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Home » नागराज – केंचुली (Raj Comics): क्या सुपरहीरो अपने ही साए से हार जाएगा?
Hindi Comics World Updated:17 September 2025

नागराज – केंचुली (Raj Comics): क्या सुपरहीरो अपने ही साए से हार जाएगा?

नागराज बनाम नागराज – जब सुपरहीरो को अपने ही अस्तित्व से लड़ना पड़ा
ComicsBioBy ComicsBio17 September 2025Updated:17 September 202538 Mins Read
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नागराज – केंचुली (Raj Comics) समीक्षा: क्या सुपरहीरो अपने ही साए से हार जाएगा?
"केंचुली" – नागराज की सबसे गहरी और मनोवैज्ञानिक कॉमिक्स, जहाँ उसे अपने ही अतीत और प्रतिरूप से जूझना पड़ता है।
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राज कॉमिक्स की “केंचुली” नागराज की एक ऐसी रोमांचक कहानी है, जहाँ उसे सिर्फ बाहर के दुश्मनों से ही नहीं, बल्कि अपने ही अंदर छिपे एक हिस्से से भी लड़ना पड़ता है। शुरुआत में ही साफ कर दिया जाता है कि नागराज और ध्रुव जैसे सुपरहीरो मिस किलर, नागपाशा और नागमणि जैसे दुश्मनों को तो हरा सकते हैं। लेकिन अगर उनका अपना ही व्यक्तित्व उनके खिलाफ हो जाए, तो वो भी बेबस हो जाते हैं। यही आइडिया इस कहानी को अलग और गहरा मोड़ देता है।

ये कॉमिक्स दरअसल पिछली कहानियों – “जहर”, “खजाना” और “क्राइम किंग” – से जुड़ी लगती है। इसमें नागराज अपने पुराने साथी वेदाचार्य और भारती के साथ मिलकर अपने खानदान के खजाने के राज को जानने निकलता है। महान ज्योतिषी वेदाचार्य ने नागराज को उसका वंश का खजाना सौंप दिया था, लेकिन नागराज के शुरुआती 40-50 सालों के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं था। अपनी गणनाओं और खोज के आधार पर वेदाचार्य नागद्वीप के पास छुपे एक रहस्यमयी समुद्र की ओर गए। वहीं, तांत्रिक विषधर ने उन पर हमला किया, जिसकी वजह से वे बेहोश हो गए और नागद्वीप के संत कालदूत तक पहुँच गए।

कहानी के इस हिस्से में नागराज और भारती, वेदाचार्य को ढूँढने के लिए राजनगर बंदरगाह पहुँचते हैं। वहाँ वे उस जहाज के कप्तान शर्मा से मिलते हैं, जिस पर वेदाचार्य को आखिरी बार देखा गया था। कप्तान उन्हें ये दुखद खबर देता है कि वेदाचार्य अचानक जहाज से बिना इजाज़त एक छोटी नाव लेकर बीच समुद्र में चले गए थे। वो जगह खतरनाक शार्क और पथरीली चट्टानों से भरी हुई है, जहाँ किसी का भी जिंदा बचना लगभग नामुमकिन है। ये सुनकर भारती टूट जाती है, लेकिन नागराज की आँखों में अब भी उम्मीद की चमक बाकी रहती है। जब कप्तान नक्शे पर उस जगह का निशान लगाता है, तो नागराज समझ जाता है कि वेदाचार्य नागद्वीप से ज़्यादा दूर नहीं हैं। नागराज भारती को दिलासा देता है कि वे जल्द ही वेदाचार्य को ढूँढ लेंगे।

लेकिन ये उम्मीद ज्यादा देर टिकती नहीं। अचानक एक डरावना मगरमच्छ-मानव जैसा जीव भारती को पानी के अंदर खींच लेता है। नागराज फौरन अपना असली रूप धारण कर पानी में कूद जाता है, ताकि भारती को बचा सके। पानी में पहुँचकर नागराज को अहसास होता है कि उसकी ज़हरीली फुंकार यहाँ काम नहीं आएगी। अब उसे अपनी ताकत और शरीर में मौजूद जल-साँपों का इस्तेमाल करना होगा। वह उन साँपों को उस जीव पर छोड़ता है, लेकिन हैरानी की बात ये होती है कि वो प्राणी उन साँपों को ही निगल जाता है। नागराज उसकी ताकत देखकर चौंक जाता है। फिर भी वो भारती को बचाने में कामयाब होता है और उसे सतह पर ले आता है। वहाँ नागराज देखता है कि भारती की हालत बिगड़ रही है और उसे तुरंत अस्पताल ले जाना ज़रूरी है।

मगर उसी समय नागराज खुद उस भयानक जीव के जाल में फँस जाता है। बाहर निकलने के लिए उसे कोई हथियार चाहिए। तभी उसकी नज़र जहाज के लंगर की भारी चेन पर पड़ती है। नागराज उसी चेन से उस प्राणी को जकड़ देता है और फिर भारती को अस्पताल पहुँचाने के लिए निकल पड़ता है।

नागराज बनाम नागराज
उस डरावने हाईब्रिड प्राणी का नाम मगराहा है, और इसे बनाया है जुलू नाम के एक चालाक और खतरनाक वैज्ञानिक ने। जुलू का असली मकसद है नागराज को अपना गुलाम बनाना, और इसके लिए उसने एक शैतानी चाल चली है। उसकी योजना है कि नागराज की केंचुली (खाल बदलने पर जो हिस्सा निकलता है) से एक नकली प्रतिरूप – तैयार किया जाए, और उसी के जरिए असली नागराज के शरीर को काबू में किया जाए।

यहीं से कहानी का असली टकराव शुरू होता है। नागराज को पता चलता है कि वह अपनी ही केंचुली को कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता। क्योंकि केंचुली पर लगने वाला हर वार सीधे उसी के शरीर में महसूस होता है। ये अजीब स्थिति नागराज को अपने ही साए के सामने बेबस और लाचार बना देती है। वह उस दुश्मन को चोट नहीं पहुँचा सकता जो उसी का हिस्सा है।

यही टकराव कहानी को एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर बना देता है। यहाँ नागराज की ताकत, उसके साँप, उसकी फुंकार – कुछ भी काम नहीं आते। दूसरी तरफ जुलू इस कमजोरी का फायदा उठाता है और केंचुली को नागराज का रूप देकर शहर में दहशत फैलाने भेज देता है। इससे असली नागराज की छवि खराब होती है और लोग, यहाँ तक कि कानून भी, उसे अपना दुश्मन समझने लगते हैं।

प्रमुख चरित्रों का विश्लेषण

नागराज: इस कहानी में नागराज का किरदार पहले से कहीं ज़्यादा गहराई लेता है। यहाँ वह सिर्फ़ अजेय सुपरहीरो नहीं है, बल्कि एक इंसान जैसा दिखता है – जो दर्द महसूस करता है, असहाय हो जाता है और मानसिक तकलीफ़ से भी गुज़रता है। अपनी ही केंचुली के हाथों मार खाना, उसका दर्द सहना और कई बार भागने पर मजबूर होना – ये सब नागराज के आत्म-सम्मान को झकझोर देता है। लेकिन आखिर में, जब वह अपने ही हिस्से को मिटाने का बड़ा और मुश्किल फ़ैसला करता है, तभी असली मानसिक मजबूती और उसका नायकत्व सामने आता है।

जुलू: जुलू एक ऐसा विलेन है जो याद रह जाता है। वजह ये है कि उसकी चाहत आम खलनायकों जैसी दुनिया पर राज करने की नहीं है। उसका असली मकसद है – नागराज जैसे ताकतवर हीरो पर पूरा कंट्रोल पाना। वह चालाक है, दिमाग़ से तेज़ है और नागराज के शरीर और उसकी शक्तियों को गहराई से समझता है। इसी समझ के दम पर वह नागराज की ताकत को ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बना देता है। यही दिमाग़ी खेल नागराज को अंदर से लगभग तोड़ देता है।

फेसलेस: जब नागराज अपनी ज़िंदगी के सबसे कमज़ोर मोड़ पर होता है, तब अचानक फेसलेस नाम का रहस्यमयी नकाबपोश सामने आता है। उसकी असली पहचान और इरादे साफ नहीं हैं, लेकिन वह नागराज का अहम साथी साबित होता है। फेसलेस न सिर्फ़ शारीरिक लड़ाई में नागराज का साथ देता है, बल्कि मानसिक रूप से भी उसे ताक़त देता है ताकि वह इस नामुमकिन लगने वाले संघर्ष को जारी रख सके।

भारती: भारती इस कहानी का इमोशनल दिल है। उसी पर हुए हमले से पूरी कहानी का बड़ा टकराव शुरू होता है। भारती की सुरक्षा नागराज की सबसे बड़ी चिंता बनी रहती है। यही वजह है कि कहानी में इमोशनल दांव और भी ऊँचे हो जाते हैं, जिससे पाठक भी उससे और गहराई से जुड़ जाते हैं।

कलात्मक उत्कृष्टता और पटकथा

अनुपम सिन्हा ने इस कॉमिक्स में एक साथ लेखक और चित्रकार की भूमिका निभाई है और दोनों ही जगह गज़ब का काम किया है।

पटकथा: कहानी की रफ्तार बिलकुल कसी हुई है। इसमें रहस्य, एक्शन, ड्रामा और मानसिक तनाव सबका ऐसा मिक्स है कि पाठक आख़िर तक बंधा रहता है। डायलॉग भी बेहद असरदार हैं। ख़ासकर वो संवाद, जो पूरी कहानी का असली आइडिया सामने रखता है:
“तू अपनी केंचुली को मारने के बजाए इसकी रक्षा करने की सोच, नागराज! क्योंकि इस पर पड़ने वाली हर चोट खुद तेरे शरीर पर ही पड़ेगी।”

चित्रण: सिन्हा की आर्ट इस कहानी की असली जान है। पानी के नीचे की लड़ाई हो या अस्पताल की बिल्डिंग में होने वाला एक्शन – हर सीन बेहद ज़िंदा और दमदार बन पड़ा है। मगरहा का डिज़ाइन डर और घिन दोनों पैदा करता है। वहीं नागराज के चेहरे पर दर्द, गुस्सा और लाचारी के भाव इतने साफ़ दिखते हैं कि पाठक खुद उस पल को महसूस करने लगता है। विठ्ठल कांबले की इंकिंग और सुनील पांडेय के रंग इस पूरे माहौल को और भी गहरा और असरदार बना देते हैं।

‘केंचुली‘ का दार्शनिक पहलू

‘केंचुली’ सिर्फ़ एक कॉमिक्स नहीं है, बल्कि कई गहरे सवाल खड़े करती है।
नागराज की ये कहानी हमें बताती है कि हमारा अतीत, जिसे हम छोड़ चुके होते हैं, अकसर एक नए और विकृत रूप में लौटकर हमारे वर्तमान को तोड़ने की कोशिश करता है। नागराज का अपनी ही केंचुली से भिड़ना असल में आत्म–विनाश का प्रतीक है। ये दिखाता है कि इंसान की सबसे बड़ी लड़ाई बाहर के दुश्मनों से नहीं, बल्कि अपनी ही कमजोरियों और अतीत से होती है।

कहानी असली शक्ति को लेकर भी सवाल उठाती है –
क्या ताक़त सिर्फ़ शारीरिक बल है?
या फिर मुश्किल हालात में धैर्य रखकर सही फ़ैसला लेने की मानसिक क्षमता ही असली ताक़त है?

आख़िर में नागराज जीतता है, लेकिन अपनी साँपों की फुंकार या मांसपेशियों की ताक़त से नहीं, बल्कि अपनी मानसिक दृढ़ता से। यही इस कहानी का असली संदेश है।

निष्कर्ष

‘नागराज – केंचुली’ भारतीय कॉमिक्स के इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह सिर्फ़ एक रोमांचक नहीं, बल्कि परिपक्व और गहरी कहानी है, जो अपने दौर से कहीं आगे की सोच दिखाती है। इसमें नागराज को एक आम सुपरहीरो की जगह एक ऐसे त्रासद नायक के रूप में दिखाया गया है, जिसे अपने ही अस्तित्व से लड़ना पड़ता है।

कसी हुई पटकथा, दमदार खलनायक, शानदार आर्ट और गहरे दार्शनिक पहलू – ये सब मिलकर इस कॉमिक्स को आज भी उतना ही प्रासंगिक और पढ़ने लायक बनाते हैं।

ये कहानी सिर्फ़ नागराज के फैंस के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस पाठक के लिए है, जो एक अच्छी, सोचने पर मजबूर करने वाली और भावनाओं से भरी कहानी की तलाश में है।

‘केंचुली’ इस बात का सबसे अच्छा सबूत है कि कॉमिक्स महज़ बच्चों का मनोरंजन नहीं, बल्कि बेहद शक्तिशाली और जटिल कहानियाँ सुनाने का एक बेहतरीन माध्यम भी हो सकती हैं।

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