यह कॉमिक्स के मशहूर सुपरहीरो ‘परमाणु’ के एक शुरुआती और बेहद रोमांचक अंक पर आधारित है। परमाणु, जिसका असली नाम विनय है और जो पेशे से एक पुलिस इंस्पेक्टर है, भारतीय कॉमिक्स की दुनिया के सबसे लोकप्रिय और यादगार किरदारों में से एक रहा है। इस खास अंक में हमें न्याय, हिम्मत, आतंकवाद और सिस्टम के अंदर छिपे भ्रष्टाचार की एक गहरी और उलझी हुई कहानी देखने को मिलती है।
राज कॉमिक्स ने 90 के दशक में भारतीय बच्चों और युवाओं के बीच सुपरहीरो कल्चर को सही मायनों में पहचान दिलाई। नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव के बाद ‘परमाणु’ ऐसा हीरो बनकर सामने आया जिसने विज्ञान और कानून को एक साथ जोड़ा। परमाणु की ताकतें उसके खास सूट में छिपी हैं, जो उसे परमाणु स्तर पर चीज़ों को नियंत्रित करने, गायब होने, अपना आकार बदलने और ज़बरदस्त ऊर्जा किरणें छोड़ने की क्षमता देता है।
कहानी का विस्तृत विश्लेषण
कहानी की शुरुआत दिल्ली के मशहूर ‘कुतुब मीनार’ के पास मौजूद ‘क्रिस्टल’ नाम की एक इमारत से होती है। यहाँ पुलिस को खबर मिलती है कि खतरनाक आतंकवादी संगठन का सरगना ‘सपेरा’ इसी इमारत में छिपा हुआ है। सपेरा कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि एक ऐसा देशद्रोही है जिसके सिर पर पाँच लाख रुपये का इनाम रखा गया है।

ऑपरेशन क्रिस्टल:
पुलिस कमिश्नर और डी.सी.पी. साठे की अगुवाई में भारी पुलिस बल क्रिस्टल बिल्डिंग को चारों तरफ से घेर लेता है। कहानी के शुरुआती हिस्से में पुलिस की रणनीति और तैयारी को अच्छे से दिखाया गया है। हेलीकॉप्टर से पैराशूट के ज़रिए कमांडो उतारना और नीचे से पूरी घेराबंदी करना, पाठकों के अंदर जबरदस्त रोमांच भर देता है। आतंकवादियों की तरफ से ताबड़तोड़ फायरिंग होती है और वे हैंड ग्रेनेड तक का इस्तेमाल करते हैं। हालात बिगड़ते देख आखिरकार परमाणु की एंट्री होती है।
सपेरा की गिरफ्तारी और परमाणु का कौशल:
सपेरा एक निजी विमान से भागने की कोशिश करता है, लेकिन यहीं पर परमाणु की ताकतों का शानदार नज़ारा देखने को मिलता है। वह अपनी ‘शक्ति-किरणों’ (Energy Lasso) का इस्तेमाल करके उड़ते हुए विमान को जकड़ लेता है और उसे ज़मीन पर उतरने के लिए मजबूर कर देता है । सपेरा की गिरफ्तारी कानून की एक बड़ी जीत के रूप में दिखाई जाती है, लेकिन यह जीत ज़्यादा देर टिकने वाली नहीं होती।

Retaliation (प्रतिशोध) और ‘आग की बारिश’:
सपेरा के पकड़े जाने के बाद उसका संगठन ‘सपेरा ग्रुप’ चुप नहीं बैठता। प्रोफेसर जैद, जो इस ग्रुप का मास्टरमाइंड लगता है, खुलकर दिल्ली पुलिस को चुनौती देता है। सपेरा ग्रुप दिल्ली के एक पुलिस स्टेशन पर ‘फायर बम’ से हमला करता है। परमाणु मौके पर पहुँचकर पुलिसवालों की जान बचा लेता है, लेकिन आतंकियों का असली मकसद डर का माहौल बनाना होता है। वे हेलीकॉप्टर से पर्चे गिराते हैं, जिनमें साफ धमकी लिखी होती है—
“अगर सपेरा को नहीं छोड़ा गया, तो कल दिल्ली में ‘आग की बारिश’ होगी।”
व्यवस्था और भ्रष्टाचार:
कहानी का एक बेहद अहम हिस्सा पुलिस विभाग के अंदर फैले भ्रष्टाचार को दिखाता है। सब-इंस्पेक्टर अजय, जो लालच में डूबा हुआ है, सपेरा ग्रुप से रिश्वत लेता है—50,000 रुपये और एक मिठाई का डिब्बा—ताकि कर्फ्यू के दौरान उनकी मदद कर सके। दूसरी तरफ विनय, यानी परमाणु का असली रूप, अपने फर्ज़ को पूरी ईमानदारी से निभाता है और उसे अजय पर शक होने लगता है। यह टकराव साफ दिखाता है कि एक हीरो को सिर्फ बाहर के दुश्मनों से ही नहीं, बल्कि अपने ही सिस्टम के गद्दार लोगों से भी लड़ना पड़ता है।
पात्र चित्रण (Character Analysis)
परमाणु (विनय):
परमाणु का किरदार एक ऐसी दोहरी ज़िंदगी जीने वाले नायक का है। एक ओर वह पुलिस की वर्दी पहनकर कानून का पालन करता है, और दूसरी ओर परमाणु बनकर उन सीमाओं को पार करता है जहाँ आम पुलिस नहीं पहुँच पाती। इस अंक में उसका धैर्य, समझदारी और सही वक्त पर लिया गया फैसला उसे एक समझदार और परिपक्व हीरो के रूप में सामने लाता है।

सपेरा:
सपेरा एक बेहद क्रूर और ज़िद्दी खलनायक है। जेल की सलाखों के पीछे होने और टॉर्चर झेलने के बावजूद उसके चेहरे पर मुस्कान और आँखों में नफरत साफ झलकती है। उसे पूरा भरोसा है कि उसका संगठन बाहर तबाही मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
डी.सी.पी. साठे:
उन्हें एक आदर्श और सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है, जो आतंकवादियों के सामने झुकने को तैयार नहीं होते। उनका संवाद—
“हम इन गीदड़ भभकियों के आगे कभी नहीं झुकेंगे”—
उनके मजबूत इरादों और हिम्मत को साफ तौर पर दिखाता है।
सब–इंस्पेक्टर अजय:
यह कहानी का सबसे नफरत के काबिल किरदार है। जब पूरा समाज संकट में है, तब वह सिर्फ अपनी जेबें भरने में लगा रहता है। उसका चरित्र समाज के उस कड़वे सच को सामने लाता है, जहाँ कुछ लोग चंद रुपयों के लिए देश की सुरक्षा तक को दांव पर लगा देते हैं।
कला और संवाद (Art and Dialogue Review)

चित्रांकन (Illustration):
इस कॉमिक्स का आर्टवर्क (चित्रकार: च्व्हाण) पूरी तरह क्लासिक राज कॉमिक्स वाली फील देता है। रंगों का चुनाव काफी चटक और आंखों को भाने वाला है। परमाणु का पीला और हरा सूट अंधेरे सीन में भी साफ नज़र आता है और उसकी मौजूदगी को मजबूत बनाता है। एक्शन वाले सीन खास तौर पर ध्यान खींचते हैं, जैसे जब परमाणु उड़ते हुए विमान को पकड़ता है या जब पुलिस स्टेशन में जोरदार विस्फोट होता है। इन पैनलों में मूवमेंट और एनर्जी साफ महसूस होती है। इमारतों और दिल्ली के माहौल को भी बड़ी बारीकी से दिखाया गया है, खासकर कुतुब मीनार जैसे लोकेशन कहानी को और असली बनाते हैं।
संवाद (Dialogues):
तरुण कुमार वाही का लेखन प्रभाव छोड़ता है। संवादों में वीरता और गंभीरता का सही संतुलन है, जो कहानी को बोझिल नहीं होने देता। आतंकवादियों की धमकी वाले पर्चों की भाषा डर पैदा करती है, वहीं परमाणु का अपने “प्रोफेसर” से बातचीत करने का तरीका उसके सोचने-समझने वाले स्वभाव को दिखाता है। कहानी का अंत जबरदस्त सस्पेंस के साथ होता है, जहाँ सीधे पाठक से सवाल किया जाता है—
“क्या परमाणु दिल्ली पर आग बरसने देगा?”
यह सवाल अपने आप में अगले अंक ‘आग’ के लिए उत्सुकता जगा देता है।
सामाजिक और नैतिक संदेश

यह कॉमिक्स सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके भीतर कई गहरे और ज़रूरी संदेश छिपे हुए हैं। सबसे बड़ा संदेश आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का है। कहानी साफ दिखाती है कि आतंकवाद सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डर फैलाकर अपनी पकड़ बनाता है, और अगर जनता और पुलिस बिना डरे एक साथ खड़ी हो जाएं, तो जीत तय होती है।
साथ ही, सब-इंस्पेक्टर अजय के ज़रिए भ्रष्टाचार के खतरनाक नतीजों पर सीधा वार किया गया है। यह किरदार साफ चेतावनी देता है कि “घर का भेदी ही लंका ढाता है” और किसी भी सुरक्षा व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी अंदर का भ्रष्ट आदमी ही होता है। अंत में, परमाणु का खास सूट तकनीक और न्याय के बीच संतुलन को दिखाता है, जहाँ विज्ञान की ताकत का इस्तेमाल मानवता की रक्षा के लिए किया जाता है और एक बेहतर व सुरक्षित भविष्य की उम्मीद जगाई जाती है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन: खूबियां और कमियां
खूबियां:
इस कॉमिक्स की तेज रफ्तार कहानी शुरू से आखिर तक रोमांच बनाए रखती है और कहीं भी बोर नहीं करती। “आग की बारिश” वाला सस्पेंस कहानी का सबसे मजबूत हिस्सा बनकर उभरता है। खास बात यह है कि सुपरहीरो होने के बावजूद इसमें पुलिस की असली कार्यप्रणाली को अहम जगह दी गई है। कर्फ्यू, प्रेस कॉन्फ्रेंस और नाकाबंदी जैसे सीन इसे ज़मीन से जुड़ा और ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं।

कमियां:
इस अंक में विलेन की ताकत कुछ कमज़ोर लगती है, क्योंकि सपेरा खुद ज्यादा कुछ करता नहीं दिखता और पूरा भरोसा अपने संगठन पर ही रखता है। अगर उसकी परमाणु के साथ सीधी टक्कर दिखाई जाती, तो रोमांच और भी बढ़ सकता था। इसके अलावा, कुछ टॉर्चर वाले सीन पुराने जमाने के लगते हैं, जो आज के दौर में थोड़े आउटडेटेड महसूस हो सकते हैं, हालांकि उस समय की कॉमिक्स में यह आम बात थी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, परमाणु का यह अंक एक शानदार और क्लासिक सुपरहीरो एडवेंचर है। यह याद दिलाता है कि क्यों राज कॉमिक्स ने इतने लंबे समय तक भारतीय पाठकों के दिलों पर राज किया। कहानी में एक्शन, इमोशन, सस्पेंस और देशभक्ति का सही मेल देखने को मिलता है। परमाणु का किरदार यह सिखाता है कि ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
अगर आप भारतीय कॉमिक्स के शौकीन हैं, तो यह अंक आपके कलेक्शन में जरूर होना चाहिए। यह न सिर्फ परमाणु की विरासत को आगे बढ़ाता है, बल्कि एक ऐसी दुनिया रचता है जहाँ बुराई चाहे जितनी भी ताकतवर क्यों न हो, उसे रोकने के लिए एक “परमाणु” हमेशा खड़ा रहता है। इस विस्तृत समीक्षा में कहानी के हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है और आखिर में यही कहा जा सकता है कि परमाणु भारतीय कॉमिक्स इतिहास का एक चमकता हुआ सितारा है।
अगले अंक ‘आग’ में क्या होने वाला है, यही इस कहानी का सबसे मजेदार इंतजार है। क्या परमाणु उस रहस्यमयी “आग की बारिश” को रोक पाएगा? क्या अजय की गद्दारी सामने आएगी? ये सवाल पाठक को परमाणु की दुनिया से और गहराई से जोड़ देते हैं।
रेटिंग: 4.5/5
सिफारिश: सभी सुपरहीरो और थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए ज़रूर पढ़ने लायक।
