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Home » Dayawan Taussi Comics Review – Tulsi Comics का Emotional और Epic Adventure!
Hindi Comics World Updated:26 October 2025

Dayawan Taussi Comics Review – Tulsi Comics का Emotional और Epic Adventure!

Tulsi Comics का यह Digest दिखाता है कि असली Hero वही है जो ताकत नहीं, दिल से जीतता है — एक कहानी दया, प्रेम और कर्तव्य की।
ComicsBioBy ComicsBio26 October 2025Updated:26 October 202518 Mins Read
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दयावान तौसी तुलसी कॉमिक्स रिव्यू – एक दयालु नायक की भावनात्मक और रोमांचक यात्रा
‘दयावान तौसी’ तुलसी कॉमिक्स डाइजेस्ट #343 का कवर – एक नायक की दया, धर्म और वीरता की अद्भुत मिसाल।
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तुलसी कॉमिक्स, जिसने हमें ‘तौसी’ जैसा जबरदस्त और अनोखा हीरो दिया, आज भी भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में एक खास जगह रखती है। आज हम बात करेंगे तुलसी कॉमिक्स डाइजेस्ट के अंक संख्या 343, यानी ‘दयावान तौसी’ की। यह कहानी सिर्फ तौसी के एक अलग और भावुक पहलू को सामने नहीं लाती, बल्कि उस ज़माने की कहानी कहने की स्टाइल, चित्रकला और उस दौर के मूल्यों को भी बखूबी दिखाती है।

‘दयावान तौसी’ नाम ही बता देता है कि यह कहानी तौसी की दया, करुणा और इंसानियत को केंद्र में रखती है। तौसी, जो पाताल सर्पदेश का सम्राट है और पूरे ब्रह्मांड के सबसे ताकतवर इच्छाधारी नागों में गिना जाता है, अपनी शक्ति से ज़्यादा अपने दिल और न्यायप्रियता के लिए जाना जाता है। यह कॉमिक्स असल में उसी दया की परीक्षा है — जहाँ तौसी को अपने निजी मकसद और एक निर्दोष की रक्षा के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

कथानक एवं कहानी का सार: प्रेम, जुदाई और फर्ज़ की कहानी

कहानी की शुरुआत बहुत ही भावनात्मक और निजी पल से होती है। पाताल सर्पदेश का राजा तौसी, अपनी रानी अप्सरा से मिलने उनके रनिवास पहुँचता है। यहाँ लेखक रितुराज ने तौसी जैसे ताकतवर राजा के कोमल और मानवीय रूप को बहुत खूबसूरती से दिखाया है।

अप्सरा अपने पति से बेहद प्यार करती है, लेकिन अपने बेटे की जुदाई में टूटी हुई है। उनका पुत्र — जो भविष्य में सर्पदेश का राजकुमार बनेगा — किसी श्राप या मृत्युयोग के कारण नागबाबा की देखरेख में किसी अज्ञात जगह पर रह रहा है। एक माँ का दर्द और पत्नी की अपने पति से उम्मीदें, कहानी को बेहद भावुक और गहराई भरा बना देती हैं।

अप्सरा तौसी से ‘चक्षुभेदी मणि’ लाने की विनती करती है। यह कोई साधारण मणि नहीं है — इसकी खासियत यह है कि अगर इसे पानी के पात्र में रखा जाए, तो उस व्यक्ति या जीव का पूरा जीवन एक चलचित्र की तरह देखा जा सकता है, जिसकी छाया किसी सर्प ने अपनी आँखों में कैद की हो। अप्सरा चाहती है कि वह इस मणि के ज़रिए अपने बेटे को दूर रहकर भी बढ़ते हुए देख सके, और साथ ही अपने पति के वीरता भरे कारनामे भी। यह एक ऐसी इच्छा है जिसे कोई भी पति नकार नहीं सकता।

लेकिन दिक्कत यह है कि यह मणि पाताल भैरवी के सिंहासन में जड़ी हुई है, और उसे हासिल करना लगभग नामुमकिन है। उस राह की रखवाली करता है दैत्यराज सिंगाड़ा, जो बेहद निर्दयी और शक्तिशाली असुर है। इसके बावजूद तौसी अपनी पत्नी की खुशी के लिए इस असंभव काम को पूरा करने का प्रण लेता है।

कहानी आगे बढ़ती है और तौसी पहुँचता है नागबाबा के पास — जो उसके गुरु और रक्षक दोनों हैं। नागबाबा उसे उसके पुत्र पर मंडरा रहे मृत्युयोग के खतरे के बारे में बताते हैं। वे यह भी समझाते हैं कि क्यों अब तक बच्चे का नामकरण नहीं हुआ और क्यों उसे सब से दूर रखा गया है। नागबाबा तौसी को आगाह करते हैं कि आगे का सफर बेहद कठिन होगा, लेकिन तौसी अपने निर्णय पर डटा रहता है।

यहीं से शुरू होती है तौसी की रोमांचक यात्रा। उसे पहुँचना है हिमेश पर्वत, जहाँ तक का रास्ता खतरों और रहस्यों से भरा है। अपनी इच्छाधारी शक्तियों का इस्तेमाल कर तौसी सर्प रूप में बदलता है और लंबा सफर तय करता हुआ आगे बढ़ता है।

हिमेश पर्वत पहुँचने पर उसे एक अलौकिक और पवित्र माहौल महसूस होता है — चारों ओर ऋषि-मुनि तपस्या में लीन हैं। तभी उसकी नज़र एक महात्मा पर पड़ती है, जो यज्ञ कर रहे हैं, लेकिन उस यज्ञ में कुछ दैत्य बार-बार बाधा डाल रहे हैं। दैत्यराज सिंगाड़ा का एक दूत, ‘नगाड़ा’, यज्ञ की पवित्र अग्नि में हड्डियाँ डालकर उसे अपवित्र कर देता है।

क्या तौसी इन राक्षसी शक्तियों का सामना कर पाएगा? क्या वह अपनी पत्नी की इच्छा पूरी करके चक्षुभेदी मणि हासिल कर सकेगा? और क्या इस यात्रा के दौरान उसका सामना उस ‘दयालु’ रूप से होगा या ‘विनाशकारी’ तौसी से — यह सब इस कहानी को आगे और भी दिलचस्प बना देता है।

नायक, खलनायक और सहायक किरदार

इस कॉमिक्स में तौसी का किरदार कई रूपों में सामने आता है। वह एक आदर्श राजा है, जो अपने राज्य और प्रजा के लिए पूरी तरह समर्पित है। वह एक प्यार करने वाला पति भी है, जो अपनी पत्नी की एक मुस्कान के लिए किसी भी खतरे का सामना कर सकता है। और सबसे बढ़कर, वह एक ऐसा नायक है जो धर्म और न्याय के रास्ते पर चलता है — चाहे इसके लिए उसे खुद मुश्किल रास्ता क्यों न अपनाना पड़े।
उसकी “दयालुता” उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

अप्सरा इस कहानी की भावनात्मक धुरी है। वह सिर्फ एक रानी नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली इच्छाधारी नागिन है। उसका दर्द और उसकी इच्छा ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। अप्सरा ही तौसी की प्रेरणा है, वही वजह है कि तौसी अपने जीवन की सबसे कठिन यात्रा पर निकलता है।

नागबाबा इस कहानी के “गाइड” या “मेंटोर” हैं। वे ज्ञान और अनुभव से भरे हुए हैं और कहानी के रहस्यों को उजागर करते हैं, जिससे पूरी कथा को गहराई मिलती है।

सिंगाड़ा, कहानी का असली खलनायक है — परंपरागत, लेकिन यादगार। उसका उद्देश्य सिर्फ विनाश फैलाना और धर्म के कामों में बाधा डालना है। उसकी ताकत, क्रूरता और विशाल सेना उसे तौसी के लिए एक योग्य दुश्मन बना देती है।

कला और चित्रांकन

इस कॉमिक्स की कला का श्रेय राही कदम और दर्शना थिगले को जाता है। उनका चित्रांकन उस दौर की तुलसी कॉमिक्स की खास पहचान लिए हुए है। रेखाएँ मोटी और साफ हैं, जिससे एक्शन वाले सीन बेहद ज़िंदादिल लगते हैं। पात्रों के चेहरे के भाव बेहद सटीक और असरदार हैं — तौसी की आँखों में झलकता तेज़, उसका शाही अंदाज़, और सिंगाड़ा की डरावनी शक्ल — सब कुछ याद रह जाने लायक है।

रंगों का इस्तेमाल भी बहुत दिलचस्प है। उस वक्त कॉमिक्स में चमकीले और मुख्य रंगों का ज़्यादा इस्तेमाल होता था, जो आज के डिजिटल ज़माने के हिसाब से थोड़ा कच्चा लग सकता है, लेकिन यही चीज़ उन पुरानी कॉमिक्स को उनका असली आकर्षण देती है।
एक्शन दृश्यों में ‘धड़ाम’, ‘क्रैक’, ‘सड़ाक’ जैसे शब्दों का शानदार इस्तेमाल हुआ है, जो हर लड़ाई को ज़िंदा बना देता है।
पैनलों की बनावट सीधी और साफ-सुथरी है, जिससे कहानी को समझना बहुत आसान हो जाता है। कुल मिलाकर, आर्टवर्क कहानी के मूड को बिल्कुल सही तरीके से पेश करता है और पाठक को तौसी की उस रहस्यमयी दुनिया में खींच ले जाता है।

लेखन और संवाद: शुद्ध हिंदी की मिठास

इस कॉमिक्स की असली जान है इसका लेखन, जिसे रितुराज ने लिखा है।
उनकी भाषा शुद्ध और साहित्यिक है — जो आज की बोलचाल वाली कॉमिक्स से बिल्कुल अलग और ताज़गीभरी लगती है।
‘प्राणनाथ’, ‘वत्स’, ‘यज्ञाग्नि’, ‘दुष्ट’, ‘तपस्या’ जैसे शब्द कहानी को एक पौराणिक और गंभीर माहौल देते हैं। संवाद छोटे हैं, लेकिन गहरे और किरदारों की शख्सियत के बिल्कुल अनुरूप हैं।

कहानी की रफ्तार तेज़ है — शुरुआत में भावनात्मक और पारिवारिक माहौल है, फिर कहानी एक्शन और रोमांच की दिशा में मुड़ जाती है। ये उतार-चढ़ाव इसे एक दिलचस्प सफर बना देते हैं जो अंत तक बांधे रखता है।

कर्तव्य और करुणा का सबक

‘दयावान तौसी’ सिर्फ एक्शन और एडवेंचर से भरी कॉमिक्स नहीं है, बल्कि इसमें गहरे नैतिक संदेश भी हैं। कहानी दिखाती है कि कर्तव्य सबसे ऊपर है — जैसा कि तौसी ने एक राजा और पति, दोनों रूपों में निभाया।
यह कॉमिक्स बताती है कि असली वीरता दूसरों की रक्षा में है, न कि अपनी ताकत दिखाने में।
तौसी की पत्नी के लिए कठिन यात्रा और अप्सरा का अपने बेटे से दूर रहना — दोनों प्रेम में छिपे त्याग को बखूबी दिखाते हैं।
अंत में कहानी धर्म की विजय के साथ यह संदेश देती है कि अच्छे और बुरे के बीच चलने वाली जंग में जीत हमेशा अच्छाई की ही होती है।

निष्कर्ष: एक यादगार और संग्रहणीय कॉमिक्स

‘दयावान तौसी’ तुलसी कॉमिक्स के सबसे बेहतरीन अंकों में गिनी जा सकती है। इसमें सब कुछ है — भावनाएं, रहस्य, रोमांच, एक्शन और एक सशक्त संदेश।
यह कहानी हमें उस सुनहरे दौर में ले जाती है जब कॉमिक्स सीधी-सादी लेकिन असरदार होती थीं, और नायक सिर्फ ताकतवर नहीं, बल्कि सिद्धांतों वाले भी होते थे।

यह कॉमिक्स पुराने प्रशंसकों के लिए एक nostalgic trip है और नई पीढ़ी के लिए यह दिखाने का बढ़िया ज़रिया कि भारतीय कॉमिक्स की जड़ें कितनी समृद्ध और गहरी हैं।
अगर आप भारतीय सुपरहीरो कहानियों और पौराणिक तत्वों के फैन हैं, तो ‘दयावान तौसी’ ज़रूर पढ़िए।
यह कहानी हमें याद दिलाती है कि एक सच्चे नायक की पहचान उसकी अलौकिक शक्तियों से नहीं, बल्कि उसके दयालु दिल से होती है।

जिसमें पुरानी भारतीय कॉमिक्स का असली आकर्षण और नैतिक गहराई झलकती है। तुलसी कॉमिक्स की यह कहानी तौसी जैसे पौराणिक नायक की इंसानियत
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