90 के दशक में राज कॉमिक्स का दौर भारतीय बच्चों और किशोरों के लिए किसी सुनहरे समय से कम नहीं था। उस समय ‘नागराज’ केवल एक सुपरहीरो नहीं, बल्कि साहस और न्याय का प्रतीक बन चुका था। इसी श्रृंखला में विशेषांक संख्या 545 ‘लावा’ (Lava) एक ऐसी कहानी बनकर सामने आई, जिसने न केवल पाठकों को रोमांच दिया, बल्कि उनकी आंखों में आंसू भी ला दिए। जॉली सिन्हा की भावुक कहानी और अनुपम सिन्हा के शानदार ब्रश ने मिलकर एक ऐसी त्रासदी बनाई, जो आज भी कॉमिक्स प्रेमियों के मन में ताज़ा है। आइए, इस महागाथा की परतों को खोलते हैं।
ज्वालामुखी की आग और एक पिता की लाचारी: कैसे बना ‘कलाबा’ विनाशकारी ‘लावा’?
कहानी की शुरुआत महानगर के शोर-शराबे से दूर एक जलते हुए ज्वालामुखी के पास होती है। यहाँ हमारी मुलाकात कलाबा से होती है। कलाबा कोई अपराधी या महामानव नहीं है; वह एक साधारण इंसान है, जिसकी दुनिया उसकी छोटी सी बेटी के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। गरीबी और लाचारी उसे एक ऐसे रास्ते पर ले आती है जहाँ हर कदम पर मौत का खतरा है।

अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए वह एक खतरनाक वैज्ञानिक प्रयोग का हिस्सा बनने के लिए तैयार हो जाता है। लेकिन उसे नहीं पता था कि यह प्रयोग उसे एक ऐसे दानव में बदल देगा जिसे वह खुद भी नहीं पहचान पाएगा। जब वह जलते ज्वालामुखी के किनारे खड़ा होता है, तो उसके मन में केवल अपनी बेटी की सुरक्षा का ख्याल होता है। धोखे से जब उसकी बेटी को भी उसी आग में झोंकने की कोशिश की जाती है, तो कलाबा का पिता वाला रूप जाग उठता है। वह खुद को आग में डाल देता है, लेकिन मरता नहीं है। ज्वालामुखी की असीम ऊर्जा और रसायनों के मेल से जन्म होता है ‘लावा’ का—एक ऐसा जीव जिसकी रगों में खून की जगह पिघला हुआ पत्थर (मैग्मा) दौड़ रहा है।
सैंटी हीट सीरम (Santy Heat Serum): विज्ञान का वो वरदान जो इंसानियत के लिए अभिशाप बन गया।
इस कहानी का असली खलनायक कोई राक्षस नहीं, बल्कि मिस्टर जोन्स का लालच और उसका बनाया हुआ ‘सैंटी हीट सीरम’ है। जोन्स एक ऐसा वैज्ञानिक है जिसके लिए सही-गलत का कोई मतलब नहीं है। उसने एक ऐसा रसायन बनाया जो इंसान के शरीर को बहुत ज्यादा तापमान सहने की ताकत दे सके। उसका मकसद अच्छा नहीं, बल्कि पैसा कमाना था। वह इस ताकत को बेचना चाहता था।

यह सीरम विज्ञान के उस अंधे पहलू को दिखाता है जहाँ तरक्की के नाम पर मासूमों की बलि दी जाती है। कलाबा को यह सीरम पिलाकर उसे ज्वालामुखी में कूदने के लिए मजबूर करना, विज्ञान के गलत इस्तेमाल की हद दिखाता है। यही सीरम था जिसने कलाबा की कोशिकाओं को जलने से बचाया, लेकिन उन्हें हमेशा के लिए बदल दिया। ‘लावा’ के रूप में कलाबा का अस्तित्व अब उस सीरम की सफलता का सबूत था, लेकिन एक इंसान के रूप में उसकी हार थी।
महानगर का रक्षक: जब नागराज ने ‘फायर ब्रिगेड’ बनकर आए लुटेरों को सिखाया सबक।
जहाँ एक तरफ लावा का जन्म हो रहा था, वहीं महानगर में नागराज एक अलग तरह के अपराध से जूझ रहा था। कुछ चालाक अपराधी ‘फायर ब्रिगेड’ की वर्दी पहनकर शहर के सबसे बड़े बैंक को लूटने की योजना बनाते हैं। वे गैस रिसाव और आग का नाटक करके पूरे बैंक को खाली करवा लेते हैं और फिर तिजोरी पर हमला करते हैं।

लेकिन वे यह भूल गए थे कि महानगर की रक्षा के लिए ‘नागराज’ हमेशा तैयार रहता है। नागराज को अपने जासूसी सांपों से खबर मिलती है कि बैंक के अंदर कुछ गड़बड़ है। नागराज का वहाँ पहुंचना और उन अपराधियों की चाल को समझ लेना पाठकों को रोमांचित कर देता है। यहाँ नागराज की समझदारी और उसकी जासूसी ताकत का बेहतरीन प्रदर्शन किया गया है। वह तुरंत पहचान लेता है कि ये असली अग्निशमन कर्मचारी नहीं, बल्कि लुटेरे हैं।
मार्शल आर्ट्स का महाकुंभ: नागराज की ग्रीको-रोमन रेसलिंग और स्नेक-स्टाइल कुंग-फू का जलवा!
इस कॉमिक्स का एक बड़ा हिस्सा नागराज की लड़ाई की कला को दिखाता है, जहाँ बैंक के लुटेरों के एक साथ हमला करने पर अनुपम सिन्हा ने नागराज को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय फाइटिंग स्टाइल का इस्तेमाल करते हुए दिखाया है। इसमें नागराज दुश्मनों को पटकने के लिए ग्रीको-रोमन रेसलिंग के दांव लगाता है और भागते हुए अपराधियों को पकड़ने के लिए मैक्सिकन काउबॉय स्टाइल में अपने सांपों को ‘लैसो’ (फंदे) की तरह इस्तेमाल करता है। साथ ही, अपनी फुर्ती और सांपों जैसी लचक के लिए वह स्नेक-स्टाइल कुंग-फू का इस्तेमाल कर गोलियों से खुद को आसानी से बचा लेता है।

यह हिस्सा न केवल एक्शन से भरपूर है, बल्कि पाठकों को नागराज की अलग-अलग लड़ाई की कला के बारे में भी बताता है। नागराज केवल सांप नहीं छोड़ता, वह एक बेहतरीन मार्शल आर्टिस्ट भी है, और यह कॉमिक्स इस बात को मजबूत तरीके से साबित करती है।
पिता-पुत्री का अटूट रिश्ता: ‘लावा’ की तबाही के पीछे छिपे आंसू और तड़प की अनकही कहानी।
‘लावा’ का किरदार राज कॉमिक्स के सबसे दुखद (Tragic) पात्रों में से एक है। वह शहर को बर्बाद करने के इरादे से नहीं आया है; वह अपनी बेटी को खोज रहा है। उसे याद है कि उसकी बेटी को उसी ज्वालामुखी के पास आखिरी बार देखा गया था। उसकी यादें धुंधली हो चुकी हैं, लेकिन एक पिता का दिल अभी भी धड़क रहा है।

लावा की पीड़ा तब और बढ़ जाती है जब उसे लगता है कि नागराज और बाकी लोग उसकी बेटी को उससे दूर रख रहे हैं। वह जहां भी कदम रखता है, वहां की जमीन पिघलने लगती है। उसकी चीखें आग की लपटों में बदल जाती हैं। पाठकों के लिए यह एक टकराव जैसा है—एक तरफ नागराज है जो शहर को बचाना चाहता है, और दूसरी तरफ एक मजबूर पिता है जो अपनी बेटी के लिए पागल हो रहा है। यही भावनात्मक जुड़ाव इस कॉमिक्स को साधारण सुपरहीरो कहानियों से अलग बनाता है।
अनुपम सिन्हा की जादूगरी: ‘लावा’ के पन्नों पर कैसे जीवंत हुई ज्वालामुखी की आग?
अगर इस समीक्षा में आर्टवर्क की बात न करें, तो यह अधूरी रहेगी क्योंकि अनुपम सिन्हा ने ‘लावा’ में रंगों और रेखाओं के साथ जो काम किया है, वह बेमिसाल है। इसमें आग का चित्रण शानदार है जहाँ पन्ने लाल, नारंगी और पीले रंगों से भरे हुए हैं, जो सच में गर्मी का अहसास कराते हैं और लावा के शरीर से निकलती लपटें और पिघलती चट्टानों का विवरण बहुत बारीकी से दिखाया गया है। पात्रों की बनावट में लावा का रूप डरावना होने के बावजूद उसकी आँखों में छिपी उदासी को अच्छे से दिखाया गया है, साथ ही नागराज के शरीर की बनावट और उसके कॉस्ट्यूम की ‘स्केल’ वाली डिटेलिंग हमेशा की तरह शानदार है। इसकी विजुअल स्टोरीटेलिंग भी कमाल की है, जहाँ ज्वालामुखी के विस्फोट और बैंक डकैती के सीन किसी फिल्म जैसी फील देते हैं।
अदृश्य नागदीप और मौत का खतरा: ‘विनाशलीला’ की ओर बढ़ता लावा और बेबस नागराज।
कहानी के आखिरी हिस्से में हमें नागदीप (सांपों का गुप्त द्वीप) की झलक मिलती है। राजकुमारी विविसर्पी, महात्मा कालदूत और राजकुमार विषांक को पता चलता है कि एक बड़ा खतरा उनकी ओर बढ़ रहा है। विषांक अपनी मानसिक शक्ति से उस लड़की (लावा की बेटी) को ढूंढने की कोशिश करता है, जो चमत्कारिक रूप से बच गई थी और अब नागदीप के लोगों के पास सुरक्षित है।

इधर महानगर में, लावा बेकाबू हो चुका है। नागराज उसे रोकने की हर कोशिश करता है—बर्फ के गोले, फायर एक्सटिंग्विशर और पानी की बौछारें—लेकिन लावा की गर्मी के सामने सब बेअसर हो जाते हैं। आखिर में, लावा को पता चल जाता है कि उसकी बेटी नागदीप में हो सकती है। वह समुद्र की तरफ बढ़ने लगता है। नागराज जानता है कि अगर लावा नागदीप पहुंच गया, तो वह उस अदृश्य और पवित्र द्वीप को राख बना देगा। कहानी एक खतरनाक मोड़ (Cliffhanger) पर खत्म होती है, जहाँ नागराज आग और पानी के बीच फंसा हुआ है और लावा विनाश की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष: क्या ‘लावा’ राज कॉमिक्स की सबसे भावनात्मक कहानी है?
‘लावा’ सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं है, यह इंसानी भावनाओं और सुपरहीरो एक्शन का एक बेहतरीन मेल है। यह हमें सिखाती है कि हर वह इंसान जो विनाश कर रहा है, वह शुरू से बुरा नहीं होता; कई बार हालात उसे ‘राक्षस’ बना देते हैं।
जॉली सिन्हा का लेखन और अनुपम सिन्हा का आर्टवर्क इस कॉमिक्स को ‘कलेक्टर्स एडिशन’ बनाता है। नागराज का एक पिता के लिए सम्मान और साथ ही अपने कर्तव्य के प्रति उसकी निष्ठा उसे एक सच्चा नायक बनाती है। यह कॉमिक्स पाठकों को अगले भाग ‘विनाशलीला’ के लिए पूरी तरह तैयार कर देती है, जहाँ इस टकराव का आखिरी नतीजा सामने आएगा।
