भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में ‘फोर्ट कॉमिक्स’ (Fort Comics) का अपना अलग ही अंदाज़ रहा है। जहाँ एक तरफ राज कॉमिक्स और डायमंड कॉमिक्स ने हमें चमक-दमक वाले सुपरहीरो दिए, वहीं फोर्ट कॉमिक्स ने ऐसे किरदार रचे जो थोड़े ज़्यादा कच्चे, जंगली और प्रकृति के बेहद करीब थे। इन्हीं में से एक दमदार और यादगार किरदार है ‘महाबली सैन्डो’ (Mahabali Sandy)।
‘महाबली सैन्डो और कालदेव’ इसी किरदार की एक बेहद रोमांचक कहानी है, जो हमें तपते रेगिस्तान, रहस्यमयी शक्तियों और आधुनिक हथियारों की टक्कर तक ले जाती है। यह कॉमिक सिर्फ एक सुपरहीरो की कहानी नहीं है, बल्कि इसमें साहस, सच्ची वफादारी और प्रकृति की बेकाबू ताकत को बहुत प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है।
कथानक का विस्तृत विश्लेषण:
कहानी की शुरुआत होती है सहारा के रेगिस्तान से, जहाँ हालात इतने कठोर हैं कि ज़िंदगी खुद एक चुनौती बन जाती है। इसी रेगिस्तान में हमारा नायक सैन्डो अपने दो पक्के साथियों के साथ आराम करता दिखता है—लीपो, जो एक चालाक और तेज़ भेड़िया/कुत्ता है, और पैन्थर, जो एक ताकतवर सफेद घोड़ा है। सैन्डो का किरदार कुछ-कुछ टार्ज़न जैसे जंगली योद्धा और किसी दिव्य शक्ति से भरे इंसान का मिला-जुला रूप लगता है।

कहानी में असली मोड़ तब आता है जब लीपो को अचानक किसी खतरे का एहसास होता है। दूर से एक लड़की की चीख सुनाई देती है। यह लड़की है चिन्द्राली, जो बाबू कबीले के सरदार कपाली की बेटी है। उसे कालदेव नाम के एक बेहद क्रूर अपराधी के आदमी जबरदस्ती अगवा करके ले जा रहे होते हैं। कालदेव की मंशा चिन्द्राली से जबरन ‘गंधर्व विवाह’ करने की है।
यहीं हमें सैन्डो की सबसे खास ताकत का पता चलता है—रेत। सैन्डो सिर्फ ताकतवर इंसान नहीं है, बल्कि वह रेत पर पूरा नियंत्रण रखता है। जहाँ वह चलता है, वहाँ रेत मानो उसके साथ उठने लगती है। वह कालदेव के गुंडों पर कहर बनकर टूट पड़ता है। गोलियाँ उसका कुछ नहीं बिगाड़ पातीं, क्योंकि उसका शरीर फौलाद से भी ज़्यादा सख्त है। देखते ही देखते वह गुंडों को धूल चटा देता है और चिन्द्राली को सुरक्षित बचा लेता है।
इसके बाद चिन्द्राली सैन्डो को अपने कबीले की हालत के बारे में बताती है। कालदेव ने कबीले पर हमला कर दिया है, चारों तरफ तबाही मचा दी है और उसके पिता कपाली को बुरी तरह घायल कर दिया है। सैन्डो चिन्द्राली के साथ उसके कबीले पहुँचता है। यहीं उसकी एक और अनोखी शक्ति सामने आती है—इलाज करने की ताकत। वह कपाली के ज़ख्मों पर अपना हाथ रखता है और घाव धीरे-धीरे जादू की तरह भरने लगते हैं। कबीले के लोग उसे भगवान समझने लगते हैं, लेकिन सैन्डो बहुत सादगी से कहता है कि वह भी उन्हीं की तरह एक आम इंसान ही है।

उधर दूसरी तरफ कालदेव अपने अड्डे पर गुस्से से आग-बबूला है। उसका किरदार एक क्लासिक विलेन जैसा दिखाया गया है—हरे रंग की त्वचा, खतरनाक चेहरा और ताकत का भूखा दिमाग। जब उसे पता चलता है कि किसी ‘रेतीले शैतान’ ने उसके सारे प्लान खराब कर दिए हैं, तो वह बौखला जाता है। वह अपने गुरु ‘कालाग्नि’ को बुलाता है, जो एक अग्नि-देव और तांत्रिक शक्ति रखने वाला रहस्यमयी व्यक्ति है। यहीं एक चौंकाने वाला राज सामने आता है—कालाग्नि बताता है कि सैन्डो का अतीत पूरी तरह शून्य है और उसका भविष्य भी तय नहीं है। साफ है कि सैन्डो कोई साधारण इंसान नहीं है।
कहानी में एक और ज़बरदस्त मोड़ तब आता है जब सैन्डो और चिन्द्राली रेगिस्तान से गुजर रहे होते हैं और उन पर हमला करता है त्रिफणी, एक विशाल तीन-सिरों वाला सांप। सैन्डो अपनी अपार ताकत से उसे काबू में कर लेता है। त्रिफणी बताता है कि वह असल में साँपों का राजा है, लेकिन कालदेव ने उसे अपनी तांत्रिक शक्तियों से गुलाम बना रखा है। सैन्डो की दया और इंसानियत देखकर त्रिफणी उसका मित्र बन जाता है और एक विशाल दानव का रूप लेकर उसकी मदद करने को तैयार हो जाता है।
चरमोत्कर्ष (Climax):
कहानी का आख़िरी और सबसे भयानक हिस्सा होता है ‘मौत की घाटी’ में। इस बार कालदेव पूरी तैयारी के साथ आता है। अब वह सिर्फ जादू के भरोसे नहीं है, बल्कि उसके पास आधुनिक हेलीकॉप्टर और खतरनाक विस्फोटक भी हैं। यह पूरा दृश्य साफ़ तौर पर प्रकृति बनाम मशीन की लड़ाई को दिखाता है। कालदेव के हेलीकॉप्टर सैन्डो और उसके साथियों पर ज़बरदस्त बमबारी करते हैं। घाटी में पानी का रास्ता रोकने वाले पत्थरों को उड़ा दिया जाता है, ताकि सैन्डो बाढ़ में बह जाए।

लेकिन यहीं सैन्डो अपनी असली और चरम शक्ति दिखाता है। वह अपने मुँह से रेत उगलने लगता है, जो कुछ ही पलों में एक भयानक रेतीले बवंडर में बदल जाती है। यह बवंडर इतना ताकतवर होता है कि कालदेव के आधुनिक हेलीकॉप्टर खिलौनों की तरह आपस में टकराकर तबाह हो जाते हैं। कालदेव अपनी फायरप्रूफ जैकेट और पैराशूट की मदद से किसी तरह जान बचाकर भाग निकलता है, लेकिन उसके गुंडे और सारी मशीनें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं। कहानी कालदेव के भागने और सैन्डो की शानदार जीत के साथ खत्म होती है, जो आने वाले और भी बड़े संघर्षों की ओर इशारा करती है।
पात्रों का गहरा विश्लेषण:

महाबली सैन्डो: वह इस कॉमिक्स की असली जान है। उसके सुनहरे लंबे बाल, मजबूत और गठीले शरीर के साथ रेगिस्तान से उसका गहरा जुड़ाव उसे बाकी सुपरहीरो से अलग पहचान देता है। वह न्याय के रास्ते पर चलने वाला किरदार है और पशुओं के प्रति उसका लगाव साफ दिखाई देता है। उसकी शक्तियाँ—रेत पर नियंत्रण, लगभग अजेय शरीर और दूसरों को ठीक करने की क्षमता—उसे एक साधारण इंसान से ऊपर, लगभग एक अर्ध-देवता जैसा रूप देती हैं।
चिन्द्राली: वह सिर्फ़ एक मुसीबत में फंसी लड़की नहीं है। वह अपने कबीले के लिए समर्पित है और जरूरत पड़ने पर साहस भी दिखाती है। कहानी में उसका किरदार मजबूत है और सैन्डो के साथ उसका रिश्ता कहानी में एक नरम, भावनात्मक पहलू जोड़ता है, जो एक्शन के बीच संतुलन बनाता है।
कालदेव: वह एक दमदार और याद रहने वाला खलनायक है। उसके पास पैसा है, ताकत है और साथ ही तांत्रिक शक्तियाँ भी। उसका हरे रंग का रूप शायद उसके भीतर भरे ज़हर, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच को दर्शाता है। सबसे अहम बात यह है कि वह आसानी से हार मानने वाला नहीं है, जिससे वह सैन्डो के लिए एक लंबे समय तक चलने वाला खतरा बन जाता है।
लीपो और पैन्थर: ये सिर्फ जानवर नहीं हैं, बल्कि सैन्डो के परिवार की तरह हैं। लीपो की तेज़ सूंघने की क्षमता और पैन्थर की जबरदस्त रफ्तार कई मौकों पर सैन्डो की मदद करती है। इन दोनों के बिना सैन्डो का किरदार अधूरा सा लगता है।
कला और चित्रांकन (Art and Illustration):
‘पल्लवी इलस्ट्रेटर’ द्वारा किया गया चित्रांकन इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। 90 के दशक की क्लासिक शैली में बनाए गए चमकदार और जीवंत रंग कहानी को और प्रभावशाली बनाते हैं। रेगिस्तान के दृश्यों में पीले और नारंगी रंगों का इस्तेमाल बहुत सुंदर ढंग से किया गया है, जो गर्मी और वीरानी दोनों का अहसास कराता है।
लड़ाई और बवंडर वाले दृश्यों में गति का एहसास देने के लिए रेखाओं का इस्तेमाल बेहद शानदार है। ‘धांय-धांय’, ‘धड़ााम’, ‘सांय-सांय’ जैसे शब्दों का साइज और सही जगह पर इस्तेमाल पाठक को सीधे एक्शन के बीच ले जाता है।

खास तौर पर त्रिफणी (तीन सिर वाला सांप) और कालदेव के महल का चित्रण काफी कल्पनाशील और डरावना है। पात्रों के चेहरे के भाव—खासकर सैन्डो की आंखों में दिखाई देने वाला आत्मविश्वास और कालदेव के चेहरे पर झलकती चालाकी—बिना बोले भी बहुत कुछ कह जाते हैं।
साहित्यिक और नैतिक मूल्य:
यह कॉमिक्स सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई गहरे संदेश भी देती है। यह साफ दिखाती है कि प्रकृति की ताकत के सामने इंसान की मशीनें और आधुनिक तकनीक हमेशा सीमित ही रहेंगी। साथ ही सैन्डो का अपने कुत्ते और घोड़े के प्रति लगाव पशु-प्रेम और संवेदनशीलता की एक खूबसूरत मिसाल पेश करता है।
आख़िर में कहानी यह सच्चाई भी सामने रखती है कि अहंकार, अन्याय और ज़ुल्म चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न दिखें, उनका अंत तय होता है और अंततः जीत सच्चाई की ही होती है।
समीक्षात्मक टिप्पणी (Critical Review):

सकारात्मक पक्ष:
यह कॉमिक्स अपनी अनोखी सुपरपावर की वजह से अलग पहचान बनाती है। रेत के ज़रिये लड़ने का विचार उस समय पाठकों के लिए बिल्कुल नया और रोमांचक था। कहानी की रफ्तार इतनी तेज़ है कि कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती और घटनाएँ इतनी तेजी से बदलती हैं कि पाठक आख़िरी पन्ने तक जुड़ा रहता है।
साथ ही लेखक ने सैन्डो के अतीत को ‘शून्य’ बताकर कहानी में रहस्य बनाए रखा है, जिससे उसके ओरिजिन को लेकर उत्सुकता पैदा होती है और कहानी और भी असरदार बन जाती है।
सुधार के क्षेत्र:
कुछ संवाद आज के हिसाब से थोड़े ज़्यादा नाटकीय लग सकते हैं, लेकिन यह उस दौर की कॉमिक्स की आम पहचान भी थी।
कालदेव का इतनी आसानी से बच निकलना थोड़ा खटकता ज़रूर है, हालाँकि आगे की कहानियों के लिए यह ज़रूरी भी था।
निष्कर्ष:
‘महाबली सैन्डो और कालदेव’ भारतीय कॉमिक्स के उस सुनहरे दौर की शानदार मिसाल है, जब कल्पनाशीलता अपने पूरे शबाब पर थी। यह कॉमिक्स हमें एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ जादू और विज्ञान, बहादुरी और क्रूरता आमने-सामने खड़े होते हैं।
सैन्डो का किरदार हमें यह याद दिलाता है कि अपनी जड़ों और प्रकृति से जुड़े रहना कितना ज़रूरी है।
अगर आप पुराने ज़माने की कॉमिक्स के शौकीन हैं और कुछ ऐसा पढ़ना चाहते हैं जो आम ‘सिटी-बेस्ड’ सुपरहीरो कहानियों से हटकर हो, तो ‘महाबली सैन्डो’ आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यह कॉमिक्स न सिर्फ बच्चों के लिए, बल्कि उन वयस्क पाठकों के लिए भी यादों का खजाना है, जिन्होंने इन कहानियों के साथ अपना बचपन जिया है।
