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Home » मास्टर, कटरी, शूटर और कंप्यूटर की साहसिक कहानी: फाइटर टोड्स ‘कैलेंडर’ कॉमिक्स का रोमांच
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मास्टर, कटरी, शूटर और कंप्यूटर की साहसिक कहानी: फाइटर टोड्स ‘कैलेंडर’ कॉमिक्स का रोमांच

राजनगर के गटर से लेकर बैंक और ज्वेलरी शॉप तक, फाइटर टोड्स ने दिखाया साहस, टीमवर्क और हास्य का अनोखा संगम।
ComicsBioBy ComicsBio27 March 202607 Mins Read
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फाइटर टोड्स कैलेंडर कॉमिक्स रिव्यू | मास्टर, कटरी, शूटर और कंप्यूटर का साहसिक एडवेंचर
‘कैलेंडर’ कॉमिक्स में मास्टर, कटरी, शूटर और कंप्यूटर की टीम राजनगर को बचाने निकलती है, जहां सम्मोहन, हास्य और सस्पेंस का मजेदार संगम है।
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मास्टर, कटरी, शूटर और कंप्यूटर—ये चार जांबाज किरदार शहर के सीवर यानी गटर को अपना मुख्यालय बना चुके थे और वहीं से राजनगर की सुरक्षा संभालते थे। ‘कैलेंडर’ कॉमिक्स इसी सीरीज की एक अनमोल कड़ी है, जिसने बच्चों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

फाइटर टोड्स का कॉन्सेप्ट भले ही विदेशी कहानियों से लिया गया था, लेकिन उनके संवाद, हास्य और लड़ने का अंदाज पूरी तरह भारतीय मिट्टी में रचा-बसा था। यह कहानी हमें उस समय की याद दिलाती है, जब मोबाइल और इंटरनेट नहीं थे और ये रंगीन पन्ने हमारे सबसे अच्छे दोस्त हुआ करते थे।

कौन है यह सनकी ‘कैलेंडर‘?

किसी भी कहानी की महानता उसके नायक से नहीं, बल्कि खलनायक की क्रूरता और चालाकी से मापी जाती है। ‘कैलेंडर’ राज कॉमिक्स के सबसे विचित्र और खतरनाक विलेन्स में से एक है।

उसका रूप भले ही चलते-फिरते कैलेंडर जैसा हो और शरीर पर तारीखें अंकित हों, लेकिन असली ताकत उसकी मानसिक क्षमताओं में है। कैलेंडर के पास ‘धूं-धूं’ किरणें छोड़ने वाली मशीन और सम्मोहन की कला है। वह साधारण अपराधी नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक अपराधी है, जो सीधे लोगों के दिमाग पर वार करता है।

उसकी सबसे डरावनी चाल यह थी कि वह अपनी किरणों से किसी को यह विश्वास दिला देता कि कैलेंडर ही उसका ‘बाप’ है। यह सुनने में रोमांचक लगता है, लेकिन कहानी में यह अत्यंत भयावह स्थिति पैदा करता है। जब जिम्मेदार लोग और सुरक्षाकर्मी ही अपराधी को पिता मानकर उसे सुरक्षा देने लगें, तो न्याय व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है। कैलेंडर इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पूरे राजनगर में आतंक फैलाता है।

सम्मोहन का खेल और 50 पैसे की जंग

इस कहानी का सबसे मजेदार और हास्यपूर्ण हिस्सा है ‘रसीला’। वह एक भोला-भाला टैक्सी ड्राइवर है, जिसकी अपनी मजेदार पहचान और तकियाकलाम है—”गोली चूस के”।

रसीला केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि आम आदमी की मासूमियत दिखाता है, जो अनजाने में अपराधियों की साजिशों में फंस जाता है। कहानी तब शुरू होती है जब कैलेंडर और साथी उसकी टैक्सी किराए पर लेते हैं। कैलेंडर अपनी किरणों से रसीला को सम्मोहित कर देता है, जिससे रसीला उसे अपना पिता मानने लगता है।

यहीं से शुरू होता है 50 पैसे का प्रसिद्ध विवाद, जिसने कॉमिक्स को यादगार बना दिया। किराए के मामूली पैसों पर बहस और रसीला का सम्मोहित होकर अपराधी की मदद करना कहानी में सस्पेंस और कॉमेडी का मिश्रण पैदा करता है। यह भ्रम रसीला को पुलिस की नजर में संदिग्ध अपराधी बना देता है और पाठकों को कैलेंडर की शक्तियों की घातकता का अहसास होता है।

ओ–लूटो बैंक की डकैती

कहानी का सबसे रोमांचक मोड़ तब आता है जब कैलेंडर ‘ओ-लूटो बैंक’ को अपने मिशन के लिए चुनता है। डकैती किसी गोलीबारी या धमाकों से नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह मानसिक हमला है।

कैलेंडर बैंक में पहुँचकर कैशियर पर अपनी किरणें छोड़ता है। कैशियर उसे अपना ‘बाप’ मानकर खुशी-खुशी बैंक का सारा पैसा दे देता है। यह दृश्य हैरान करने वाला है और फाइटर टोड्स के लिए बड़ी चुनौती पेश करता है।

जब बैंक का कर्मचारी अपराधी का साथ देने लगे, तो कानून के पास कोई सबूत नहीं बचता। यह अनोखी डकैती कैलेंडर के आत्मविश्वास को बढ़ा देती है और वह खुद को कानून से ऊपर समझने लगता है। यही वह मोड़ है जहाँ फाइटर टोड्स का असली मिशन शुरू होता है—अपराधी को पकड़ना और सम्मोहन से प्रभावित लोगों को बचाना।

मास्टर, कटरी, शूटर और कंप्यूटर: निंजा टर्टल्स का देसी अवतार?

कई बार फाइटर टोड्स की तुलना विदेशी किरदारों से होती है, लेकिन ‘कैलेंडर’ कॉमिक्स यह दिखाती है कि ये चार टोड्स बिल्कुल अलग और अद्वितीय हैं।

मास्टर टीम का लीडर और ताकत का प्रतीक है, जिनका एक मुक्का किसी भी अपराधी को हरा सकता है। कटरी अपनी तलवारबाजी और फुर्ती के लिए जाने जाते हैं। शूटर का निशाना कभी नहीं चूकता, और कंप्यूटर टीम का दिमाग है, जो बैकपैक स्क्रीन से दुश्मन की शक्तियों और फ्रीक्वेंसी का विश्लेषण करता है।

कहानी में जब कैलेंडर अपनी किरणें छोड़ता है, टोड्स पर इसका असर नहीं होता क्योंकि उनकी शारीरिक संरचना और दिमाग अलग है। यह वैज्ञानिक तर्क कहानी को नया मोड़ देता है और टोड्स को कैलेंडर के गढ़ में घुसकर लड़ने का मौका मिलता है। उनकी एकता और समर्पण ही उन्हें राजनगर का सच्चा रक्षक बनाता है।

दिलीप चौबे का जादुई आर्टवर्क

इस कॉमिक्स के विजुअल्स की बात किए बिना समीक्षा अधूरी है क्योंकि मशहूर चित्रकार दिलीप चौबे ने अपनी कूची से इस कहानी में जो जान फूंकी है, वह आज भी डिजिटल युग में बेमिसाल लगती है।

1997 में जब डिजिटल पेंटिंग और आधुनिक सॉफ्टवेयर इतने उन्नत नहीं थे, तब हाथ से बनाए गए ये चित्र अपनी जीवंतता से पाठकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे।

कैलेंडर के चेहरे की खास ‘साइकॉटिक स्माइल’ और उसकी आँखों में झलकता शैतानीपन पाठक के मन में डर पैदा करने के लिए काफी था।

फाइटर टोड्स के एक्शन सीन्स की गतिशीलता और राजनगर की व्यस्त गलियों से लेकर बैंक के इंटीरियर की बारीक डिटेल्स यह दिखाती हैं कि हर पैनल कितनी मेहनत और कलात्मकता से बनाया गया था।

रंगों का गहरा और असरदार संयोजन सीधे आपके मस्तिष्क पर वैसा ही असर डालता है, जैसा कैलेंडर की किरणें करती थीं। हर पेज पलटते समय ऐसा लगता है जैसे आप खुद उस एडवेंचर का हिस्सा हैं, और यह दिलीप चौबे की महान कला ही है।

एक्शन, कॉमेडी और इमोशन्स का डेडली कॉम्बिनेशन

आज के समय में जब हॉलीवुड सुपरहीरो ओटीटी और सिनेमाघरों पर राज कर रहे हैं, तब भी ‘कैलेंडर’ की लोकप्रियता कम नहीं हुई।

सबसे बड़ा कारण है ‘नॉस्टेल्जिया’ और कहानी कहने का सीधा-साधा लेकिन असरदार तरीका।

इंटरनेट पर आज भी लोग ‘Raj Comics PDF’ या ‘Fighter Toads Reviews’ सर्च करते हैं। यह कॉमिक्स हमें बचपन की मासूम यादों में वापस ले जाती है।

कहानी केवल डकैती और लड़ाई की नहीं है, बल्कि यह गलतफहमी, सम्मोहन और फिर सच्चाई की जीत की कहानी है।

रसीला जैसे हास्य पात्र और टोड्स का समाज के लिए समर्पण गहरा भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है। लेखक ने सामाजिक व्यवहार और मानवीय कमजोरियों को सुपरहीरो फैंटेसी के साथ जोड़कर इसे आज भी मनोरंजक बनाया है।

गटर की दुनिया से ज्वेलरी शॉप तक

कहानी का चरमोत्कर्ष तब आता है जब कैलेंडर ‘सोना ज्वेलर्स’ तक अपनी डकैती का दायरा बढ़ाता है।

यहां भी वह अपनी सम्मोहन शक्ति से भारी मात्रा में सोना लूटने की योजना बनाता है। फाइटर टोड्स उसका पीछा करते हुए उसके गुप्त अड्डे तक पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें गहरे कुएं में कैद कर दिया जाता है।

यहां टोड्स की सूझबूझ और टीमवर्क की असली परीक्षा होती है। अपनी तकनीक और शारीरिक क्षमता से वे न केवल जाल से बाहर निकलते हैं, बल्कि कैलेंडर की ‘धूं-धूं’ किरणों वाली मशीन को भी तहस-नहस कर देते हैं।

अंतिम लड़ाई इतनी रोमांचक होती है कि पाठक अपनी सांसें थाम लेता है। मास्टर के मुक्के, कटरी की तलवार और शूटर के अचूक बाणों के सामने कैलेंडर का साम्राज्य ढह जाता है।

अंत में रसीला का सम्मोहन टूटता है और निर्दोष लोगों को न्याय मिलता है। यह सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी चालाक और आधुनिक हो, साहस और सच्चाई के सामने उसे झुकना ही पड़ता है।

निष्कर्ष: क्या आधुनिक सुपरहीरो फिल्मों में भी ‘कैलेंडर‘ चमकता है?

‘कैलेंडर’ केवल कॉमिक्स नहीं, बल्कि भारतीय पॉप-कल्चर का ऐतिहासिक दस्तावेज है। इसमें है—एक यादगार विलेन, जांबाज और अनोखे नायक, बेहतरीन संवाद और दिल को छू लेने वाली कला। आज भी यह कहानी उतनी ही ताजी और मजेदार लगती है जितनी 1997 में थी।

यदि आप बचपन की यादें ताज़ा करना चाहते हैं या भारतीय कॉमिक्स की ताकत देखना चाहते हैं, तो ‘कैलेंडर’ पढ़ना जरूरी है।यह हमें याद दिलाती है कि हमारे पास भी ऐसे नायक और कहानियाँ थीं, जो विश्व स्तर की रचनात्मकता से मुकाबला कर सकती थीं। कैलेंडर’ राज कॉमिक्स के सुनहरे दौर का चमकता सितारा है, जिसकी रोशनी कभी फीकी नहीं पड़ेगी।

 

कटरी जो राजनगर के गटर से लेकर बैंक और ज्वेलरी शॉप तक फैला है। टीमवर्क फाइटर टोड्स कैलेंडर कॉमिक्स में मास्टर शूटर और कंप्यूटर की टीम का साहस हास्य और सम्मोहन से भरा रोमांच
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