राज कॉमिक्स के इतिहास में ‘मल्टीस्टार’ विशेषांकों का एक अलग ही जलवा रहा है, जहाँ दो या दो से ज्यादा बड़े सुपरहीरो एक साथ किसी खतरनाक दुश्मन या किसी उलझे हुए रहस्य का सामना करने के लिए हाथ मिलाते हैं। ‘सौडांगी’ भी ऐसी ही एक खास कड़ी है, जो राज कॉमिक्स के दो सबसे लोकप्रिय और ताक़तवर नायकों—नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव—को एक बेहद पुराने और खतरनाक षड्यंत्र के खिलाफ खड़ा करती है। यह कॉमिक न सिर्फ पढ़ने में रोमांचक है, बल्कि उस दौर की बेहतरीन कहानी, शानदार आर्टवर्क और दमदार किरदारों के शानदार तालमेल की मिसाल भी है। इस अंक को जॉली सिन्हा ने लिखा है और अनुपम सिन्हा ने चित्रित किया है। यह पिछली कड़ी ‘सम्राट’ की कहानी को आगे बढ़ाता है और पहले ही पन्ने से पाठक को रहस्य और रोमांच में डुबो देता है। इस समीक्षा में हम ‘सौडांगी’ की कहानी, किरदारों के चित्रण, कला और राज कॉमिक्स की दुनिया में इसके महत्व पर विस्तार से नज़र डालेंगे।
कथावस्तु का आधार और पिछली कड़ी का पुनरावलोकन
‘सौडांगी’ की कहानी सीधे मिस्र की रहस्यमयी और प्राचीन दुनिया से जुड़ती है। कहानी के केंद्र में क्लियोपेट्रा के महल की तस्वीरें हैं। ये तस्वीरें साधारण नहीं, बल्कि एक जादुई महल का नक्शा हैं, जिसे हासिल करने की कोशिश में तीन खतरनाक शक्तियाँ लगी हुई हैं:

करणवशी: नागराज का पुराना और ताक़तवर दुश्मन, जो रहस्यमयी शक्तियों की मदद से इन तस्वीरों को खोज रहा है।
सर्पखोर (Sarpkhor): नागों को खाने वाला क्रूर खलनायक, जिसे करणवशी ने पिरामिडों के रक्षक इच्छाधारी सर्पों के कबीले पर हमला करने भेजा था। सर्पखोर की मौजूदगी कहानी में नागराज वाली दुनिया का एक खास “सर्प-तड़का” जोड़ती है।
तूतेन खामेन (Tuten Khamen): ममियों का राजा, जो अपनी ममी सेना के साथ तस्वीरों की तलाश में महानगर पहुंचता है।
पिछली कड़ी में नागराज और ध्रुव ने मिलकर तूतेन खामेन को भगाया तो था, लेकिन गया हुए तूतेन खामेन, नागराज की शक्तियों की नकल (कॉपी) भी ले गया था। इसी बीच इच्छाधारी सर्पों के कबीले की योद्धा सौडांगी ने अपने कबीले पर आए संकट को समझते हुए महल की तस्वीरें नागराज और ध्रुव को सौंप दी थीं।
यहाँ से कहानी एक दुखद और टेढ़ा मोड़ लेती है। सौडांगी तंत्र शक्ति से मिस्र जाती है, जहाँ करणवशी उसे अपने वशीकरण के जाल में फँसा लेता है। उसके बस में आकर सौडांगी करणवशी को बताती है कि तस्वीरें नागराज और ध्रुव के पास हैं। करणवशी आधी-अधूरी बात सुनकर, तूतेन खामेन द्वारा बनाई गई ‘ममी नागराज’ को असली नागराज के पास भेज देता है। नागराज उसे हराकर खुद ‘ममी नागराज’ का रूप धरकर मिस्र पहुँच जाता है।

लेकिन करणवशी के जादू में फँसी सौडांगी, नागराज पर हमला कर देती है, जिससे नागराज चोट खाकर वापस वेदाचार्य के पास गिर पड़ता है।
अंत में पता चलता है कि तस्वीर दो हिस्सों में बंटी हुई है। एक हिस्सा ध्रुव के पास है। यह पता चलने पर तूतेन खामेन अपनी एक खास शक्ति सर्पखोर को देकर उसे राजनगर भेजता है ताकि वह ध्रुव से तस्वीर का दूसरा हिस्सा छीनकर ले आए।
‘सौडांगी‘ अंक का आरंभ और कथा–गति (The Start of ‘Soudangi’ and Pacing)
‘सौडांगी’ की शुरुआत पिछले अंक की घटनाओं के बाद एकदम सीधे सर्पखोर की सोच और उसके गुस्से से होती है। सर्पखोर इस बात से चिढ़ा हुआ है कि करणवशी और तूतेन खामेन ने उस पर पूरा भरोसा नहीं किया और उसके साथ किसी और शक्ति को भेजने की बात कर रहे थे। उसे अपने दम और ताकत पर पूरा भरोसा है और वह मानता है कि वह अकेले ही ध्रुव से तस्वीर छीन सकता है।

वह तूतेन द्वारा बनाए गए तंत्र पिरामिड पर चढ़कर राजनगर पहुँचता है। उसे पता है कि उसे सुपर कमांडो ध्रुव के तेज दिमाग का सामना करना होगा, जिसे “ब्रह्माण्ड का सबसे खतरनाक हथियार” कहा जाता है।
ये शुरुआती पन्ने कहानी की गति को तुरंत तेज कर देते हैं और साफ दिखाते हैं कि इस बार खलनायक की चुनौती सिर्फ खतरनाक ही नहीं, बल्कि बहुत ही व्यक्तिगत और अहंकार से भरी है।
इसके बाद दृश्य सीधे राजनगर में ध्रुव के घर शिफ्ट हो जाता है, जहाँ एक हल्का-फुल्का और प्यारा पारिवारिक पल दिखाया गया है।
ध्रुव और श्वेता: भावनात्मक केंद्र
ध्रुव और उसकी छोटी बहन श्वेता वाला सीन कहानी को एक भावनात्मक और मानवीय टच देता है। श्वेता—जिसे ध्रुव प्यार से “माँ-बदौलत” कहता है—अपने भाई के महानगर से लौटने पर उससे गिफ्ट माँगती है। ध्रुव आराम करना चाहता है और थोड़ी देर में “नाइट पेट्रोलिंग” पर जाने की तैयारी में है, इसलिए वह उससे बचने की कोशिश करता है।
इस दृश्य में श्वेता का किरदार बहुत अच्छी तरह उभरकर आता है:
वह शरारती है, लेकिन उतनी ही प्यारी भी, और अपने भाई ध्रुव को छेड़ने का मौका कभी नहीं छोड़ती। साथ ही वह एक जीनियस वैज्ञानिक भी है। वह अपने ‘मिनी-एक्स-रे स्कैनर’ से ध्रुव के बैग को चेक करती है और तुरंत ‘गिफ्ट पैक’ ढूँढ लेती है।

श्वेता की ज़िद देखकर, ध्रुव को मजबूरी में कपड़ा हटाना पड़ता है और वहीं उसे क्लियोपेट्रा के महल की तस्वीर दिखाई देती है। अपनी पहचान और मिशन को छुपाने के लिए ध्रुव झूठ बोल देता है कि यह सौडांगी की बनाई हुई पेंटिंग है, जिसे उसे सुरक्षित रखने के लिए दिया गया है। श्वेता, जो ध्रुव के झूठ पकड़ने में माहिर है (“सौडांगी पेंटर कब से बन गई?”), मज़ाक उड़ाते हुए इसे एम.एफ. हुसैन की पेंटिंग बोलती है और उसे छीनने की कोशिश करती है।
दुर्भाग्य से, इसी छीना-झपटी में तस्वीर टूट जाती है। यह घटना माहौल में तुरंत तनाव पैदा कर देती है। ध्रुव को सौडांगी को जवाब देने की चिंता होती है, और श्वेता को अपनी हरकत पर पछतावा होने लगता है। ध्रुव उसे दिलासा देता है और बताता है कि वह उसके लिए असल में एक ‘कंप्यूटराइज्ड केमिकल एनालाइज़र’ लेकर आया था।
यह दृश्य न सिर्फ भावनात्मक गहराई जोड़ता है, बल्कि एक ज़रूरी बात भी बताता है—ध्रुव अपनी सबसे जरूरी और कीमती चीजें भी अपनी बहन से छुपा नहीं पाता, चाहे वह दुनिया को बचाने वाला नक्शा ही क्यों न हो।
कहानी में नया मोड़: सर्प–प्राणियों का हमला
इसी समय, ध्रुव के स्टार ट्रांसमीटर पर कमांडो हेडक्वार्टर के कैप्टन करीम का एक इमरजेंसी संदेश आता है। राजनगर में कई जगहों पर ‘अजीबोगरीब सर्प-प्राणी’ दिखे हैं, जो तोड़फोड़ कर रहे हैं और किसी खास चीज़ को ढूंढ रहे हैं। करीम यह भी बताता है कि एक सड़ा-गला साँप खुद कमांडो हेडक्वार्टर में घुस आया है और वह सीधा ध्रुव का पता पूछ रहा है।

ध्रुव तुरंत समझ जाता है कि ये सारी मुसीबत उसी टूटी हुई तस्वीर से जुड़ी है। निकलने से पहले वह श्वेता को तस्वीर संभालने की ज़िम्मेदारी देता है, क्योंकि यह “बहुत कीमती” है और इसे बिल्कुल गलत हाथों में नहीं जाना चाहिए।
रहस्य और चमत्कार: तस्वीर का जादू (Mystery and Magic: The Picture’s Magic)
ध्रुव के जाने के बाद श्वेता तस्वीर को अपनी लैब के ‘स्पेशल इलेक्ट्रॉनिक लॉकर’ में रखने की तैयारी करती है। और यहीं कहानी का सबसे चौकाने वाला जादुई पल सामने आता है। जैसे ही श्वेता टूटी हुई तस्वीर को देखती है, उसे पता चलता है कि तस्वीर खुद-ब-खुद जुड़ गई है। कहीं कोई दरार या टूटा हिस्सा दिखाई ही नहीं दे रहा।
वैज्ञानिक सोच से यह बिल्कुल असंभव है, इसलिए श्वेता तुरंत मान लेती है कि यह तस्वीर सचमुच ‘चमत्कारी’, ‘जादुई’ और ‘अद्भुत’ है। वह तय करती है कि वह इसके लिए एक बेहद मजबूत और खास सिक्योरिटी सिस्टम बनाएगी।
यह घटना कहानी में जादुई यथार्थवाद (Magical Realism) का मज़ेदार तड़का डालती है। इससे साफ होता है कि जिस चीज़ को खलनायक इतनी मेहनत से खोज रहे हैं, वह सिर्फ एक साधारण नक्शा नहीं, बल्कि अपने आप में एक जिंदा, रहस्यमयी कलाकृति है।
सुपर कमांडो ध्रुव की रणनीति (Super Commando Dhruv’s Strategy)
ध्रुव सीधा उस सर्प-प्राणी से भिड़ता है, जिसने राजनगर में हमला किया है। उसे पता चलता है कि उस सांप की त्वचा इतनी सड़ी-गली है, जैसे वह किसी एसिड के ड्रम से बाहर आया हो। यह उसकी खतरनाक प्रकृति और तूतेन खामेन की काली शक्ति को दर्शाता है।

लड़ाई के दौरान ध्रुव की बुद्धि और उसकी रणनीति दोनों पूरी तरह सामने आती हैं। वह यह पहचान लेता है कि ये आम सांप नहीं, बल्कि इच्छाधारी सर्प हैं, जिनके हाथ-पैर भी होते हैं, इसलिए इन्हें काबू करना बहुत मुश्किल है। जब वह उससे पूछता है कि उसे किसने भेजा है, तो वह सर्पखोर का नाम लेता है।
इसके बाद ध्रुव को सर्पखोर का ठिकाना पता चलता है: ‘फन पार्क’। ध्रुव तुरंत समझ जाता है कि सारे सांपों को एक-एक करके रोकना बेकार है—मुखिया को ही रोका जाए तो खेल खत्म।
वह उस सर्प-प्राणी को अपने ‘ब्रेसलेट’ से विषमुक्त कर देता है, जिससे उसके ज़हरीले दाँत और उसकी सबसे बड़ी ताकत खत्म हो जाती है। अब वह किसी के लिए खतरा नहीं रहता।
इसके बाद, ध्रुव ‘फन पार्क’ की तरफ रवाना होता है, जहाँ वह सर्पखोर के ‘फन’ को हमेशा के लिए खत्म करने का इरादा रखता है।
कला और लेखन का मूल्यांकन (Evaluation of Art and Writing)
चित्रांकन (Art by Anupam Sinha)
अनुपम सिन्हा का आर्ट इस मल्टीस्टारर की असली जान है। उनके बनाए सीन और चेहरे के एक्सप्रेशन्स हर फ्रेम में कमाल की ऊर्जा भर देते हैं।
पात्रों का चित्रण:
चाहे ध्रुव–श्वेता का हल्का-फुल्का घरेलू सीन हो या सर्पखोर का घमंडी अंदरूनी स्वभाव—हर कैरेक्टर उतने ही जीवंत दिखते हैं जितना होना चाहिए। ध्रुव का एक पल शांत और दूसरे ही पल रणनीतिक मोड में जाना बहुत साफ झलकता है, और श्वेता की शरारत व चंचलता तो आर्ट में जान डाल देती है।

खलनायकों का डिजाइन:
‘सड़े-गले सांपों’ का डिज़ाइन डरावना, गंदा और एकदम विकृत है—जो दिखाता है कि उन पर कितना भयानक जादू या एक्सपेरिमेंट हुआ है। इन्हें देखकर पाठक तुरंत समझ जाता है कि सामने खतरा बड़ा और खतरनाक है।
पैनलिंग और गति:
एक्शन सीन की पैनलिंग बहुत डायनेमिक है—खासकर ध्रुव और सर्प-प्राणी के बीच की लड़ाई। इससे कहानी की स्पीड लगातार तेज बनी रहती है और कोई भी दृश्य धीमा नहीं लगता।
लेखन और संवाद (Writing by Jolly Sinha)
जॉली सिन्हा ने इस जटिल मल्टीस्टारर को बड़ी आसानी से संभाल लिया है। कहानी की शुरुआत पिछली कड़ी के बिल्कुल सही और आसानी से समझ आने वाले रिकैप से करना एक शानदार आइडिया है। इससे नए पाठक भी आराम से कहानी में घुस जाते हैं। नागराज और ध्रुव के दुश्मनों—सर्पखोर, करणवशी और तूतेन खामेन—सबको एक ही मिशन पर लाकर खड़ा करना एक दमदार ‘क्रॉसओवर सेटअप’ तैयार करता है।

संवाद स्वाभाविक और मज़ेदार हैं। श्वेता और ध्रुव की नोकझोंक, जैसे श्वेता का ‘माँ-बदौलत’ कहना या ध्रुव का ‘तू ज़रा कम बोला कर!’—ये कहानी को हल्का बनाते हैं। दूसरी तरफ, सर्पखोर और ध्रुव के बीच की बातें—जैसे ध्रुव का ‘फन पार्क’ में जाकर ‘फन’ खत्म करने का वादा—एक्शन सीन में तड़का लगा देती हैं
ध्रुव को हर नंबर पर दिमाग से लड़ते दिखाना—तस्वीर को खतरे की जड़ समझना, सांप को सेकंडों में काबू करना, और सीधे सरगना को निशाना बनाना—यह सब सुपर कमांडो ध्रुव की पहचान है। और लेखक ने इसे बेहतरीन ढंग से पेश किया है।
‘सौडांगी‘ का महत्व और निष्कर्ष (Significance and Conclusion)
‘सौडांगी’ राज कॉमिक्स के गोल्डन एरा का ऐसा मल्टीस्टार अंक है जो साबित करता है कि भारतीय सुपरहीरो कहानियाँ इंटरनेशनल लेवल का दम रखती हैं।
यह कॉमिक कई स्तरों पर सफल होती है:
कथानक का विस्तार:
इसमें मिस्र की ममी, प्राचीन रहस्य, इच्छाधारी सर्प और आधुनिक तकनीक (ध्रुव का स्टार ट्रांसमीटर, श्वेता की लैब) सब एक साथ मिलकर एक जबरदस्त मिश्रण बनाते हैं।

ध्रुव–श्वेता का प्यारा लेकिन टेंशन-भरा दृश्य पाठक को भावनात्मक रूप से जोड़ देता है। इससे कहानी का सस्पेंस और खतरा दोनों ज्यादा महसूस होता है। तस्वीर का खुद-ब-खुद जुड़ जाना कहानी में जादुई यथार्थवाद का नया और बेहद दिलचस्प मोड़ जोड़ता है—यह साफ संकेत देता है कि आगे की लड़ाई सिर्फ फिजिकल नहीं, बल्कि मिस्टिक पावर से भरी होगी।
यह अंक नागराज और ध्रुव—दोनों फैनबेस के लिए एक शानदार तोहफा है, हालांकि यहाँ फोकस मुख्य रूप से ध्रुव पर है।
कॉमिक एक जोरदार मोड़ पर खत्म होती है—ध्रुव सर्पखोर से भिड़ने ‘फन पार्क’ जा रहा है, और उधर नागराज की अगली चाल का इंतज़ार है।
अंतिम निर्णय:
‘सौडांगी’ एक हाई-क्वालिटी, फास्ट-पेस मल्टीस्टारर कॉमिक है, जो बेहतरीन आर्ट और कसकर लिखी स्क्रिप्ट के साथ एक जटिल प्लॉट को बहुत आसान तरीके से पेश करती है। यह राज कॉमिक्स के सबसे यादगार अंकों में से एक है। इसका प्लॉट, कैरेक्टर बैलेंस और आख़िरी पेज तक बना रहने वाला रहस्य इसे एक मस्ट-रीड बनाता है। राज कॉमिक्स प्रेमियों के लिए यह एक टोटली सैटिस्फाइंग रीड है।
