राज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ‘भूकम्पा ओलंपिक’ एक ऐसी कॉमिक्स है जो अपने नाम के अनुरूप ही भूकम्प और ओलंपिक के अनोखे मिश्रण के साथ पाठक को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक हास्य-व्यंग्यपूर्ण यात्रा है जो हमें धरती की सतह से दस हजार मीटर नीचे ‘धरातलपुरी’ नामक एक रहस्यमयी स्थान पर ले जाती है। इस कॉमिक्स में दिलीप चौबे की कथानक, तरुण कुमार वगही का लेखन, और मनीष गुप्ता का संपादन इसे एक अद्वितीय अनुभव बनाता है, जिसमें संजय गुप्ता और विवेक मोहन का हास्य सलाहकार के रूप में योगदान चार चाँद लगा देता है। चित्रकार दिलीप चौबे और सह-कलाकार दीपिका, विनीत, सिद्धार्थ ने मिलकर इस अंडरग्राउंड दुनिया को जीवंत कर दिया है।
कहानी का ताना-बाना: भूकम्पों का रहस्य और एक अजब-गजब ओलंपिक

कॉमिक्स की शुरुआत ही एक सवाल से होती है – “वैज्ञानिक जो कुछ कहते हैं, उसे हम सच क्यों मानें? हम तो जाकर ही रहेंगे भूकम्पों के रहस्य की गहराई में।” यह वाक्य ही पाठक को एक ऐसे सफर पर ले जाने का वादा करता है जहाँ विज्ञान और कल्पना का अद्भुत मेल है। कहानी लातूर और जबलपुर में आए भूकम्पों से शुरू होती है, जिन्हें वैज्ञानिक भूगर्भीय हलचलों का परिणाम बताते हैं। लेकिन हमारी कॉमिक्स हमें बताती है कि इन भूकम्पों का असली कारण कुछ और ही है – धरती के नीचे धरातलपुरी में होने वाले ‘भूकम्पा ओलंपिक’!
धरातलपुरी, राजा भूकम्पा के नेतृत्व में हर पाँच साल में भूकम्पा ओलंपिक का आयोजन करती है। इन ओलंपिक में विभिन्न प्रतियोगिताएँ होती हैं, और अंत में ‘धम-धमा-हाम’ प्रतियोगिता होती है, जहाँ दो पहलवान पृथ्वी की धुरी से सटे एक पिलर से टकराते हैं। इस टक्कर से जो भूकम्प आते हैं, वही हमारी धरती पर महसूस किए जाते हैं। यह अवधारणा ही इतनी हास्यास्पद और मौलिक है कि पाठक को तुरंत अपनी ओर खींच लेती है। भूकम्पों के पीछे ओलंपिक का विचार, यह अपने आप में एक शानदार व्यंग्य है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वाकई हमारी दुनिया में होने वाली कुछ घटनाओं के पीछे ऐसे ही कोई अजीबोगरीब कारण छिपे हो सकते हैं!
पात्रों का परिचय: टोड्स और उनके कारनामे
कहानी का मुख्य आकर्षण ‘टोड्स’ नाम के कुछ अजीबोगरीब जीव हैं, जो गटर में रहते हैं और मच्छरों को पकड़कर खाते हैं। ये टोड्स, जिनमें शूटर, कंप्यूटर और मास्टर शामिल हैं, अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त हैं, जब अचानक एक भूकम्प आता है। भूकम्प के दौरान उनकी भाग-दौड़, उनकी बातचीत और उनके बच निकलने के तरीके, पाठक को हँसने पर मजबूर कर देते हैं।
उदाहरण के लिए, जब भूकम्प आता है और दीवारें हिलने लगती हैं, तो कंप्यूटर चीख पड़ता है, “बाहर निकलो वरना अगर टोड निवास गिर गया तो हम भी दब जाएंगे।” इस पर मास्टर का जवाब, “मगर भूकम्प के कारण तो हम खड़े भी नहीं हो पा रहे, भागेंगे कैसे?” यह संवाद उनकी बेबसी और हास्य को बखूबी दर्शाता है। शूटर का दिमाग चलना और उन्हें गटर से बाहर निकालने का तरीका (तीर से फेंकना!) भी बेहद मनोरंजक है। जब मास्टर कंप्यूटर को तीर से बाहर फेंकने के बाद खुद बाहर आने की बात करता है, तो कंप्यूटर उसे बेवकूफ कहता है और बताता है कि अगर उसे भी तीर के साथ फेंक दिया होता तो शूटर खुद बाहर कैसे आता। यह छोटी-छोटी बातें ही कॉमिक्स में हास्य का तड़का लगाती हैं।
धरातलपुरी का सफर: एक अप्रत्याशित मोड़

टोड्स को भूकम्प से बचने के लिए गटर से भागना पड़ता है, और इसी दौरान वे एक ड्रिल मशीन से टकराते हैं। यह ड्रिल मशीन उन्हें अनजाने में धरातलपुरी तक पहुँचा देती है। यह मोड़ कहानी में एक नया आयाम जोड़ता है और पाठक की उत्सुकता को बढ़ाता है। धरातलपुरी में उनका स्वागत टेंड नाम का एक व्यक्ति करता है, जो उन्हें भूकम्पा ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रतियोगियों की सूची में शामिल कर लेता है। यह एक अप्रत्याशित घटना है, क्योंकि टोड्स तो सिर्फ़ अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन अब वे एक विशाल ओलंपिक का हिस्सा बन गए हैं!
भूकम्पा ओलंपिक की प्रतियोगिताएँ: हास्य और रोमांच का संगम
भूकम्पा ओलंपिक की प्रतियोगिताएँ ही इस कॉमिक्स का दिल हैं। ये प्रतियोगिताएँ न केवल रोमांचक हैं, बल्कि उनमें हास्य का भी भरपूर पुट है। पहली प्रतियोगिता तीरंदाजी की है, जिसमें शूटर और लोटस नामक प्रतिद्वंद्वी एक डंडे पर टंगी घूमती हुई कानी मछली की आँख पर निशाना लगाते हैं। लोटस, जो खुद को मच्छर की आँख पर निशाना लगाने वाला बताता है, शूटर का मज़ाक उड़ाता है। लेकिन अंत में शूटर का निशाना अचूक निकलता है, और वह मछली की आँख पर नहीं, बल्कि उसकी बगल से तीर निकाल देता है, जिससे सारा स्टेडियम तालियों से गूँज उठता है। यह दृश्य न केवल हास्यास्पद है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे कभी-कभी अप्रत्याशित परिणाम भी जीत दिला सकते हैं।
अगली प्रतियोगिताएँ और भी मज़ेदार हैं। ‘हट्टी-कट्टी’ प्रतियोगिता में, पहलवान एक-दूसरे को धुरी से सटे पिलर पर धकेलते हैं, जिससे भूकम्प आते हैं। यह प्रतियोगिता ही भूकम्पों का असली कारण है, और इसे देखकर पाठक को हँसी आ जाती है कि कैसे धरती पर होने वाले भूकम्पों के पीछे इतना अजीबोगरीब कारण छिपा है। कॉमिक्स में राजा भूकम्पा और अन्य पात्रों के बीच की बातचीत भी हास्य से भरपूर है। राजा भूकम्पा का यह कहना कि “इस बार भी भूकम्पा कप हम ही जीतेंगे,” और फिर टुच्ची प्रतियोगिताओं से शुरुआत करना, उनके चरित्र में एक अजीबोगरीब हास्य जोड़ता है।
चित्रकला और संवाद: कॉमिक्स की जान
दिलीप चौबे और उनकी टीम की चित्रकला इस कॉमिक्स की सबसे बड़ी ताकत है। पात्रों के हाव-भाव, उनकी प्रतिक्रियाएँ और धरातलपुरी का चित्रण, सब कुछ बहुत ही शानदार है। टोड्स के चेहरे पर डर, चिंता और खुशी के भाव, और राजा भूकम्पा के चेहरे पर गर्व और आत्मविश्वास, सब कुछ बहुत ही बारीकी से दर्शाया गया है। संवाद भी बहुत ही चुटीले और हास्यास्पद हैं, जो कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं और पाठक को हँसने पर मजबूर करते हैं।
उदाहरण के लिए, जब डॉक्टर सम्पत भूकम्प की आवाज़ों को अपने मरीज के पेट की आवाज़ों से तुलना करते हैं, तो यह एक शानदार हास्यपूर्ण क्षण है। इसी तरह, जब टोड्स एक-दूसरे को मज़ाक उड़ाते हैं या एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, तो उनकी बातचीत में एक स्वाभाविक हास्य होता है जो पाठक को पसंद आता है।
सामाजिक व्यंग्य और संदेश

कॉमिक्स सिर्फ़ हँसाती ही नहीं, बल्कि इसमें कुछ गहरे सामाजिक व्यंग्य भी छिपे हैं। ठेकेदार गटरफोड़ का रिश्वत देकर ठेका हासिल करना और फिर अपनी शादी से पहले गटर बनवाने की जल्दबाज़ी करना, भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत स्वार्थ पर एक तीखा व्यंग्य है। यह दिखाता है कि कैसे लोग अपने निजी फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं, भले ही उसका परिणाम दूसरों के लिए कितना भी बुरा क्यों न हो।
भूकम्पों के पीछे ओलंपिक का विचार भी एक व्यंग्य है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम अपनी समस्याओं के पीछे के असली कारणों को समझने की कोशिश करते हैं, या हम सिर्फ़ सतही स्पष्टीकरणों पर ही भरोसा कर लेते हैं। यह कॉमिक्स हमें यह भी सिखाती है कि कभी-कभी सबसे अप्रत्याशित परिस्थितियों में भी हमें अपनी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और मुश्किलों का सामना करना चाहिए।
निष्कर्ष: एक यादगार हास्य अनुभव
कुल मिलाकर, ‘भूकम्पा ओलंपिक’ एक बेहतरीन कॉमिक्स है जो हास्य, रोमांच और व्यंग्य का एक शानदार मिश्रण है। इसकी मौलिक कहानी, मज़ेदार पात्र, चुटीले संवाद और शानदार चित्रकला इसे एक यादगार अनुभव बनाते हैं। यह कॉमिक्स बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आएगी, क्योंकि इसमें न केवल हँसने के लिए बहुत कुछ है, बल्कि सोचने के लिए भी कुछ गंभीर विषय हैं। यह राज कॉमिक्स की एक ऐसी पेशकश है जो आपको धरती के नीचे की दुनिया का एक अनोखा और हास्यपूर्ण सफर कराएगी, और भूकम्पों के पीछे छिपे रहस्य को एक नए और मज़ेदार अंदाज़ में उजागर करेगी। अगर आप एक ऐसी कॉमिक्स की तलाश में हैं जो आपको हँसाए, सोचने पर मजबूर करे, और एक अलग ही दुनिया में ले जाए, तो ‘भूकम्पा ओलंपिक’ निश्चित रूप से आपकी सूची में होनी चाहिए। यह एक ऐसी कॉमिक्स है जिसे आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे और हर बार कुछ नया हास्य और व्यंग्य पाएंगे। यह वाकई में एक “धम-धमा-हाम” अनुभव है!

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