1980 और 90 के दशक में भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में ‘चित्र भारती कथामाला’ ने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उस समय जहाँ एक तरफ़ राज कॉमिक्स और डायमंड कॉमिक्स का ज़ोर था, वहीं चित्र भारती ने ‘मानस-पुत्र’ जैसे किरदारों के ज़रिये साइंस-फिक्शन और फैंटेसी का ऐसा मेल दिखाया जो बिल्कुल नया लगता था। “महामाया की तलवार” इसी सीरीज़ की एक ऐसी कहानी है जो सिर्फ़ रोमांच ही नहीं देती, बल्कि ब्रह्मांडीय शक्तियों और इंसानी इच्छाशक्ति के टकराव को भी बड़े असरदार ढंग से सामने रखती है।
ब्रह्मांडीय महाप्रतियोगिता की शुरुआत
कहानी की शुरुआत अंतरिक्ष के अनंत विस्तार और आदिशक्ति महामाया के परिचय से होती है। महामाया के नियमों के अनुसार, हर कल्प के तेरहवें महावर्ष के अंत में उसके सिंहद्वार खुलते हैं। इसी द्वार के भीतर ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली हथियार — महामाया की तलवार — सुरक्षित रखा गया है। इस तलवार को पाने के लिए पूरे ब्रह्मांड के वीर योद्धाओं को आमंत्रण दिया जाता है। यह कोई साधारण मुकाबला नहीं, बल्कि एक घातक द्वंद्वयुद्ध है, जहाँ सिर्फ़ वही विजेता बन सकता है जो आख़िर तक टिके।

जब मानस-पुत्र को अपनी अंतर्दृष्टि के ज़रिये इस प्रतियोगिता की जानकारी मिलती है, तो वह इसमें भाग लेने का फैसला करता है। दूसरी तरफ़ तारक-मंडल का निर्दयी शासक सम्राट तारक भी अपनी अत्याधुनिक तकनीक और रोबोट क्रमांक 4 के साथ इस दौड़ में कूद पड़ता है। इनके अलावा पृथ्वी के शक्तिशाली जादूगर मंडलेश्वर और असुरों का राजकुमार रक्तासुर भी अपने-अपने मकसद लेकर इस रहस्यमयी लोक की ओर निकल पड़ते हैं।
कहानी आगे बढ़ते हुए कई चरणों से गुजरती है, जहाँ हर योद्धा को अपनी ताकत और काबिलियत साबित करनी पड़ती है। मानस-पुत्र का सामना एक डरावने, कई भुजाओं वाले यांत्रिक दैत्य से होता है, जबकि सम्राट तारक को एक उग्र वनमानुष जैसे प्राणी से भिड़ना पड़ता है। तमाम खतरों और बाधाओं को पार करने के बाद आख़िरकार मुख्य मंच पर मानस-पुत्र और सम्राट तारक आमने-सामने आते हैं।
पात्र चित्रण: शक्ति और नैतिकता का संतुलन
मानस-पुत्र कहानी का केंद्र है। उसे ‘सर्वशक्तिमान मस्तिष्क’ का दत्तक पुत्र बताया गया है। उसकी सबसे बड़ी ताकत सिर्फ़ उसका शरीर नहीं, बल्कि उसकी मजबूत इच्छाशक्ति है। वह सत्य और न्याय के रास्ते पर चलता है। इस कॉमिक्स में उसकी नैतिक सोच तब साफ़ दिखाई देती है जब वह एक निहत्थे और असहाय दुश्मन पर हमला करने से मना कर देता है और कहता है — “मैं बिना वजह किसी की जान नहीं लेता।”

सम्राट तारक एक खास तरह का खलनायक है। उसे तकनीक से गहरा लगाव है और वह अपने विशाल कंप्यूटर सिस्टम और रोबोट क्रमांक 4 पर पूरी तरह निर्भर रहता है। उसका मकसद सिर्फ़ ताकत हासिल करना है, चाहे इसके लिए उसे कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। वह हर मायने में मानस-पुत्र का उलटा चेहरा है।
मंडलेश्वर एक सकारात्मक किरदार है, जो अपनी मंत्र-शक्तियों का इस्तेमाल न्याय के लिए करता है। वह मानस-पुत्र का मित्र है और अंतिम युद्ध में रोबोट की खतरनाक किरणों से उसकी रक्षा करके अपनी अहम भूमिका साबित करता है।
रक्तासुर असुरों का राजकुमार है, जो पृथ्वी की राजकुमारी स्वप्ना से विवाह करना चाहता है। वह घमंडी और जलन से भरा हुआ है, लेकिन कहानी के बीच में ही उसे अपने राज्य पर हमले की खबर मिलती है और वह प्रतियोगिता छोड़कर लौटने पर मजबूर हो जाता है। यह मोड़ कहानी को और दिलचस्प बना देता है।
कला और चित्रांकन: एक दृश्य अनुभव
इस कॉमिक्स का चित्रांकन अपने समय के हिसाब से बेहद शानदार है। मानस-पुत्र का पहनावा, उसका त्रिशूलनुमा हथियार और उसकी अलग पहचान वाली वेशभूषा उसे एक सच्चा अंतरिक्ष योद्धा बनाती है। रंगों का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया गया है, जिससे फैंटेसी की दुनिया जीवंत लगती है। खासकर महामाया के सिंहद्वार और भव्य सीढ़ियों वाले दृश्य कला की खूबसूरती को साफ़ दिखाते हैं।

एक्शन को और मज़ेदार बनाने के लिए ‘तड़ाक’, ‘धूम’ और ‘विशशश’ जैसे ध्वनि शब्दों का शानदार उपयोग किया गया है, जिससे पाठक खुद को लड़ाई के बीच महसूस करता है। खास तौर पर रोबोट क्रमांक 4 और ड्यूटेरियन के बीच का संघर्ष इतनी तकनीकी बारीकियों के साथ दिखाया गया है कि वह आज भी असर छोड़ता है।
थीम और संदेश: इच्छाशक्ति बनाम तकनीक
“महामाया की तलवार” सिर्फ़ लड़ाई-झगड़े की कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा विचार भी छुपा है। एक ओर सम्राट तारक है, जो मशीनों और तकनीक के दम पर ब्रह्मांड पर राज करना चाहता है। दूसरी ओर मानस-पुत्र है, जो अपनी मानसिक शक्ति, साधना और आत्मबल के सहारे आगे बढ़ता है।
कहानी का क्लाइमेक्स काफी दार्शनिक है। जब मानस-पुत्र और तारक दोनों एक साथ तलवार के पास पहुँचते हैं, तो आकाशवाणी होती है। महामाया यह फैसला करती है कि दोनों योग्य होने के बावजूद मानस-पुत्र का पलड़ा भारी है। यहाँ ‘शून्य’ और ‘अदृश्य दीवार’ जैसे प्रतीकों के ज़रिये दिखाया गया है कि छल-कपट के बजाय सच्ची वीरता और निस्वार्थ भावना ज़्यादा शक्तिशाली होती है।

तलवार का दो भागों में बँटना — ‘सूर्यहास’ मानस-पुत्र को और ‘चंद्रहास’ सम्राट तारक को — यह बताता है कि किस्मत हर किसी को उसकी योग्यता के अनुसार ही फल देती है। मानस-पुत्र को मिली तलवार सत्य और न्याय का प्रतीक है, जबकि तारक को मिली कमज़ोर तलवार उसकी सीमाओं को दिखाती है।
समीक्षात्मक विश्लेषण: खूबियाँ और कमियाँ
इस कहानी की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज़ रफ्तार है। कहानी कहीं भी धीमी नहीं पड़ती और पाठक एक ग्रह से दूसरे ग्रह और एक युद्ध से दूसरे युद्ध तक तेजी से पहुँचता है। 80 के दशक के लिहाज़ से इसकी कल्पनाशीलता वाकई चौंकाने वाली थी। मस्तिष्क की तरंगों से यात्रा या खुद को ठीक करने वाले रोबोट जैसे विचार उस दौर के लेखकों की दूरदर्शिता दिखाते हैं। संवाद भले ही कम हों, लेकिन बेहद असरदार हैं, खासकर जब महामाया की आवाज़ गूंजती है, तो शब्दों में एक दिव्य गंभीरता महसूस होती है।

कमियों की बात करें तो रक्तासुर जैसे ताकतवर किरदार को कहानी के बीच में ही टेलीपोर्टर के ज़रिये वापस भेज देना थोड़ा खटकता है। ऐसा लगता है कि लेखक ने जानबूझकर उसे अंतिम लड़ाई से हटाकर सिर्फ़ नायक और मुख्य खलनायक पर ध्यान दिया। कुछ जगह विज्ञान और जादू का मेल थोड़ा उलझा हुआ लगता है, जैसे मंडलेश्वर के मंत्रों का रोबोटिक किरणों पर असर करना, हालांकि फैंटेसी कॉमिक्स में इसे रचनात्मक आज़ादी माना जा सकता है।
निष्कर्ष: एक यादगार कृति
“महामाया की तलवार” भारतीय कॉमिक्स इतिहास की एक अनमोल रचना है। यह हमें याद दिलाती है कि असली ताकत हथियारों में नहीं, बल्कि उन्हें इस्तेमाल करने वाले इंसान के चरित्र में होती है। मानस-पुत्र का यह रोमांचक सफर ‘सत्यमेव जयते’ के भारतीय विचार को एक भविष्यवादी माहौल में पेश करता है।
यह कॉमिक्स बच्चों के लिए तो मज़ेदार है ही, साथ ही उन बड़ों के लिए भी यादों की सौगात है, जिन्होंने अपना बचपन इन रंगीन पन्नों के साथ बिताया। अगर आपको अंतरिक्ष के रहस्य, अद्भुत रोबोट और प्राचीन जादुई शक्तियाँ पसंद हैं, तो यह कॉमिक्स आपके कलेक्शन में ज़रूर होनी चाहिए।
रेटिंग: 4.5/5
