Close Menu
  • Home
  • Comics
  • Featured
  • Hindi Comics World
  • Trending
  • Blog
  • Spotlight
  • International

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from Comics Bio about art, design and business.

What's Hot

Abheda Series: Conspiracy Review – King Comics’ Dark Fantasy of Politics, Power & Superhero Satire

22 January 2026

किंग कॉमिक्स की ‘अभेद सीरीज’: ‘षड्यंत्र’ से शुरू हुआ साजिशों, विज्ञान और सुपरहीरो का महायुद्ध

22 January 2026

Sarpayagya Review: When Nagraj Is Trapped Between Illusion and Death, and Tausi Walks Into a Trap That Can Destroy Everything

21 January 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
comicsbio.comcomicsbio.com
Subscribe
  • Home
  • Comics
  • Featured
  • Hindi Comics World
  • Trending
  • Blog
  • Spotlight
  • International
comicsbio.comcomicsbio.com
Home » खून का खतरा – क्या डोगा पकड़ पाएगा करवा चौथ के खूनी किलर को?
Hindi Comics World Updated:11 September 2025

खून का खतरा – क्या डोगा पकड़ पाएगा करवा चौथ के खूनी किलर को?

ComicsBioBy ComicsBio11 September 2025Updated:11 September 2025111 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Reddit Email
खून का खतरा – डोगा कॉमिक्स समीक्षा | Raj Comics Review in Hindi
“खून का खतरा” – डोगा कॉमिक्स का सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर क्लासिक अंक।
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में राज कॉमिक्स का हमेशा से एकछत्र राज रहा है। खासकर 90 का दशक तो इसका सुनहरा दौर माना जाता है। इसी समय कई ऐसे हीरो सामने आए जिन्होंने पाठकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, परमाणु और भेड़िया जैसे किरदारों के बीच एक ऐसा नायक भी था, जो अंधेरों में छिपकर रहता था और कानून को अपने तरीके से हाथ में लेकर मुंबई की गलियों में इंसाफ करता था। वह कोई आम सुपरहीरो नहीं था, बल्कि एक एंटी-हीरो था। उसका नाम सुनते ही अपराधियों की रूह कांप उठती थी – डोगा।

“खून का खतरा” डोगा की कॉमिक्स सीरीज़ का एक ऐसा खास अंक है, जो सिर्फ एक्शन और मारधाड़ पर ही नहीं टिका है। इसमें रहस्य, गहराई और मनोवैज्ञानिक थ्रिलर का जबरदस्त रंग है। इसे लेखक त्रयी – भरत, तरुण कुमार वाही और विवेक मोहन – ने लिखा है। वहीं, चित्रकार मनु ने अपने दमदार और पहचानने लायक आर्टवर्क से इसमें जान डाल दी है। यह कॉमिक्स सिर्फ एक कहानी भर नहीं है, बल्कि उस दौर के समाज, अपराध की बदलती सोच और न्याय के दोहरे मापदंडों पर एक करारा तंज भी है।

कथासार: जब परंपरा पर मंडराता है आतंक का साया

कहानी की शुरुआत होती है मुंबई पुलिस हेडक्वार्टर के एक तनाव भरे माहौल से। पिछले पाँच सालों से एक रहस्यमयी सीरियल किलर ने पूरे शहर में डर और दहशत का माहौल बना रखा है। उसका तरीका (modus operandi) बेहद खौफनाक और सर्द कर देने वाला है। वह हर साल करवा चौथ की रात को एक सुहागन औरत की बेरहमी से हत्या करता है। तरीका हमेशा वही – तेज धार वाले हथियार से गला रेतना। पाँच साल, पाँच हत्याएँ और पुलिस अब तक खाली हाथ। न हत्यारा पकड़ा गया, न ये समझ आया कि वह क्यों मारता है और उसका असली मकसद क्या है। यह सब एक गहरी पहेली बनी हुई है।

अब फिर से करवा चौथ करीब आ रहा है और पुलिस पर इस केस को सुलझाने का जबरदस्त दबाव है। केस की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसे एक निडर और काबिल महिला अफसर इंस्पेक्टर तेजस्विनी तलवार को सौंपा जाता है।

जैसे ही यह खबर शहर में फैलती है, इसकी भनक उस इंसान तक भी पहुँचती है जो कानून से नहीं, बल्कि अपने अंदाज़ से न्याय करता है – डोगा। जनता को डोगा पर पूरा भरोसा है और डोगा जानता है कि यह भरोसा टूटना नहीं चाहिए। इसलिए वह ठान लेता है कि इस “करवा चौथ किलर” को वही उसके अंजाम तक पहुँचाएगा।

लेकिन इस खेल में सिर्फ पुलिस और डोगा ही शामिल नहीं हैं। कहानी में दो और जबरदस्त किरदारों की एंट्री होती है, जो अपने-अपने कारणों से इस केस का हिस्सा बनते हैं।

काली विधवा (ब्लैक विडो):
एक रहस्यमयी औरत, जो मर्दों से नफरत करती है और खुद को एक सतर्कता सेनानी (विजिलांटे) मानती है। उसका मानना है कि अगर कोई अपराधी औरतों को अपना शिकार बनाता है, तो उसे सज़ा देने का हक किसी मर्द के पास नहीं, बल्कि सिर्फ एक औरत के पास होना चाहिए। यही सोच उसे इस केस की तरफ खींचती है। वह भी इस हत्यारे को ढूंढ रही है, लेकिन उसका इरादा साफ है – पुलिस या डोगा से पहले उसे पकड़ना और अपने अंदाज़ में उसका फैसला करना।

काल पहेलियां:
यह किरदार कहानी का सबसे हैरान कर देने वाला और अनोखा हिस्सा है। वह कोई शहर का हीरो नहीं, बल्कि एक खतरनाक अपराधी है। उसकी पहचान है उसकी जानलेवा और पेचीदा पहेलियाँ, जिनका इस्तेमाल करके वह अपराध करता है। यही वजह है कि अपराध जगत में लोग उसे खूनी पहेलियां के नाम से भी जानते हैं।

कहानी की शुरुआत में ही एक दिलचस्प त्रिकोणीय टकराव देखने को मिलता है। डोगा पुलिस की फाइल चुरा लेता है, लेकिन तभी काली विधवा उससे वो फाइल छीनने की कोशिश करती है। दोनों के बीच भिड़ंत चल ही रही होती है कि इंस्पेक्टर तेजस्विनी अपनी तेज दिमागी का सबूत देती है। वह साफ कहती है कि उसके पास इस फाइल की कई कॉपियाँ हैं। यानी असली जंग सिर्फ हत्यारे को पकड़ने की नहीं है, बल्कि तीन अलग-अलग सोच और काम करने के तरीकों की श्रेष्ठता साबित करने की लड़ाई भी है।

डोगा को जल्द ही एहसास होता है कि यह केस तो “भूसे के ढेर में सुई खोजने” जैसा है। हत्यारा साल में सिर्फ एक बार सामने आता है और उसका कोई साफ-साफ पैटर्न भी नहीं है। डोगा सोचता है कि इस केस को सुलझाने के लिए किसी ऐसे शख्स की ज़रूरत है, जो पहेलियाँ सुलझाने का उस्ताद हो। और यहीं पर एंट्री होती है काल पहेलिया उर्फ खूनी पहेलियां की।

शुरुआती टकराव और गलतफहमियों के बाद, डोगा और काल पहेलिया – दो बिल्कुल अलग प्रवृत्ति के लोग – मजबूरी में ही सही, साथ मिलकर काम करने का फैसला करते हैं। दोनों पुराने केस और हत्याओं के सुरागों को अपनी-अपनी अनोखी शैली से खंगालना शुरू करते हैं। काल पहेलिया सिर्फ सबूतों तक नहीं रुकता, बल्कि हत्यारे के दिमाग में घुसकर उसके अगले कदम का अंदाज़ा लगाने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे, दोनों मिलकर एक ऐसा पैटर्न उजागर करते हैं जिसे आधुनिक पुलिस टेक्नॉलॉजी भी अनदेखा कर चुकी थी।

जैसे-जैसे करवा चौथ की रात नज़दीक आती है, पूरे शहर पर एक अनजाना डर छा जाता है। पुलिस हर गली-नुक्कड़ पर तैनात है। डोगा और उसका साथी कोबी अपनी जांच के आखिरी पड़ाव पर हैं, वहीं काली विधवा भी अपने शिकार के लिए जाल बिछा चुकी है।

कहानी का क्लाइमेक्स बेहद रोमांच और तनाव से भरा है, जहां हत्यारा अपना अगला शिकार चुन लेता है। और आखिरकार, उसका असली चेहरा और मकसद सामने आता है – ऐसा सच, जो पाठकों को भीतर तक हिला देता है। वह कोई पागल या सनकी नहीं निकलता, बल्कि एक ऐसा इंसान है जिसके अतीत का दर्दनाक घाव उसे इस खौफनाक रास्ते पर ले आया है।

चरित्र-चित्रण: न्याय, प्रतिशोध और कानून के प्रहरी

“खून का खतरा” की सबसे बड़ी ताकत इसके दमदार और बहुआयामी किरदार हैं।

डोगा (सूरज):
इस कॉमिक्स में डोगा अपने पूरे शिखर पर दिखाई देता है। वह सिर्फ एक मसल-मैन या मारधाड़ करने वाला हीरो नहीं है, बल्कि सोचने-समझने वाला इंसान भी है। केस की जटिलता को वह अच्छे से समझता है और यह मानने में हिचकिचाता नहीं कि इस पहेली को सुलझाने के लिए उसे मदद की ज़रूरत है।
उसके अंदर का द्वंद्व साफ दिखाई देता है – एक तरफ सूरज का रूप है, जो एक सामान्य और शांत ज़िंदगी जीना चाहता है, तो दूसरी तरफ नकाबपोश डोगा है, जो उसे समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।
उसके संवाद भी उसके अक्खड़ और बेखौफ स्वभाव को दर्शाते हैं। जैसे कि उसका यह डायलॉग –
“कुत्ते के मुंह से हड्डी और डोगा के हाथ से फाइल छीन लेना आसान नहीं होता, डियर काली!”

काल पहेलिया:
यह किरदार इस कॉमिक्स का असली सरप्राइज पैकेज है और पूरी कहानी की जान भी। काल पहेलिया कोई पारंपरिक हीरो नहीं है। वह खुद एक अपराधी है। उसका नाम ही उसके काम की पहचान है – “खूनी पहेलियां”। वह हत्याओं से जुड़ी रहस्यमयी पहेलियों को हल करता है और उनका रहस्य खोलता है।
उसका लुक और अंदाज़ तुरंत असर छोड़ता है – अजीबोगरीब कपड़े, माथे पर तिलक और उसकी देहाती भाषा। ये सब उसे पढ़ते ही अलग और यादगार बना देते हैं।
वह आधुनिक जासूसी तरीकों और पुलिस टेक्नॉलॉजी का मजाक उड़ाता है। डोगा और काल पहेलिया की जोड़ी गज़ब की बनती है। जहां डोगा ताकत, तकनीक और शहरी डर का प्रतीक है, वहीं काल पहेलिया देहाती दिमाग, धैर्य और विश्लेषण का।
शुरुआत में दोनों का टकराव होता है, लेकिन बाद में जब वे साथ काम करते हैं तो उनके बीच एक-दूसरे के प्रति इज्ज़त और अपनापन पैदा हो जाता है। हाँ, पेशेवर प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
असल में, काल पहेलिया के बिना डोगा के लिए इस सीरियल किलर तक पहुँचना लगभग नामुमकिन था। वही अकेला ऐसा किरदार है जिसने बिखरे हुए सुरागों को जोड़कर हत्यारे की एक पूरी तस्वीर पेश की।

काली विधवा: वह सिर्फ एक “फीमेल फैटेल” नहीं है, बल्कि एक सशक्त और गहराई वाली एंटी-हीरोइन है। उसके पीछे भी एक दर्दनाक कहानी छिपी है, जो उसे इस रास्ते पर लेकर आई है। पुरुषों के प्रति उसकी घृणा ही उसकी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा है। वह नारीवाद के एक ऐसे अतिवादी रूप का प्रतीक है, जो अक्सर सही और गलत के बीच की लकीरों को धुंधला कर देता है। उसका किरदार कहानी में एक नई नैतिक जटिलता जोड़ता है। पाठक लगातार सोचते रहते हैं – क्या उसका प्रतिशोध सही है? क्या वह सच में न्याय कर रही है या सिर्फ नफरत को हवा दे रही है? यही सवाल उसकी मौजूदगी को और रोचक बनाता है।

इंस्पेक्टर तेजस्विनी तलवार: तेजस्विनी उस दौर की typical हिंदी फिल्मों वाली पुलिस अफसर नहीं है, जो बस हीरो के आने का इंतजार करती रहे। वह तेज दिमाग वाली, काबिल और निडर अफसर है। उसे अच्छी तरह पता है कि डोगा और काली विधवा जैसे लोग कानून के दायरे से बाहर काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी वह उनसे भिड़ने और मुकाबला करने में पीछे नहीं हटती।
वह इस कॉमिक्स में कानून और व्यवस्था का असली चेहरा है। एक ऐसा चेहरा, जो इन विजिलांटियों के बीच अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए लगातार जूझ रहा है। उसकी मौजूदगी कहानी को और संतुलित बनाती है और यह दिखाती है कि सिर्फ नकाबपोश हीरो ही नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर भी ईमानदार लोग हैं जो न्याय के लिए लड़ रहे हैं।

विषय-वस्तु और सामाजिक टिप्पणी

यह कॉमिक्स सिर्फ एक अपराध कथा नहीं है, बल्कि कई गहरे और अहम मुद्दों पर रोशनी डालती है:

कानून बनाम विजिलांटिज़्म:
डोगा की कहानियों का सबसे बड़ा और केंद्रीय विषय यही है। सवाल साफ है – क्या किसी इंसान को कानून अपने हाथ में लेने का हक है, खासकर तब जब पूरा सिस्टम नाकाम साबित हो रहा हो?
इस कॉमिक्स में तो एक नहीं, बल्कि तीन-तीन विजिलांटे हैं – डोगा, काल पहेलिया और काली विधवा। तीनों के अलग-अलग तरीके और सोच इस बहस को और गहराई देते हैं और पाठक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

परंपरा और अपराध:
करवा चौथ जैसा पवित्र त्योहार कहानी की पृष्ठभूमि बनाना अपने आप में एक साहसी कदम था। यह दिखाता है कि कैसे सबसे पवित्र परंपराओं की आड़ में भी घिनौना अपराध छिपा हो सकता है।
हत्यारे का मकसद भी इसी परंपरा की विकृत व्याख्या से जुड़ा है, जिससे कहानी और भी डरावनी और सोचने पर मजबूर करने वाली बन जाती है।

मनोवैज्ञानिक अपराध:
90 के दशक की ज्यादातर कॉमिक्स गैंगवार और अंडरवर्ल्ड की कहानियों पर केंद्रित थीं। वहीं, “खून का खतरा” ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए एक सीरियल किलर की मानसिकता को खंगालने की कोशिश की।
यह कॉमिक्स सिर्फ इस पर ध्यान नहीं देती कि “किसने” अपराध किया, बल्कि इस पर भी गहराई से जाती है कि “क्यों” अपराध किया। यही चीज इसे अपने समय से कहीं ज्यादा परिपक्व और असरदार बना देती है।

कला और प्रस्तुति: मनु का दमदार चित्रांकन

चित्रकार मनु का काम इस कॉमिक्स की असली आत्मा है। उनकी आर्ट स्टाइल बिल्कुल डोगा के किरदार जैसी है – डार्क, ग्रिटी और यथार्थ से भरी हुई।

चित्रांकन: हर पैनल में एक्शन और इमोशन जैसे ज़िंदा हो उठते हैं। किरदारों के चेहरे के हाव-भाव से लेकर उनके शरीर की भाषा तक, सब कुछ कहानी को आगे बढ़ाता है। फाइट सीन तो खासतौर पर इतने प्रभावशाली हैं कि लगता है जैसे सिनेमा की किसी जबरदस्त एक्शन मूवी का हिस्सा हों। मनु की स्याही का गहरा इस्तेमाल मुंबई की अंधेरी गलियों और पूरी कहानी के टेंशन भरे माहौल को बखूबी दिखाता है।

रंग-सज्जा: सुनील पांडेय की कलरिंग उस दौर की कॉमिक्स की याद दिलाती है। गहरे और चमकीले रंगों का ऐसा कॉम्बिनेशन दिया गया है, जो न सिर्फ आंखों को आकर्षित करता है बल्कि कहानी के मूड से पूरी तरह मेल खाता है।

संवाद: संवाद छोटे, चुटीले और सीधे असर करने वाले हैं। ये कहानी की रफ्तार बनाए रखते हैं। डोगा के वन-लाइनर्स तो आज भी फैंस के दिलों-दिमाग में ताज़ा हैं।

निष्कर्ष: क्यों खास है “खून का खतरा”?

“खून का खतरा” राज कॉमिक्स के इतिहास में किसी मील के पत्थर से कम नहीं है। यह कॉमिक्स आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है जितनी अपने रिलीज़ के वक्त थी। इसकी सफलता सिर्फ इसके एक्शन पर नहीं टिकी, बल्कि इसकी कसी हुई कहानी, अप्रत्याशित मोड़ और दमदार किरदारों पर आधारित है।

खास तौर पर, डोगा और काल पहेलिया की अप्रत्याशित जोड़ी इस कहानी को एक नई ऊँचाई पर ले जाती है। यह कॉमिक्स सिर्फ एक सुपरहीरो एडवेंचर नहीं है, बल्कि एक सस्पेंस थ्रिलर है, जो पाठक को आख़िरी पन्ने तक बांधे रखती है।

यह भी साबित करती है कि भारतीय कॉमिक्स में सिर्फ हल्की-फुल्की कहानियाँ ही नहीं, बल्कि गहरी और परिपक्व कथाएँ कहने की भी ताकत है। इसने डोगा को एक साधारण विजिलांटे से ऊपर उठाकर एक जटिल और विचारशील नायक के रूप में स्थापित किया।

अगर आप भारतीय कॉमिक्स के उस सुनहरे दौर का असली मज़ा लेना चाहते हैं, या फिर एक ऐसी अपराध कथा पढ़ना चाहते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर दे, तो “खून का खतरा” आपके लिए अनिवार्य पठन है।
यह सिर्फ एक कॉमिक्स नहीं, बल्कि एक ऐसी कला का नमूना है जो वक्त की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरी है।

Doga Raj Comics Indian comics Suspense Thriller Comics काल पहेलिया काली विधवा खून का खतरा डोगा राज कॉमिक्स हिंदी कॉमिक्स समीक्षा
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
ComicsBio
  • Website

Related Posts

किंग कॉमिक्स की ‘अभेद सीरीज’: ‘षड्यंत्र’ से शुरू हुआ साजिशों, विज्ञान और सुपरहीरो का महायुद्ध

22 January 2026 Hindi Comics World Updated:22 January 2026

राज कॉमिक्स ‘ब्रह्मांड योद्धा’: अंतर-आकाशगंगा युद्ध और सुपरहीरो का महाकाव्य

21 January 2026 Hindi Comics World

जब धरती और पाताल टकराए: ‘सर्पद्वन्द्व’ में नागराज बनाम तौसी की सबसे खतरनाक जंग

20 January 2026 Hindi Comics World
View 1 Comment

1 Comment

  1. binance on 22 January 2026 14:02

    Thank you for your sharing. I am worried that I lack creative ideas. It is your article that makes me full of hope. Thank you. But, I have a question, can you help me?

    Reply

Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Interesting Ways to Read Free Online Comics

2 September 2025

Deadliest Female Villains in Raj Comics: A Clash with Nagraj

11 September 2024

Kali Mirch Chacha: Master Marksman and Doga’s Mentor in Black Paper Art

11 September 2024

Read Free Online Comics: Your Ultimate Guide to Digital Comic Reading

30 August 2025
Don't Miss

Abheda Series: Conspiracy Review – King Comics’ Dark Fantasy of Politics, Power & Superhero Satire

By ComicsBio22 January 2026

‘Abheda Series’ was a huge and ambitious effort by King Comics Publications. The first comic…

किंग कॉमिक्स की ‘अभेद सीरीज’: ‘षड्यंत्र’ से शुरू हुआ साजिशों, विज्ञान और सुपरहीरो का महायुद्ध

22 January 2026

Sarpayagya Review: When Nagraj Is Trapped Between Illusion and Death, and Tausi Walks Into a Trap That Can Destroy Everything

21 January 2026

Universe Warrior(Brahmand Yoddha): Raj Comics’ Cosmic Epic with Dhruv, Doga, and Nagraj

21 January 2026
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from Comics Bio about art & design.

About Us
About Us

Welcome to ComicsBio, your one-stop shop for a colorful universe of cartoons, movies, anime, and feature articles!

Email Us: info@comicsbio.com

Our Picks

Abheda Series: Conspiracy Review – King Comics’ Dark Fantasy of Politics, Power & Superhero Satire

22 January 2026

किंग कॉमिक्स की ‘अभेद सीरीज’: ‘षड्यंत्र’ से शुरू हुआ साजिशों, विज्ञान और सुपरहीरो का महायुद्ध

22 January 2026

Sarpayagya Review: When Nagraj Is Trapped Between Illusion and Death, and Tausi Walks Into a Trap That Can Destroy Everything

21 January 2026
Most Popular

Interesting Ways to Read Free Online Comics

2 September 2025

Deadliest Female Villains in Raj Comics: A Clash with Nagraj

11 September 2024

Kali Mirch Chacha: Master Marksman and Doga’s Mentor in Black Paper Art

11 September 2024
comicsbio.com
Facebook X (Twitter) Instagram
  • About Us
  • Terms
  • Privacy Policy
  • Contact Us
  • FAQ
© 2026 comicsbio

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.