भारतीय कॉमिक्स के सुनहरे दौर में किंग कॉमिक्स ने अपनी एक अलग और खास पहचान बनाई थी। उस समय जहाँ ज़्यादातर कॉमिक्स में सुपरहीरो ही छाए रहते थे, वहीं किंग कॉमिक्स आम किशोरों, दोस्तों की टोली और जासूसी-रोमांच से भरी कहानियाँ लेकर आता था, जिनसे पाठक खुद को आसानी से जोड़ पाते थे। ‘गटर’ (Gutter) इसी परंपरा की एक शानदार मिसाल है। यह कॉमिक्स ‘थ्रिल सीरीज’ के तहत प्रकाशित हुई थी और जैसा कि इसके नाम से ही अंदाज़ा हो जाता है, कहानी रहस्य, रोमांच और एक अजीब-सा डर अपने साथ लेकर चलती है।
यह कहानी सिर्फ किसी राक्षस से लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पाँच दोस्तों के साहस, उनकी समझदारी और गहरी दोस्ती की कहानी भी है। लेखक हनीफ अजहर और चित्रकार प्रदीप सोनी की जोड़ी ने एक बिल्कुल आम-सा विषय—एक गटर—को इतना डरावना और रहस्यमयी बना दिया है कि पाठक खुद को उस अंधेरी दुनिया के अंदर महसूस करने लगता है।
शहर के नीचे पलता हुआ डर
कहानी एक ऐसे शहर में घटती है जहाँ ऊपर सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगता है, लेकिन ज़मीन के नीचे, गंदे पानी के निकास तंत्र यानी गटर में एक भयानक खतरा पनप रहा है। आम तौर पर गटर शहर की गंदगी को बहाने का काम करते हैं, लेकिन इस कहानी में वही गटर मौत का रास्ता बन जाते हैं।

कहानी की शुरुआत एक रहस्यमय घटना से होती है। हरजीत नाम का एक किशोर, जो ‘चिल्ड्रन प्लेग्राउंड’ के पाँच दोस्तों के ग्रुप का हिस्सा है, अचानक गायब हो जाता है। उसके जूते गटर के पास मिलते हैं, जिससे शक और भी गहरा हो जाता है कि शायद गटर ने ही उसे निगल लिया है। पुलिस—जिसमें हवलदार लोटा सिंह और इंस्पेक्टर आला शामिल हैं—इस मामले को बहुत हल्के में लेती है। वे इसे बस एक आम गुमशुदगी या हादसा मानकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं।
यहीं से कहानी में हमारे नन्हे नायकों की एंट्री होती है। पाँच दोस्तों का यह समूह—प्रतीक, अफसाना, जॉनी, रुस्तम और हरजीत—अपनी-अपनी खासियतों के लिए जाना जाता है। जब सिस्टम और प्रशासन नाकाम हो जाते हैं, तो हरजीत को बचाने के लिए बाकी चार दोस्त खुद ही कदम उठाने का फैसला करते हैं और उस अंधेरे, बदबूदार और खतरनाक गटर में उतरने की हिम्मत जुटाते हैं।
गटर के अंदर की दुनिया बाहर की दुनिया से बिल्कुल अलग है। वहाँ सिर्फ अंधेरा और बदबू ही नहीं, बल्कि मांस खाने वाले चूहों की पूरी फौज और आखिर में एक विशालकाय, डरावना ऑक्टोपस जैसा समुद्री राक्षस उनका इंतज़ार कर रहा होता है। यह राक्षस समुद्र के रास्ते गटर की लाइनों में घुस आया है और अब पूरे शहर के लिए खतरा बन चुका है। कहानी बच्चों के इसी संघर्ष, राक्षस से उनकी टक्कर और अंत में अपनी वैज्ञानिक समझ और ताकत के दम पर उसे हराने की रोमांचक यात्रा दिखाती है।
पात्र विश्लेषण (Character Analysis)
इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी खूबी इसके किरदार हैं। लेखक ने पाँचों दोस्तों को अलग-अलग स्वभाव और खूबियाँ दी हैं, जो मिलकर एक मजबूत टीम बनाते हैं।
प्रतीक (द लीडर/साइंटिस्ट): प्रतीक को टीम का दिमाग कहा जा सकता है। उसे एक होनहार साइंस स्टूडेंट के रूप में दिखाया गया है। पूरी कहानी में वह हर समस्या को तर्क और विज्ञान की मदद से सुलझाने की कोशिश करता है। आखिर में राक्षस को हराने के लिए बिजली के तारों का इस्तेमाल करने का आइडिया भी उसी का होता है, जो यह साबित करता है कि सिर्फ ताकत ही नहीं, दिमाग भी उतना ही ज़रूरी है।

अफसाना (द स्ट्रेटेजिस्ट): अफसाना समूह की इकलौती लड़की है, लेकिन किसी भी मामले में वह लड़कों से कम नहीं है। उसे तेज दिमाग वाली और ‘चलता-फिरता कंप्यूटर’ कहा गया है। चाहे हरजीत की माँ पर लगे आरोपों को संभालना हो या गटर के अंदर आगे बढ़ने का रास्ता ढूँढना, अफसाना की सूझ-बूझ और धैर्य हर बार काम आता है। 90 के दशक की कॉमिक्स में उसका किरदार महिला सशक्तिकरण की एक अच्छी झलक देता है।
रुस्तम (द मसल): रुस्तम कराटे में ब्लैक बेल्ट है और शारीरिक रूप से सबसे ताकतवर है। गटर का भारी ढक्कन उठाना हो, खतरनाक चूहों को भगाना हो या सीधे राक्षस से भिड़ना हो—रुस्तम हर बार सबसे आगे नजर आता है। वह टीम का असली एक्शन हीरो है।
जॉनी (द कॉमिक रिलीफ): जॉनी कहानी में हल्कापन और मज़ा जोड़ता है। वह फुर्तीला है और हर हाल में मज़ाक करना नहीं छोड़ता। गंभीर हालात में भी उसका पॉज़िटिव एटीट्यूड पूरी टीम का हौसला बढ़ाता है।
हरजीत (द विक्टिम): हरजीत को एक किताबों में डूबे रहने वाले लड़के के रूप में दिखाया गया है। भले ही इस कहानी में वह ज़्यादातर समय गायब रहता है, लेकिन उसकी गुमशुदगी ही पूरी कहानी को आगे बढ़ाने वाली सबसे बड़ी वजह बनती है।
सहायक पात्र: हवलदार लोटा सिंह और चौकीदार जैसे किरदारों को व्यंग्य के अंदाज़ में दिखाया गया है, जिससे पुलिस की लापरवाही और डरपोक रवैये पर तंज कसा गया है। इससे बच्चों की बहादुरी और समझदारी और भी ज़्यादा उभरकर सामने आती है।
चित्रांकन और कला (Art and Visualization)

प्रदीप सोनी का चित्रांकन उस समय की पहचान बन चुकी शैली को साफ तौर पर दिखाता है। उनका सबसे बड़ा कमाल वातावरण बनाने में नजर आता है। गटर के अंदर के दृश्य इतने असरदार हैं कि अंधेरा, सीलन, गंदा पानी और तंग सुरंगें पढ़ते ही मन में घुटन और बंद जगह का डर पैदा कर देती हैं। पाठक खुद को उन संकरी सुरंगों में फँसा हुआ महसूस करता है। राक्षस का डिजाइन भी काफी डरावना है। मुख्य खलनायक, यानी विशालकाय ऑक्टोपस, अपनी लाल चमकती आँखों और बड़ी-बड़ी भुजाओं (टेंटेकल्स) के जरिए खौफ पैदा करता है। भले ही वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो इतने बड़े जीव का गटर में समा पाना मुश्किल लगता है, लेकिन कॉमिक्स की दुनिया में यह बात आसानी से स्वीकार हो जाती है। एक्शन सीन बहुत तेज और जीवंत हैं, चाहे चूहों का हमला हो या आखिरी मुकाबले में ऑक्टोपस से लड़ाई। पानी के छींटे, बिजली की चमक और पात्रों के चेहरे पर दिखता डर और हिम्मत—सब कुछ बहुत अच्छे से उकेरा गया है। रंगों की बात करें तो कॉमिक्स में चटक रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जो उस दौर की प्रिंटिंग के हिसाब से बिल्कुल सही बैठता है। रात के दृश्य हों या गटर के अंदर के सीन, हर जगह रंगों का संतुलन ठीक रखा गया है, जिससे चित्र साफ और प्रभावशाली लगते हैं।
लेखन और संवाद (Writing and Dialogue)

हनीफ अजहर की लेखन शैली सीधी, सरल और तेज रफ्तार वाली है। कहानी कहीं भी बेवजह नहीं रुकती और शुरू से ही रहस्य का माहौल बना देती है कि आखिर गटर के अंदर ऐसा क्या है। यही सस्पेंस पाठक को लगातार आगे पढ़ने के लिए मजबूर करता है। संवाद बच्चों की उम्र और सोच के मुताबिक लिखे गए हैं, इसलिए वे बनावटी नहीं लगते। जॉनी का मजाक करना, अफसाना का तर्क देना और बाकी दोस्तों की बातचीत बिल्कुल स्वाभाविक लगती है। कहानी के भीतर एक हल्की लेकिन असरदार सामाजिक बात भी छुपी हुई है। जब हरजीत गायब होता है, तो पड़ोसी उसकी माँ को ही दोष देने लगते हैं और उसे डायन या हत्यारी तक कह देते हैं। यह समाज की छोटी सोच और जल्दबाजी में फैसला सुनाने वाली मानसिकता को दिखाता है। इस तरह बच्चे सिर्फ राक्षस से ही नहीं लड़ते, बल्कि अपने दोस्त की माँ के सम्मान के लिए समाज से भी टकराते हैं।
कहानी के प्रमुख रोमांचक क्षण (Highlight Moments)

कहानी में कई ऐसे दृश्य हैं जो पढ़ते समय रोमांच पैदा कर देते हैं। जैसे ही बच्चे गटर में उतरते हैं, उनका सामना हजारों खतरनाक चूहों से होता है। यह दृश्य सच में रोंगटे खड़े कर देता है। रुस्तम और उसके दोस्त जिस तरह से अपनी जान बचाते हुए आगे बढ़ते हैं, वह पाठकों की धड़कनें तेज कर देता है। इसी बीच अफसाना का जाल लगाने का आइडिया और उसी की मदद से चूहों से बच निकलना यह दिखाता है कि बच्चे सिर्फ जोश में नहीं आए हैं, बल्कि पूरी तैयारी और समझ के साथ नीचे उतरे हैं। ऑक्टोपस का पहली बार पूरी तरह सामने आना भी बेहद चौंकाने वाला पल है। उसकी विशाल काया के सामने बच्चे छोटे-से नजर आते हैं, जैसे चींटियाँ। आखिरी क्लाइमेक्स भी काफी समझदारी भरा है, जहाँ प्रतीक अपनी विज्ञान की जानकारी का इस्तेमाल करता है और बिजली के खुले तार को पानी में डाल देता है। यह दृश्य सिर्फ एक्शन नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि अक्ल और समझ से बुराई पर काबू पाया जा सकता है।
तार्किक विश्लेषण (Critical Analysis)

हालाँकि यह कॉमिक्स पढ़ने में बेहद मजेदार है, लेकिन अगर एक वयस्क पाठक की नजर से देखा जाए तो इसमें कुछ तर्क से जुड़ी कमियाँ दिख सकती हैं। सबसे पहले तो राक्षस का आकार थोड़ा अविश्वसनीय लगता है, क्योंकि इतना बड़ा ऑक्टोपस शहर के गटर पाइपों में घूमे और वहीं रहे, यह वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं लगता। गटर लाइनें इतनी चौड़ी नहीं होतीं। इसके अलावा, पुलिस को इतना नाकाम दिखाया गया है कि चार बच्चे उनसे बेहतर जांच और रेस्क्यू कर लेते हैं। यह बच्चों को नायक दिखाने का एक आम तरीका है, जो बच्चों की कहानियों में अक्सर देखने को मिलता है। साथ ही, बच्चे बिना किसी खास सुरक्षा साधन, जैसे ऑक्सीजन मास्क या हथियार, के जहरीले गटर में उतर जाते हैं, जो असल जिंदगी में बहुत खतरनाक हो सकता है। लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह कॉमिक्स बच्चों और किशोरों के लिए लिखी गई है, और इस तरह की कहानियों में रोमांच और कल्पना को तर्क से ऊपर रखा जाता है। इस नजरिए से देखें तो कहानी अपने मकसद में पूरी तरह सफल रहती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
“गटर” किंग कॉमिक्स की एक यादगार पेशकश है, जो उस समय की याद दिलाती है जब दोस्त मोबाइल फोन में नहीं, बल्कि मैदानों और गलियों में साथ वक्त बिताते थे और एक-दूसरे के लिए किसी भी खतरे में कूद पड़ते थे। इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकत इसका टीम वर्क है, जहाँ कोई एक अकेला हीरो नहीं, बल्कि पूरी टीम मिलकर मुसीबत का सामना करती है। बच्चों का डर के बावजूद आगे बढ़ना ही इस कहानी की असली सीख है। लेखक ने गटर जैसी गंदी और डरावनी जगह को रोमांच से भरी दुनिया में बदल दिया, यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। कुल मिलाकर, यह कॉमिक्स यह संदेश देती है कि मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी और डरावनी क्यों न हो, अगर दोस्तों का साथ और दिमाग का सही इस्तेमाल हो, तो उससे पार पाया जा सकता है। कहानी सरल है, सीधी है, लेकिन मनोरंजन भरपूर देती है। प्रदीप सोनी की शानदार ड्रॉइंग और हनीफ अजहर की असरदार लेखनी मिलकर इसे 90 के दशक का एक यादगार “क्लासिक थ्रिलर” बनाती है, जो पुरानी हिंदी कॉमिक्स के शौकीनों के लिए सच में एक मस्ट-रीड है।

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