राज कॉमिक्स के महानायक नागराज की दुनिया में दुश्मनों की एक लंबी सूची है, जिसमें विज्ञान और तंत्र का अनोखा मेल दिखता है। प्रोफेसर नागमणि नागराज का ‘निर्माता’ और सबसे बड़ा मानसिक शत्रु है, जिसने उसे एक हथियार के रूप में विकसित किया। वहीं, मिस किलर और सुप्रीम हेड जैसे विलेन आधुनिक तकनीक, हाई-टेक गैजेट्स और अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट के दम पर नागराज को चुनौती देते हैं।
तांत्रिक और पौराणिक शक्तियों की बात करें तो नगीना, नागपाशा, विषंधर और गरलगंट प्रमुख हैं। नगीना अपनी तांत्रिक विद्या से, तो नागपाशा अपनी अमरता और छल से नागराज के अस्तित्व को मिटाना चाहते हैं। शाकूरा और तूतेन-खामेन जैसे दुश्मन जादू और प्राचीन रहस्यों के जरिए भ्रम पैदा करते हैं।
शारीरिक शक्ति में थोडांगा और नागदंत (नागराज का क्लोन/प्रतिरूप) सबसे घातक साबित हुए हैं। इसके अलावा जुलू, करणवशी और सी-थ्रू जैसे खलनायक मानसिक नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रयोगों के माध्यम से नागराज की इच्छाधारी शक्तियों पर प्रहार करते हैं। ये सभी खलनायक मिलकर नागराज की वीरता और बुद्धिमत्ता की समय-समय पर परीक्षा लेते रहते हैं।
आज हम नागराज के 20 मुख्य खलनायक की लिस्ट लायें है इनमे से आपका कौन है कमेंट में जरूर बताईयेगा
प्रोफेसर नागमणि

राज कॉमिक्स की दुनिया में प्रोफेसर कौटिल्य नाग मणि एक ऐसा नाम है, जिसने लालच और विज्ञान को मिलाकर इंसानियत का सबसे खतरनाक हथियार बनाया। नाग मणि का कहना है कि वही ‘नागराज’ का असली बनाने वाला है और वही उसका अंत भी कर सकता है।
हालांकि बाबा गोरखनाथ ने नागराज को आज़ाद करवा दिया, लेकिन नाग मणि ने हार नहीं मानी। उसने नागराज के डीएनए का इस्तेमाल करके ‘फेंग’ और ‘नागदंत’ जैसे दुश्मन तैयार किए। वह एक बहुत चालाक दिमाग है, जो ‘इच्छाधारी नागराज’ और ‘नगीना का जाल’ जैसी कहानियों में मौत को हराकर वापस लौट आता है। उसकी क्रूरता का अंदाजा इसी से लगता है कि उसने नागराज को लकवा मारने के लिए चार खतरनाक जहरों का मिश्रण बनाया और ‘किंग कोबरा’ जैसे अपराधियों से हाथ मिला लिया।
नाग मणि सिर्फ एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि सांपों को कंट्रोल करने की विद्या में भी माहिर है। “नर्कनाशक नागराज” सीरीज़ में उसके किरदार के नए राज सामने आते हैं। आखिर में अपने घमंड और चालों में फंसकर वह नागराज और नगीना के हाथों हार जाता है। नाग मणि का किरदार यह दिखाता है कि अगर बनाने वाला ही चालाक और बुरा हो, तो वह अपने ही बनाए हुए से खत्म हो जाता है।
मिस किलर

मिस किलर (मिस हिरोशिमा), राज कॉमिक्स की दुनिया में नागराज की सबसे पुरानी, चालाक और खतरनाक दुश्मनों में से एक है, जिसे ‘अपराध की दुनिया की रानी’ कहा जाता है। वह स्वभाव से बहुत क्रूर, घमंडी और तकनीक में माहिर एक जीनियस वैज्ञानिक है। उसकी पहचान उसके मॉडर्न लुक से है, जिसमें वह नीले बॉडीसूट, मेटल कवच और लंबे केप के साथ हाई-टेक गैजेट्स का इस्तेमाल करती है। अपने मजबूत ‘किलर फोर्ट’ से काम करने वाली मिस किलर लेजर गन और उड़ने वाली मशीनें बनाने में माहिर है।
उसकी बुराई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने ‘मेमोरी ट्रांसफर गैजेट’ से नागराज की याददाश्त चुराने से लेकर, उसके शरीर के कणों से एक ताकतवर क्लोन बनाने और राजनगर जैसे शहरों में तेजाबी बारिश करवाने जैसी साजिशें रची हैं। वह सिर्फ जापान की बड़ी अपराधी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के अपराधियों को आधुनिक हथियार देने वाली सप्लायर भी है।
मिस किलर की सबसे बड़ी ताकत उसकी कभी हार न मानने वाली सोच है। जहां दूसरे खलनायक खुद को मजबूत बनाते हैं, वहीं वह नागराज की ताकत को ही निशाना बनाती है। ‘नाग न्याय की अदालत’ (नागाधीश) में नागराज को फंसाना या उसकी ताकत छीनकर उसे कमजोर करना उसकी चालाकी दिखाता है। वह नागदंत, नागिना और नागपाशा जैसे दुश्मनों के साथ मिलकर नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव के लिए बार-बार नई मुश्किलें खड़ी करती है। उसका आखिरी लक्ष्य नागराज की ‘इच्छाधारी शक्ति’ और खजाने को पाकर पूरी दुनिया पर राज करना है। ‘नागराज का अंत’ और ‘शक्तिहीन नागराज’ जैसी कॉमिक्स उसके खतरनाक इरादों को दिखाती हैं।
थोडांगा

तंजानिया के घने जंगलों का बेताज बादशाह थोडांगा, राज कॉमिक्स के इतिहास का एक ऐसा निडर और क्रूर खलनायक है जिसे ‘मिस किलर’ जैसे खतरनाक दुश्मनों की श्रेणी में सबसे ऊपर रखा जाता है। वह जंगल का सबसे हिंसक शासक माना जाता है, जो हाथियों को इतनी आसानी से मार देता है जैसे कोई भेड़-बकरियों को। उसकी ‘थोडांगा घाटी’ में कोई भी हाथी जिंदा नहीं बचता क्योंकि उसे रोज एक हाथी का मांस चाहिए होता है। शारीरिक रूप से एक विशाल दानव जैसा दिखने वाले थोडांगा की खाल गेंडे जैसी मोटी है, जिस पर आम हथियारों या जहर का कोई असर नहीं होता। उसके शरीर पर चाँद-सितारों के निशान हैं और वह अपनी ‘कछुआ तकनीक’ से सिर को सीने में समेटकर हमलों से बच सकता है।
थोडांगा की कहानी ‘ताजमहल की चोरी’ से शुरू हुई, लेकिन उसे असली पहचान ‘नागराज और थोडांगा’ में मिली। वह डॉ. विषाणु जैसे अपराधियों के साथ मिलकर इलु-इलु मच्छरों के जरिए बीमारी फैलाने जैसी साजिशें करता था। नागराज के साथ एक भयंकर लड़ाई में थोडांगा के शरीर के दो टुकड़े हो गए थे, लेकिन पाठकों के बीच उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसे ‘काली मौत’ और ‘प्रेत अंकल’ जैसी कॉमिक्स में दोबारा जिंदा किया गया।
पुनर्जन्म के बाद वह एक ‘प्रेत कमांडर’ बना जिसके पास चुंबकीय शक्तियां थीं। अंत में नागराज ने ‘जरासंध’ वध की तकनीक अपनाते हुए उसके अंगों को उल्टी दिशाओं में फेंककर उसका अंत किया। हाल ही में वह ‘क्षतिपूर्ति सीरीज़’ में और भी ज्यादा विशाल और खतरनाक रूप में वापस आया है, जहाँ वह एक खास बीमारी से पीड़ित है और एक बार फिर नागराज की विरासत को चुनौती दे रहा है।
नागदंत

नागदंत, राज कॉमिक्स के ब्रह्मांड में नागराज का एक बहुत शक्तिशाली और खतरनाक रूप है। इसकी शुरुआत की कहानी प्रोफेसर नागमणि की चालाक सोच से जुड़ी है। शुरू में नागदंत को नागराज की तरह ही नागमणि की रचना माना जाता था, लेकिन बाद में पता चला कि नागदंत का असली नाम ‘फंग’ था। वह एक ऐसे अनोखे समुदाय से था जहाँ रूप बदलने वाले नाग और इंसानों के मिलन से पैदा हुए लोग रहते थे। फंग के पिता इंसान और माँ एक इच्छाधारी नागिन थी। वह बचपन से ही जहरीले साँपों का मांस खाने और उनके जहर का आदी था।
जब नागराज नागमणि के कंट्रोल से बाहर हो गया, तब नागमणि ने एक नए ‘सर्प-मानव’ की तलाश शुरू की। चीन के एक गुप्त कबीले में उसे फंग मिला। नागमणि ने फंग को लालच दिया और उसे नागराज का सुरक्षित खून पिला दिया, जिससे फंग के शरीर में नागराज जैसी ही ताकत, सूक्ष्म सर्प और तेज जहर आ गया। इस बदलाव के बाद वह ‘नागदंत’ बन गया।
उसका मुख्य मकसद नागराज को दुनिया की नजरों में बदनाम करना था। नागमणि के कहने पर उसने स्विस बैंक में डकैती और विमान हाईजैक जैसी घटनाएं कीं ताकि लोग असली नागराज को अपराधी समझें। नागदंत के पास रूप बदलने, शरीर से सांप निकालने और खतरनाक जहर जैसी शक्तियां हैं, जो उसे नागराज का सबसे बड़ा दुश्मन बनाती हैं। अपनी क्रूरता और जलन भरे स्वभाव के कारण वह खुद को बेहतर साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
तूतेन-खामेन

राज कॉमिक्स की नागराज सीरीज़ में तूतेन-खामेन (मिस किलर से जुड़ी एक अहम कड़ी) एक बहुत शक्तिशाली और रहस्यमयी खलनायक है। वह खुद को पिरामिडों से निकला हजारों साल पुराना प्राचीन मिस्र का फराओ बताता है। उसका मुख्य उद्देश्य ‘टूटन फोर्स’ नाम की एक अमर सेना बनाना है, जिसमें वह अपराधियों की आत्माओं को प्राचीन ममियों के शरीरों में डालता है ताकि उन पर किसी भी आधुनिक हथियार का असर न हो।
तूतेन-खामेन की असली ताकत उसके एक खास जादुई मुखौटे (Mask) में छिपी है। यह मुखौटा इतना शक्तिशाली है कि यह नागराज की खतरनाक विष-फुंकार जैसी ताकतों को भी सोखकर वापस उसी पर पलट सकता है। ‘जादू का शहंशाह’ कॉमिक में उसे एक मायावी जादूगर के रूप में दिखाया गया है, जहाँ आखिर में नागराज द्वारा उसकी पट्टियाँ खोलने पर वह सिर्फ एक जादुई छलावा या खाली खोल निकलता है।
इस रहस्यमयी किरदार के पीछे की सच्चाई दूसरी कॉमिक्स में सामने आती है। ‘पिरामिडों की रानी’ में उसकी पत्नी रानी आँखेसामन उसे जिंदा करने के लिए जेप्सी ब्रेड के जरिए बच्चों की बलि देने की साजिश करती है। वहीं ‘सम्राट’ कॉमिक में यह चौंकाने वाली बात सामने आती है कि तूतेन-खामेन असल में महान जादूगर करणबक्षी के सम्मोहन में था। करणबक्षी उसे प्राचीन खजानों और रानी क्लियोपेट्रा के जादुई महल को पाने के लिए एक मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा था। प्राचीन मिस्र के रहस्य, काले जादू और अमरता की चाह का यह मेल उसे नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव जैसे नायकों के लिए एक बहुत मुश्किल और मायावी दुश्मन बनाता है।
नगीना

नगीना राज कॉमिक्स की नागराज सीरीज़ की सबसे बड़ी और खतरनाक महिला खलनायिका है, जो एक बहुत शक्तिशाली इच्छाधारी नागिन और महान नाग तांत्रिका है। वह प्राचीन समय में नागद्वीप की रानी थी, जहाँ उसने अपनी तांत्रिक शक्तियां बढ़ाने के लिए अपनी ही जाति के नागों की बलि देना शुरू कर दिया था, जिसके कारण महात्मा कालदूत ने उसे सजा देकर निर्वासित कर दिया।
नगीना का मुख्य मकसद नागराज को खत्म करना, नागद्वीप पर फिर से कब्जा करना और अपनी जादुई शक्तियों के दम पर पूरी दुनिया पर राज करना है। उसकी शक्तियों का मुख्य स्रोत उसका जादुई ‘तंत्र-मुंड’ (खोपड़ी का हार) और उसकी खतरनाक तांत्रिक किरणें हैं, जिनसे वह किसी को भी अपने वश में कर सकती है, कई मायावी रूप बना सकती है और ‘त्रिफना’ जैसे पुराने रहस्यों को कंट्रोल कर सकती है।
वह सिर्फ लड़ाई में ही नहीं, बल्कि चालें चलने और विज्ञान व तंत्र को मिलाकर नए खतरे पैदा करने में भी माहिर है, जैसा कि ‘नगीना का जाल’ और ‘कुंडली’ जैसी कॉमिक्स में दिखता है जहाँ वह ‘स्नोकी’ नाम के नशे या ‘ग्रह-मशीन’ के जरिए दुनिया को खतरे में डालती है। वह अक्सर नागपाशा और मिस किलर जैसे दूसरे विलेन के साथ मिलकर काम करती है, लेकिन उसका आखिरी लक्ष्य हमेशा अपनी ताकत और राज कायम करना ही रहता है। नागराज और विसर्पी के लिए वह एक ऐसी मायावी दुश्मन है जिसे हराना लगभग नामुमकिन लगता है, क्योंकि वह अपनी तांत्रिक विद्या के दम पर हर बार नई योजना के साथ वापस आ जाती है।
विषंधर

राज कॉमिक्स की नागराज सीरीज़ में विषंधर एक ऐसा जटिल खलनायक है, जिसका सफर सत्ता के लालच से शुरू होकर एक ‘साइडकिक’ तक पहुँच गया। वह नागद्वीप का पूर्व तांत्रिक (Royal Sorcerer) है, जिसने राजसत्ता पाने के लिए अपने ही देश और विसर्पी के शाही वंश के साथ गद्दारी की। विषंधर को मुख्य रूप से मृत्युदंड, नागद्वीप, त्रिफना और प्रलय जैसी कॉमिक्स में नागपाशा और अपने रहस्यमयी ‘गुरुदेव’ के साथ साजिश करते देखा गया है। वह एक शक्तिशाली ‘इच्छाधारी नाग’ है, जिसका रूप अक्सर आधा इंसान और आधा सांप का होता है, और वह अपने ‘मंत्र-दंड’ के जरिए खतरनाक तांत्रिक शक्ति चलाता है।
विषंधर की दुश्मनी का मुख्य कारण नागद्वीप का सिंहासन था। जब राजा मणिराज की कोई संतान नहीं थी, तब विषंधर को लगा कि वही अगला राजा बनेगा। लेकिन जब देव कालजयी के कहने पर मणिराज ने तापसी नदी से मिले घायल बच्चे (नागराज) को अपना उत्तराधिकारी बना लिया, तो विषंधर की सारी योजनाएं खत्म हो गईं। उसने नागराज को मारने के लिए राक्षस राजा जनरल गंट से हाथ मिलाया और एक विषकन्या की मदद भी ली, लेकिन हर बार उसे हार मिली। यहाँ तक कि उसकी भेजी गई विषकन्या भी बाद में नागराज के साथ हो गई।
समय के साथ विषंधर का किरदार एक गंभीर खलनायक से बदलकर थोड़ा मजाकिया हो गया। जहाँ ‘विषकन्या’ में वह खतरनाक था, वहीं ‘महाययुद्ध’ जैसी कॉमिक्स में वह एक मसखरे की तरह दिखा, जो नाग के झांसे में आकर कालदूत के मंत्रों में फँस गया। ‘कुंडली’ कॉमिक्स तक आते-आते उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि उसे पोल्का जैसे किरदारों की बात माननी पड़ी। आखिर में, विषंधर एक ऐसा खलनायक साबित हुआ जो ताकतवर तांत्रिक होने के बावजूद खुद मुख्य विलेन नहीं बन पाया और बड़े खलनायकों का सिर्फ एक ‘साइडकिक’ बनकर रह गया।
शाकूरा

राज कॉमिक्स की दुनिया में जादूगर शाकूरा (विक्टर शाकूरा) एक ऐसा चालाक और शक्तिशाली खलनायक है, जिसका डर धरती से लेकर अंतरिक्ष तक फैला है। शाकूरा ग्रह का यह भगोड़ा अपराधी कद में भले छोटा है, लेकिन उसकी जादुई और वैज्ञानिक ताकतें बहुत ज्यादा हैं। वह एक ‘साइबर-मैजिशियन’ की तरह एडवांस स्पेस-शिप और ‘मैजिक क्रेयॉन्स’ जैसे अजीब उपकरणों का इस्तेमाल करता है, जिनसे वह निर्जीव चित्रों में जान डालकर खतरनाक हालात पैदा कर देता है। उसकी चालाकी तब दिखी जब उसने न सिर्फ ताजमहल चोरी होने का भ्रम पैदा किया, बल्कि सुपरमैन, बैटमैन और स्पाइडर-मैन जैसे अंतरराष्ट्रीय नायकों को भी अपने जादुई जाल में फंसा लिया।
शाकूरा की सबसे बड़ी ताकत उसका भ्रम (Illusion) और रूप बदलने की कला है, जिससे वह नागराज जैसे शक्तिशाली नायक को भी परेशान कर देता है। ‘शिकांगी’ जैसे वफादार जादुई नेवले के साथ मिलकर वह हर बार नया ‘चक्रव्यूह’ बनाता है। हालांकि नागराज की समझदारी और बाबा गोरखनाथ की शक्तियों ने उसे कई बार हराया, लेकिन वह अपनी हार कभी नहीं मानता। उसके वंश में ‘अमरता’ का गुण होने की वजह से वह हर बार खत्म होने के बाद फिर से जिंदा होकर लौट आता है। जादू, ताकत और अमरता के इस मेल में शाकूरा एक ऐसा खतरनाक दिमाग है, जो विज्ञान और काले जादू को मिलाकर पूरे ब्रह्मांड के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। उसकी यह इंटरगैलेक्टिक कहानी उसे कॉमिक्स दुनिया का एक यादगार और घातक विलेन बनाती है।
नागपाशा

तक्षक नगर की सत्ता के लालची नागपाशा की कहानी छल, बदले और अमरता के उलझे हुए जाल से बनी है। राजा तक्षकराज के छोटे भाई होने के कारण नागपाशा का एक ही सपना था कि वह सिंहासन पर बैठे, लेकिन रानी ललिता को संतान होने से उसका सपना टूट गया। जलन में नागपाशा ने ऐसी चाल चली कि नाग देवता ‘कालजयी’ गुस्सा हो गए। हालांकि राजा ने रानी को बचा लिया, लेकिन कालजयी के जहर की वजह से उनकी संतान को मृत मान लिया गया। गुस्से में नागपाशा ने जब कालजयी पर हमला किया, तो नाग देवता के वार से वह पागल सा हो गया और भागते समय अमृत और जहर के मिश्रण में गिरने से वह अमर तो हो गया, लेकिन उसका चेहरा हमेशा के लिए डरावना और बिगड़ा हुआ हो गया।
अपनी नाकामी और बदसूरती से परेशान नागपाशा ने आखिर में राजा तक्षकराज और रानी की हत्या कर दी। तक्षकराज ने मरने से पहले ऋषि की मदद से सारा खजाना एक तिल के दाने में छुपा दिया था, जिसे सिर्फ उनका जिंदा बेटा (नागराज) ही पा सकता था। आज नागपाशा एक अमर और शक्तिशाली तांत्रिक होते हुए भी दिमाग के मामले में कमजोर है। वह पूरी तरह अपने गुरु देव और शिष्य केंटुकी पर निर्भर रहता है। गुरु देव ने ही तंत्र और विज्ञान को मिलाकर नागपाशा के लिए कई साजिशें बनाई हैं। राज कॉमिक्स की ‘महायुद्ध’ और ‘नागायन’ जैसी सीरीज़ में नागपाशा को ‘क्रूरपाशा’ के रूप में दिखाया गया है, जिसकी सबसे बड़ी कमजोरी उसका बचकाना गुस्सा और गुरु पर निर्भर रहना है, जिसका फायदा नागराज हमेशा उठाता आया है।
गुरुदेव

राज कॉमिक्स की दुनिया में ‘गुरुदेव’ एक ऐसे मास्टरमाइंड हैं, जो अपनी बुद्धि और रहस्यमयी शक्तियों के दम पर पूरी दुनिया को हिला सकते हैं। वे सिर्फ एक साधारण अपराधी नहीं, बल्कि विज्ञान और तंत्र-विद्या के उस खतरनाक मेल का प्रतीक हैं, जहाँ नैतिकता की कोई जगह नहीं होती। गुरुदेव को ज़्यादातर नागपाशा के संरक्षक और मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है, लेकिन असल में वही पर्दे के पीछे से नागराज जैसे नायकों को खत्म करने की योजनाएं बनाते हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका दिमाग है, जिसकी मदद से उन्होंने बायोकेमिस्ट्री और रोबोटिक्स में महारत हासिल की है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नागराज के दिमाग में ‘रोबोटिक कैप्सूल’ लगाना था, जिसने एक रक्षक को भक्षक बना दिया।
वैज्ञानिक ज्ञान के साथ-साथ गुरुदेव प्राचीन तांत्रिक विद्या के भी बड़े जानकार हैं। ‘तांत्रिक अंकुश’ जैसे हथियारों से वे आत्माओं तक को अपने वश में कर लेते हैं, जैसा कि उन्होंने महात्मा कालदूत के साथ किया था। उनकी महत्वाकांक्षा किसी छोटे राज्य या धन तक सीमित नहीं है; वे ‘त्रिफणा’ जैसी दिव्य मणियों को पाकर समय और ब्रह्मांड पर नियंत्रण करना चाहते हैं। गुरुदेव के किरदार की गहराई उनके और वेदाचार्य के बीच के विचारों के टकराव में साफ दिखती है, जहाँ एक तरफ निस्वार्थ सेवा है और दूसरी तरफ अहंकार। वे अपने शिष्यों को सिर्फ मोहरों की तरह इस्तेमाल करते हैं और हारने के बाद भी नई चाल चलने में माहिर हैं। संक्षेप में, गुरुदेव राज कॉमिक्स के सबसे तेज दिमाग और बार-बार लौटने वाले खलनायकों में से एक हैं, जिनका होना ही नागराज के लिए लगातार चुनौती बना रहता है।
पोल्का

राज कॉमिक्स के नागराज कालखंड में ‘पोल्का’ का किरदार एक बहुत चालाक, वैज्ञानिक दिमाग वाली और खतरनाक खलनायिका के रूप में सामने आता है। ‘काली मौत’ से ‘कुंडली’ तक उसकी कहानी धोखे और हाई-टेक तकनीक का एक अलग ही मेल दिखाती है। शुरुआत में वह नागराज की भरोसेमंद साथी बनकर सामने आई, जिसने अपनी वैज्ञानिक समझ से भारती को ढूंढने में मदद की, लेकिन यह सब उसकी बड़ी योजना का हिस्सा था। ‘ऐलान-ए-जंग’ में उसने अपना पक्ष बदलते हुए नागराज को कैद कर लिया और उसके गले में एक खास मशीन वाला पट्टा डाल दिया, जो उसकी इच्छाधारी शक्तियों को कंट्रोल कर सकता था। उसकी सबसे बड़ी चाल ‘आतंकवादी नागराज’ में सामने आई, जहाँ पता चला कि नागराज के साथ रहने वाली लड़की असल में पोल्का की हमशक्ल थी, जिसे पोल्का ने अपनी यादें देकर नागराज का भरोसा जीतने के लिए तैयार किया था।
असली पोल्का स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी के अंदर से एक ग्लोबल आतंकी नेटवर्क चला रही थी। उसने तकनीक के दम पर नागराज के दिमाग के छुपे हुए अपराधी हिस्से को फिर से जगा दिया और उसे दुनिया के लिए खतरा बना दिया। ‘कुंडली’ में उसकी खतरनाक सोच और बढ़ गई जब उसने नगीना के साथ मिलकर नागराज की शक्तियों को खत्म करने के लिए ‘मेकैनिकल वायरस’ और ग्रहों की स्थिति बदलने वाली मशीनों का इस्तेमाल किया। पोल्का कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि एक ऐसी मास्टरमाइंड है जो भावनाओं से नहीं, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट और डेटा से काम करती है। उसकी हिम्मत और बारीक प्लानिंग उसे राज कॉमिक्स के सबसे जटिल और प्रभावशाली विलेन में शामिल करती है।
जुलू

राज कॉमिक्स की दुनिया में ‘जुलू’ एक ऐसा प्रतिनायक है, जो अपनी अलग सोच और क्रूरता से नागराज के लिए बहुत खतरनाक साबित हुआ। दक्षिण अफ्रीकी कबीले की पुरानी वुडू विद्या और आधुनिक विज्ञान के खतरनाक मेल ने उसे एक ‘साइंटिफिक मास्टरमाइंड’ बना दिया। ‘केंचुली’ और ‘सो जा नागराज’ जैसी कहानियों में उसका किरदार अच्छे से सामने आता है, जहाँ वह सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि नागराज के दिमाग और अवचेतन पर हमला करता है। ‘मग्राहा’ जैसे कृत्रिम जीव बनाना और नागराज की छोड़ी हुई केंचुली में ‘प्लाज्मा’ भरकर उसे जिंदा कठपुतली बना देना उसकी वैज्ञानिक ताकत को दिखाता है। वह नागराज को अपना गुलाम मानकर उसे मानसिक रूप से परेशान करने में मजा लेता है।
जुलू की योजनाएं बहुत दूर की सोच वाली और तकनीक से भरी होती हैं। ‘सो जा नागराज’ में ‘स्वप्न बूटी’ से नागराज के सपनों को कंट्रोल करना और ‘गिरगिट की भस्म’ से अदृश्य हो जाना उसके कबीलाई ज्ञान की ताकत दिखाता है। वह इतना घमंडी है कि हार मानने के बजाय खुद को खत्म करने वाला खेल खेलना पसंद करता है, जैसा कि उसने केंचुली वाले पुतले में बम लगाकर दिखाया। हालांकि नागराज ने अपनी इच्छाशक्ति और ताकत से उसे कई बार हराया, लेकिन जुलू का किरदार विज्ञान और तंत्र के गलत इस्तेमाल के खतरनाक नतीजों को दिखाता है। उसका काला कोट और डरावना अंदाज उसे राज कॉमिक्स के सबसे असरदार खलनायकों में शामिल करता है।
सी-थ्रू

राज कॉमिक्स का खलनायक ‘सी-थ्रू’ विज्ञान और इंसानी महत्वाकांक्षा के दुखद अंत की एक अलग मिसाल है। मूल रूप से एक होशियार वैज्ञानिक, उसका जीवन तब बदल गया जब उसका ‘टेलीपोर्टेशन’ प्रयोग एक भयानक हादसे का शिकार हो गया। इस धमाके ने उसके शरीर को परमाणुओं में बिखेर दिया, लेकिन उसकी चेतना और दिमाग की ताकत उन अदृश्य कणों में बची रही। खुद को ‘सी-थ्रू’ नाम देकर उसने अपनी अणु-शक्ति से हवा की धूल और गैसों को जोड़कर नकली और विशाल जीव बनाने की ताकत हासिल कर ली।
उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी मानसिक तरंगें थीं, जिनसे वह दूसरों के दिमाग को कंट्रोल कर सकता था। उसका मुख्य मकसद नागराज की ‘इच्छाधारी शक्ति’ को खींचकर फिर से एक ठोस इंसानी शरीर पाना था, क्योंकि उसका मानना था कि नागराज की बाइंडिंग एनर्जी उसके बिखरे परमाणुओं को स्थायी रूप दे सकती है। इस लालच में उसने नागराज को मानसिक रूप से परेशान किया और उसे फंसाने के लिए जटिल वैज्ञानिक जाल बनाए।
हालांकि, उसका अंत भी उसकी अपनी लालच की वजह से हुआ। जब उसने नागराज की जबरदस्त इच्छाधारी ऊर्जा को अपने अंदर लेने की कोशिश की, तो उसका अस्थिर अस्तित्व उस दबाव को सहन नहीं कर पाया और एक बड़े धमाके के साथ हमेशा के लिए खत्म हो गया। सी-थ्रू का किरदार यह सिखाता है कि प्रकृति के नियमों के खिलाफ बिना कंट्रोल की महत्वाकांक्षा आखिर में खुद के विनाश का कारण बनती है।
सपेरा

राज कॉमिक्स की मशहूर कहानी ‘सपेरा’ में प्रतिनायक सपेरा का किरदार एक बहुत भावुक और वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वाला बदले की भावना से भरा इंसान है। उसका असली नाम रवि मेनन था, जो एक मशहूर संगीतकार और ध्वनि विज्ञान के शोधकर्ता थे। उन्होंने ऐसी तकनीक बनाई थी जिससे संगीत की तरंगों से फसलों की रक्षा की जा सके, लेकिन लालची व्यापारियों जद्दू शाह, मूस और पस्सू ने इसे अपने काम के लिए खतरा मानकर उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
इस हमले में भूखे चूहों ने उनकी ‘आवाज ग्रंथियों’ को नुकसान पहुंचाया, जिससे उनकी आवाज हमेशा के लिए चली गई। डॉक्टर बंसल ने उनके गले में ‘वॉयस सिंथेसाइज़र’ लगाया और उन्हें आधुनिक मशीनों से लैस कर ‘सपेरा’ के रूप में फिर से खड़ा किया। सपेरा का रूप डरावना है, जिसमें उसके शरीर पर भारी एम्पलीफायर्स और एक ताकतवर इलेक्ट्रिक गिटार है, जो खतरनाक ध्वनि तरंगें पैदा करता है। वह इन तरंगों से कंक्रीट तक तोड़ सकता है।
नागराज के साथ उसकी लड़ाई में उसने अपनी संगीत तरंगों से उसे कड़ी टक्कर दी, क्योंकि ये खतरनाक फ्रीक्वेंसी नागराज की सर्प शक्तियों को कमजोर कर देती थीं। सपेरा का किरदार एक दुखभरी कहानी है; वह अपनी बेटी नीलोफर से अपनी पहचान छिपाकर अकेले बदले की आग में जीता रहा। अंत में नागराज ने ‘निर्वात’ (Vacuum) के सिद्धांत का इस्तेमाल कर उसकी ध्वनि तरंगों को बेअसर कर दिया और उसे हरा दिया। सपेरा सिर्फ एक विलेन नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़ा हुआ एक ऐसा वैज्ञानिक योद्धा है जिसकी कला ही उसका सबसे बड़ा हथियार और उसकी मजबूरी भी बन गई।
करणवशी

राज कॉमिक्स की दुनिया में ‘करणवशी’ एक ऐसा प्रतिनायक है जिसकी ताकत शरीर से नहीं, बल्कि दिमाग और सम्मोहन की रहस्यमयी शक्ति से चलती है। उसे ‘सम्मोहन सम्राट’ कहा जाता है, जिसका उदय नागराज के खिलाफ ‘सम्मोहन’ कॉमिक में बहुत डरावने रूप में हुआ था। लाल और नारंगी चोगा पहने इस विलेन के माथे पर लगी चमकती मणि उसकी ताकत का केंद्र है, जिससे निकलने वाली किरणें किसी भी मजबूत इंसान को पल भर में अपने वश में कर सकती हैं।
करणवशी की क्रूरता तब दिखती है जब वह कमला ऑडिटोरियम को अपनी मायावी शक्ति से नरक जैसा बना देता है, जहाँ नागराज जैसे ताकतवर नायक को भी भ्रम में फंसकर असली दर्द महसूस होता है। वह धूल और मिट्टी को जोड़कर डरावने रक्षक बनाने और ‘मैंटिकोर’ जैसे राक्षस तैयार करने में माहिर है, जो उसकी मानसिक ताकत का ही हिस्सा होते हैं।
करणवशी की चाहत सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ‘सौडांगी’ और ‘सम्राट’ जैसी सीरीज़ में पूरी दुनिया पर राज करना चाहता है। उसने प्राचीन मिस्र की शक्तियों और अमेरिका के राष्ट्रपति तक को अपने वश में कर दिखाया कि उसकी पहुंच कितनी बड़ी है। वह टीवी के जरिए लाखों लोगों को एक साथ सम्मोहित करने की ताकत भी रखता है।
हालांकि नागराज ने अपनी मानसिक ताकत और सूक्ष्म सर्पों की मदद से उसे कई बार हराया, लेकिन करणवशी का घमंड और उसकी कला उसे हर बार नए रूप में वापस ले आती है। उसका किरदार यह सिखाता है कि दिमाग की ताकत का गलत इस्तेमाल किसी भी हथियार से ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
विष-अमृत

राज कॉमिक्स की मशहूर कहानी ‘विष-अमृत’ में विष और अमृत दो ऐसे परग्रही किरदार हैं, जो अपनी अलग शक्तियों और रहस्यमयी ‘ब्रह्मांडीय खेल’ के लिए जाने जाते हैं। विष एक स्त्री रूप में विनाश करने वाली है, जिसका मकसद जीवन खत्म कर पूरे ग्रह को बंजर बनाना है, जबकि अमृत एक पुरुष रूप में जीवन देने वाला है, जो विष के विनाश को रोकने का दिखावा करता है।
इन दोनों का स्वभाव आम खलनायकों से अलग है क्योंकि ये किसी निजी दुश्मनी के बजाय ब्रह्मांड के नियमों के हिसाब से काम करते हैं। इनका सबसे बड़ा रहस्य यह है कि ये अपनी भूमिकाएं बदलते रहते हैं; जो आज विनाश करता है, वही अगले ग्रह पर रक्षक बन सकता है।
नागराज के लिए यह चुनौती बहुत कठिन थी क्योंकि विष की खतरनाक फूँकार और अमृत की जबरदस्त ऊर्जा के सामने उसकी सर्प शक्तियां भी कमजोर लगने लगीं। आखिर में नागराज ने समझा कि ये दोनों पृथ्वी को अपनी प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। अपनी ताकत के बजाय उसने अपनी समझ और केंचुली का इस्तेमाल कर उन्हें उनके ही नियमों में फंसा दिया। उनकी उल्टी ऊर्जाओं का टकराव उनके खेल के नियम तोड़ गया, जिससे उन्हें पृथ्वी छोड़कर जाना पड़ा।
यह कहानी यह सिखाती है कि ताकत, चाहे बनाने की हो या मिटाने की, अगर कंट्रोल में न हो तो खतरनाक होती है। विष और अमृत का अलग अंदाज और उनका ‘समय सीमा’ वाला खेल उन्हें राज कॉमिक्स के सबसे अलग और यादगार प्रतिद्वंद्वी बनाता है।
तंत्रता

राज कॉमिक्स की दुनिया में ‘तंत्रता’ एक ऐसा डरावना नाम है, जो तंत्र विद्या, विज्ञान और बेहिसाब लालच के खतरनाक मेल को दिखाता है। वह महान तिलिस्म बनाने वाले वेदाचार्य का सबसे बड़ा दुश्मन और उनके परिवार के लिए एक अभिशाप जैसा था। तंत्रता सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि आत्माओं की सेना का सम्राट था, जिसने अपनी बेटी चंद्रलंका की शादी वेदाचार्य के बेटे शिलादित्य से सिर्फ इसलिए कराई ताकि वह उनके तिलिस्मी रहस्य चुरा सके। उसका सबसे क्रूर काम अपने ही नाती ‘अग्रज’ के शरीर पर कब्जा करने की कोशिश था, ताकि वह अपनी आत्मा बदलकर अमर हो सके। ‘अग्रज’, ‘नागराज का कहर’ और ‘तांडव’ जैसी कॉमिक्स में उसकी ताकत का सबसे खतरनाक रूप दिखता है, जहाँ उसने आसमान में ‘दूसरा सूर्य’ तक बना दिया था।
उसका ठिकाना ‘तंत्र-गढ़’ एक ऐसा जीवित किला था, जो इंसानी शरीर की बनावट पर बना हुआ था, और उसकी अजीब सोच को दिखाता है। नागराज जैसे नायक को भी उसे हराने के लिए सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि वेदाचार्य के तिलिस्मी ज्ञान और आत्मिक शक्ति का सहारा लेना पड़ा। आखिर में, अपने घमंड और अपनों के साथ धोखा करने की वजह से तंत्रता हार गया और उसे एक तिलिस्मी चित्र में हमेशा के लिए कैद कर दिया गया। तंत्रता का किरदार यह दिखाता है कि गलत तरीके से पाई गई ताकत और रिश्तों का अपमान आखिर में विनाश की ओर ले जाता है।
गरलगंट

राज कॉमिक्स की दुनिया में गरलगंट कोई साधारण विलेन नहीं, बल्कि एक दिव्य ‘यक्ष राक्षस’ है, जिसके पास राक्षसों की क्रूरता और यक्षों जैसी जादुई शक्तियां हैं। उसका जन्म विषंधर द्वारा किए गए एक गुप्त तांत्रिक यज्ञ से हुआ था, जिसका मकसद देव कालजयी के प्रिय नागराज को खत्म करना था। गरलगंट का रूप बहुत विशाल और डरावना है; उसका बड़ा शरीर, सफेद दाढ़ी और सिर पर सोने का मुकुट उसे भगवान शिव के प्राचीन गणों जैसा रूप देता है। उसकी सबसे खतरनाक ताकत उसका ‘तांत्रिक अंकुश’ है, जिससे वह महात्मा कालदूत जैसे ताकतवर लोगों को भी अपने कंट्रोल में कर लेता है। उसने अपनी शक्तियों से ‘विषकन्या’ बनाई, जिसका जहर इतना खतरनाक था कि उसका इलाज खुद देव कालजयी के पास भी नहीं था।
गरलगंट की चालाकी ‘विषहीन नागराज’ सीरीज़ में सबसे ज्यादा दिखती है, जहाँ उसने हालात ऐसे बना दिए कि देव कालजयी ने गुस्से में नागराज की शक्तियां छीन लीं। वह सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि ‘अस्थि-सर्प’ और ‘अस्थि-शस्त्र’ जैसे हथियारों से नागराज की इच्छाधारी शक्तियों को भी बेअसर कर सकता है। हालांकि नगीना जैसे चालाक किरदारों ने उसकी वफादारी का फायदा उठाया, लेकिन उसका आत्मसम्मान और तांत्रिक ज्ञान उसे नागराज के सबसे बड़े दुश्मनों में खड़ा करता है। आखिर में, नागराज की समझदारी और वेदाचार्य के ‘प्रति-तंत्र’ ज्ञान ने ही उसे हराया। गरलगंट उस समय का प्रतीक है जब नागराज की कहानियों में विज्ञान से ज्यादा तांत्रिक और पौराणिक शक्तियां हावी थीं।
सुप्रीम हेड

राज कॉमिक्स में नागराज का बड़ा दुश्मन सुप्रीम हेड (पहले ‘क्राइम किंग’) अपराध जगत का एक ऐसा विलेन है, जिसने अपनी कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। लकवाग्रस्त होने की वजह से वह चल नहीं सकता, लेकिन उसका गुलाबी और बैंगनी रंग का ‘लाइफ सपोर्ट टैंक’ सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि मिसाइल, लेजर गन और इलेक्ट्रिक शील्ड से लैस एक चलता-फिरता किला है। वह जादू के बजाय ‘डार्क साइंस’ का इस्तेमाल करता है और मशीनों के पीछे रहकर हमला करना पसंद करता है। उसकी चालाकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने नागराज की शक्तियों को खत्म करने के लिए ‘केवलवान’ जैसे रोबोट और बड़े-बड़े हथियार बनाए।
सुप्रीम हेड सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि जानकारी और संचार पर भी कब्जा करना चाहता था। ‘कालचक्र’ जैसी कॉमिक्स में उसने नागराज की अच्छाई का फायदा उठाकर उसे अपनी शक्तियां छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जो उसकी चालाकी दिखाता है। वह भारती कम्युनिकेशंस के सैटेलाइट पर कब्जा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। तमारा जैसे वफादार साथियों और हाई-टेक तकनीक की मदद से उसने महानगर के अंडरवर्ल्ड पर राज किया। नागराज के लिए वह एक ऐसी चुनौती बना, जिसने दिखाया कि हर लड़ाई ताकत से नहीं, बल्कि दिमाग और तकनीक से जीती जाती है। एक अपाहिज होकर भी पूरी दुनिया को डराने वाला यह विलेन राज कॉमिक्स में तकनीकी खलनायकी का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।
ड्रैकुला

राज कॉमिक्स के ब्रह्मांड में काउंट ड्रैकुला सिर्फ एक विलेन नहीं, बल्कि आतंक और अमरता का एक ऐसा डरावना प्रतीक है जिसने नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव जैसे नायकों की भी कड़ी परीक्षा ली। रोमानिया के पुराने जंगलों से निकला यह ‘रक्त पिपासु’ सम्राट अपनी तांत्रिक शक्तियों और ‘हृदय संचरण’ की अनोखी कला के कारण लगभग अजेय माना जाता था, क्योंकि वह अपने दिल को शरीर के किसी भी हिस्से या बाहर कहीं भी सुरक्षित रख सकता था।
जब नागपाशा ने उसे दोबारा जिंदा किया और ड्रैकुला ने ‘अमृत’ मिला हुआ खून पी लिया, तो वह एक ऐसे महा-वैम्पायर में बदल गया जिस पर धूप, आग या आम हथियारों का कोई असर नहीं होता था। उसने ‘विनाश वृक्ष’ के जरिए पूरी इंसानियत को वैम्पायर बनाने की योजना बनाई और प्रेत-लोक तक अपना खौफ फैला दिया। ड्रैकुला का घमंड इतना ज्यादा था कि उसने नगीना जैसे खलनायकों को भी अपने हिसाब से इस्तेमाल किया और नागराज को ‘विषहीन’ कर उसकी ताकत को चुनौती दी।
आखिर में, ध्रुव की तेज बुद्धि और नागराज की ताकत ने मिलकर ड्रैकुला के दिल का राज जान लिया। संत यूलोजियन के पवित्र क्रॉस और जलते लावे की भयानक आग ने इस अजेय शैतान का अंत कर दिया, लेकिन राज कॉमिक्स के इतिहास में ड्रैकुला का नाम एक ऐसे ‘डार्क लेजेंड’ के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा, जिसने हिम्मत और तकनीक को रूहानी ताकतों के सामने झुकने पर मजबूर कर दिया।
