकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। अगर आप अपनी पुरानी यादों को फिर से जीना चाहते हैं या भारतीय कॉमिक्स के क्लासिक दौर को समझना चाहते हैं, तो यह कॉमिक आपके संग्रह में जरूर होनी चाहिए। यह हमें याद दिलाती है कि हमारे देसी सुपरहीरो भी किसी अंतरराष्ट्रीय किरदार से कम नहीं थे। जटायु की यह जंग हमेशा पाठकों के दिलों में एक खास जगह बनाए रखेगी।
