राज कॉमिक्स की ‘नागायण’ सीरीज़ सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय कॉमिक्स की दुनिया की वह बड़ी कृति है जिसे सही मायनों में मैग्नम ओपस कहा जा सकता है। यह वही सीरीज़ है जिसने यह साबित कर दिया कि भारतीय कॉमिक्स भी कहानी कहने के मामले में किसी से कम नहीं हैं। संजय गुप्ता की कल्पना और अनुपम सिन्हा की शानदार लेखनी व दमदार चित्रांकन से बनी यह सीरीज़, रामायण के महान कथानक को साल 2025 की एक काल्पनिक, हाई-टेक और काफी डार्क दुनिया में ले जाती है। पहले पाँच भाग— वरण, ग्रहण, हरण, शरण और दहन—पाठकों को लगातार बाँधे रखने के बाद, अब छठा भाग ‘रण काण्ड’ सामने आता है।
नाम से ही साफ है कि ‘रण काण्ड’ युद्ध का वह दौर है जहाँ अब कोई चालें या प्लानिंग काम नहीं आती, बल्कि आमने-सामने का भयानक टकराव शुरू हो जाता है। यह 84 पन्नों का स्पेशल अंक सिर्फ सुपरहीरो एक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बलिदान, रिश्तों की वफादारी, छुपे हुए पारिवारिक सच और एक नायक के टूटने व फिर से खड़े होने की बेहद भावुक कहानी भी है।
कथानक की विस्तृत रूपरेखा (Detailed Plot Summary)
‘रण काण्ड’ की कहानी वहीं से आगे बढ़ती है जहाँ ‘दहन काण्ड’ ने पाठकों को एक बड़े सस्पेंस में छोड़ दिया था। पूरी कहानी को पाँच मुख्य अध्यायों में बाँटा गया है— अग्नि परीक्षा, भूमिका, घात–प्रतिघात, ममी और दहन।

अध्याय 1: अग्नि परीक्षा (The Trial by Fire)
कहानी की शुरुआत अलंध्या के बाहरी इलाकों में चल रहे एक भयानक युद्ध से होती है। नागराज अब पूरी तरह ‘ब्लैक नागराज’ बन चुका है। उसकी अपनी चेतना खत्म हो चुकी है और वह पूरी तरह क्रूरपाशा (नागपाशा) के नियंत्रण में है। हालात यहाँ तक पहुँच जाते हैं कि नागराज अपने ही साथियों और पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। दूसरी ओर, सुपर कमांडो ध्रुव अपनी सेना के साथ मोर्चे पर डटा हुआ है। कॉमिक का कवर पेज ही रोंगटे खड़े कर देता है, जहाँ ध्रुव के शरीर के आर-पार एक तीर (या गदा जैसा हथियार) दिखाई देता है और नागराज दर्द में विलाप करता नजर आता है। यह दृश्य सीधे रामायण के उस पल की याद दिलाता है जब लक्ष्मण को शक्ति लगती है और राम टूट जाते हैं।
अध्याय 2: भूमिका (The Premise)
इस अध्याय में विज्ञान और रणनीति का कमाल देखने को मिलता है। ध्रुव अपनी तेज दिमागी ताकत दिखाते हुए ड्राई आइस यानी ठोस कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल करता है और उन बादलों को बरसा देता है जो काली शक्तियों को फैलाने का काम कर रहे थे। यह हिस्सा साफ दिखाता है कि ध्रुव बिना किसी सुपरपावर के भी सिर्फ विज्ञान और समझदारी के दम पर बड़े से बड़े खतरे का सामना कर सकता है। यहीं पर देवाशीष की एंट्री होती है, जो देव-विज्ञान से बना एक रोबोटिक योद्धा है और कहानी में नया रोमांच जोड़ देता है।

अध्याय 3: घात–प्रतिघात (The Counter-Strike)
महानगर यानी अंडरग्राउंड सिटी में ग्रैंड मास्टर रोबो और नताशा पूरी तरह आतंक मचा चुके हैं। वे शहर की हवा और पानी की सप्लाई रोक देते हैं, जिससे आम लोग मजबूर हो जाते हैं। यहाँ ब्लैक टर्मिनेटर्स और रोबो के गुंडों के बीच जबरदस्त और खून-खराबे वाला संघर्ष देखने को मिलता है। इसी दौरान ध्रुव के बेटे ऋषि और नताशा के बीच का भावनात्मक तनाव कहानी को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रहने देता, बल्कि उसमें इंसानी एहसास भी भर देता है।
अध्याय 4: ममी (The Identity Reveal)
यह अध्याय पूरी कॉमिक का सबसे बड़ा झटका है। एक रहस्यमयी ममी, जो कई अंकों से पट्टियों में लिपटी हुई नजर आ रही थी, आखिरकार अपनी असली पहचान सामने लाती है। लड़ाई के दौरान जब उसकी पट्टियाँ खुलती हैं और एक लॉकेट दिखाई देता है, तब खुलासा होता है कि यह ममी कोई और नहीं बल्कि श्वेता, यानी ध्रुव की बहन है। पाठकों के लिए यह किसी शॉक से कम नहीं था, क्योंकि श्वेता को अब तक मरा हुआ माना जा रहा था। यहाँ पता चलता है कि कार एक्सीडेंट में उसकी मौत नहीं हुई थी, बल्कि रोबो उसे उठा ले गया था और अपनी प्रयोगशाला में उसे एक खतरनाक किलिंग मशीन में बदल दिया था।
अध्याय 5: दहन (The Incineration)
आखिरी अध्याय में भावनाओं और ताकतों का चरम रूप देखने को मिलता है। भारती, जो नागराज की पत्नी है, अपनी जान की परवाह किए बिना ‘साकार–आकार’ नाम का जादुई तिलिस्मी रूप धारण करती है, ताकि नागराज को अलंध्या के उस आयाम तक पहुँचाया जा सके जहाँ विसर्पी कैद है। भारती का यह बलिदान पूरी नागायण सीरीज़ के सबसे दुखद और दिल को छू लेने वाले पलों में से एक है। अंत में, नागराज अपने गुस्से और गहरे दुःख में आकर अलंध्या के आयाम को भौतिक दुनिया में खींच लाता है, जिससे पूरी पृथ्वी पर प्रलय जैसी स्थिति बन जाती है।
पात्रों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (Character Deep Dive)

नागराज: मर्यादा और अंधकार के बीच
‘रण काण्ड’ में नागराज अपने जीवन के सबसे कठिन और अंधेरे दौर से गुजरता नजर आता है। ‘ब्लैक पावर्स’ के असर में वह कई बार एक खलनायक जैसा व्यवहार करता है, लेकिन उसके भीतर का नागराज अब भी जिंदा है और लगातार अपनी मर्यादाओं से जूझ रहा है। जब उसे होश आता है और वह ध्रुव को मरणासन्न हालत में देखता है, तो उसका टूटकर रोना यह साफ दिखाता है कि उसके अंदर इंसानियत अभी खत्म नहीं हुई है। वह एक ऐसा ईश्वर तुल्य नायक है, जो अपनी अपार शक्तियों के बोझ तले दबा हुआ है और उसी बोझ के कारण सबसे ज्यादा पीड़ा झेल रहा है।
सुपर कमांडो ध्रुव: अडिग वफादारी
इस पूरी श्रृंखला में ध्रुव एक सच्चे नायक के रूप में उभरकर सामने आता है। उसके पास न नागराज जैसी अलौकिक शक्तियाँ हैं और न ही क्रूरपाशा जैसा काला जादू, लेकिन उसके पास सबसे बड़ी ताकत है—उसकी इच्छाशक्ति। पत्नी नताशा द्वारा छोड़े जाने का दर्द हो या अपनी बहन श्वेता को एक ममी के रूप में वापस पाना, ध्रुव हर हाल में खुद को संभाले रखता है। हालात चाहे जितने भी कठिन हों, वह सही और गलत के बीच का फर्क नहीं भूलता। उसका शांत लेकिन तेज रणनीतिक दिमाग ही आखिरकार नागराज को अंधकार से बाहर आने का रास्ता दिखाता है।

भारती: प्रेम और बलिदान की पराकाष्ठा
अक्सर कॉमिक्स में नायकों की पत्नियों को सिर्फ ‘संकट में फंसी महिला’ के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन भारती का किरदार इस सोच को पूरी तरह तोड़ देता है। वह सिर्फ नागराज की पत्नी नहीं, बल्कि एक मजबूत योद्धा के रूप में सामने आती है। वह यह सच्चाई जानती है कि नागराज का असली प्रेम विसर्पी है, फिर भी वह अपने पति के मिशन और दुनिया को बचाने के लिए खुद को ‘दहन’ के लिए तैयार कर देती है। भारती का बलिदान भारतीय नारी के त्याग, साहस और आंतरिक शक्ति का आधुनिक रूपक बन जाता है।
ग्रैंड मास्टर रोबो और नताशा: विवशता और क्रूरता
ग्रैंड मास्टर रोबो इस अंक में एक बार फिर अपनी पुरानी, निर्दयी छवि में लौट आता है। अपने मकसद के लिए वह अपनी बेटी नताशा और अपने पोते ऋषि तक को मोहरे की तरह इस्तेमाल करने से नहीं चूकता। वहीं नताशा का आंतरिक संघर्ष इस कहानी को और गहरा बना देता है। एक तरफ उसका पिता है और दूसरी तरफ उसका पति, बेटा और उसकी अपनी नैतिकता। यही द्वंद्व नताशा को पूरी श्रृंखला का सबसे जटिल और मानवीय पात्र बना देता है।
चित्रांकन और दृश्य भाषा (Artistic and Visual Brilliance)

अनुपम सिन्हा को भारतीय कॉमिक्स का ‘लियोनार्डो द विंची’ कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा, क्योंकि ‘रण काण्ड’ में उनका कला-कौशल अपने शिखर पर दिखाई देता है। यतियों और नाग सेना के बीच होने वाले युद्ध दृश्य इतने विस्तार से रचे गए हैं कि हर वार और हर टकराव को पाठक महसूस कर सकता है। पन्नों का आधुनिक लेआउट ऐसा है कि कई बार पात्र पैनलों की सीमाओं से बाहर निकलते हुए प्रतीत होते हैं। नागराज के विलाप या ध्रुव द्वारा श्वेता को पहचानने जैसे भावनात्मक दृश्यों में चेहरे की बारीक रेखाएँ और आँखों की नमी सीधे दिल को छू जाती है। तकनीकी स्तर पर 2025 के महानगर, गादड़ यान और ‘ब्लैक एनर्जी’ का चित्रण विज्ञान और कल्पना का बेहतरीन मेल है। सुनील कुमार पाण्डेय का रंग संयोजन युद्ध के दृश्यों की लाल आक्रामकता और भविष्यवादी शहरों की ठंडी, धात्विक नीली आभा के जरिए कहानी के मूड को और मजबूत बना देता है।
पौराणिक और वैज्ञानिक संगम (Thematic Analysis)

‘नागायण’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी गहराई भरी थीम है, जो रामायण के अमर पात्रों और घटनाओं को आधुनिक संदर्भों में बेहद समझदारी से पेश करती है। जैसे रामायण में ‘शक्ति’ लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं और युद्ध की दिशा बदल जाती है, वैसे ही यहाँ क्रूरपाशा के ‘ब्लैक वेपन्स’ वही घातक असर दिखाते हैं। ‘यतिराज जिंगालू’ अपनी अपार शक्ति और बुद्धि के साथ हनुमान जी की याद दिलाता है और संकट के समय नागराज का सहारा बनता है। यह श्रृंखला सिर्फ एक सुपरहीरो कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान और प्रकृति के टकराव को भी सामने लाती है। अंडरग्राउंड सिटीज जैसी आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति, मानवीय लालच और उसके जवाब में प्रकृति के प्रकोप जैसे सवाल इस कथा को और भी गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाला बना देते हैं।
संपादन और प्रस्तुति (Editing and Presentation)

संपादक संजय गुप्ता ने ‘ग्रीन पेज’ में दिल से अपनी बात रखी है। वे खुलकर मानते हैं कि इतनी बड़ी और जटिल श्रृंखला में निरंतरता बनाए रखना और हर अंक को समय पर प्रकाशित करना आसान काम नहीं था। ‘रण काण्ड’ की गुणवत्ता देखकर साफ समझ आता है कि राज कॉमिक्स की पूरी टीम ने इस प्रोजेक्ट पर सच में दिन-रात मेहनत की है और अपना पूरा दम लगा दिया है।
कॉमिक्स के अंत में दिए गए विज्ञापन—जैसे ‘डोगा हाय हाय’, ‘प्रेम हिरण’ (कोबी-भेड़िया) और ‘परमात्मा’ (परमाणु)—उस सुनहरे दौर की याद दिला देते हैं जब राज कॉमिक्स अपने शिखर पर हुआ करता था। वहीं ‘इति काण्ड’ के लिए 128 पन्नों का जो वादा किया गया है, वह हर पाठक के मन में उत्सुकता को और भी ज्यादा बढ़ा देता है और इंतज़ार को मुश्किल बना देता है।
समीक्षा के मुख्य बिंदु: सबल और निर्बल पक्ष

सबल पक्ष (Strengths):
कहानी में श्वेता का चौंकाने वाला खुलासा और भारती का बलिदान ऐसा सस्पेंस पैदा करता है जो पाठक को भीतर तक झकझोर देता है। मशीनों, विज्ञान और जादुई हथियारों की लड़ाई के बीच पिता-पुत्र, भाई-बहन और पति-पत्नी जैसे रिश्तों की भावनात्मक गहराई कहानी को एक नया स्तर देती है। यही वजह है कि एक्शन और इमोशन का संतुलन यहाँ बेहद शानदार बन पड़ा है। अनुपम सिन्हा का कला-कौशल इतना दमदार है कि यह कॉमिक अंतरराष्ट्रीय स्तर की मार्वल या डीसी कॉमिक्स के साथ खड़ी नजर आती है। इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग और आतंकवाद जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी कहानी के ताने-बाने में बड़ी सहजता से पिरोया गया है।
निर्बल पक्ष (Weaknesses):
‘रण काण्ड’ का दायरा इतना बड़ा है कि अगर किसी पाठक ने इसके पहले के पाँच भाग नहीं पढ़े हैं, तो उसके लिए पात्रों की गहराई और उनके उद्देश्यों को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। कहानी बहुत फैलाव लिए हुए है, जिसके कारण कई बार इसके अलग-अलग उप-कथानक मुख्य कहानी की रफ्तार को धीमा कर देते हैं। नए पाठकों के लिए यह सब जोड़कर समझ पाना और कहानी से जुड़े रहना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निष्कर्ष और रेटिंग

‘नागायण: रण काण्ड’ सिर्फ एक कॉमिक बुक नहीं है, बल्कि यह साहस, त्याग और सच्ची मित्रता का एक बड़ा उत्सव है। यह हमें यह बात सिखाती है कि चाहे अंधकार और काली शक्तियाँ कितनी ही मजबूत क्यों न हों, सच और प्रेम की एक छोटी सी लौ—जैसे भारती का बलिदान और ध्रुव की समझदारी—उन्हें खत्म करने की ताकत रखती है।
यह अंक पूरी श्रृंखला का सबसे ज्यादा दांव वाला, यानी सबसे हाई–स्टेक, अध्याय है। कहानी ऐसे मोड़ पर आकर रुकती है जहाँ से अब पीछे लौटने का कोई रास्ता नहीं बचता। भारती इस दुनिया से जा चुकी है, श्वेता वापस तो आई है लेकिन एक बिल्कुल अलग रूप में, नागराज ने आयामों की सीमाएँ तोड़ दी हैं और अब आखिरी फैसला होना बाकी है।
अंतिम रेटिंग: 5/5 (मास्टरपीस)
अगर आप भारतीय कॉमिक्स के प्रशंसक हैं और आपने अभी तक ‘नागायण’ नहीं पढ़ी है, तो यकीन मानिए आपने भारतीय कॉमिक्स इतिहास के एक बेहद गौरवशाली अध्याय को मिस कर दिया है। ‘रण काण्ड’ को पढ़ना एक ऐसा अनुभव है जो आपके दिमाग में कई हफ्तों तक घूमता रहेगा। अब बस इंतज़ार है ‘समर काण्ड’ और ‘इति काण्ड’ का, जहाँ इस महागाथा का अंतिम और निर्णायक अध्याय लिखा जाएगा।
