राज कॉमिक्स की ‘आखिरी’ श्रृंखला भारतीय कॉमिक्स जगत की उन खास कहानियों में से एक है, जिसने पाठकों को सच में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव दिया है। इस श्रृंखला के पहले तीन भाग—‘आखिरी रक्षक’, ‘परकालों की धरती’ और ‘ब्रह्मांड योद्धा’—जिस मजबूत नींव को तैयार करते हैं, ‘विश्व रक्षक’ (The Savior of the World) उसी कहानी को एक तार्किक और बेहद रोमांचक मोड़ तक ले जाता है। इस अंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ नागराज (Nagraj) पूरी तरह से सक्रिय रूप में नजर आता है और साथ ही इस पूरे संकट की जड़ ‘ब्रह्म-कण’ (The Divine Particle) के इतिहास से भी पर्दा उठता है। यह कॉमिक सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विज्ञान, नैतिकता और अस्तित्व की लड़ाई जैसे गहरे मुद्दों को भी छूती है।
कथानक का विस्तार: अतीत की परतों का खुलना
इस अंक की कहानी को मोटे तौर पर दो अहम समय-काल में बाँटा जा सकता है—एक तरफ वर्तमान का भीषण युद्ध और दूसरी तरफ अतीत में हुआ वह वैज्ञानिक प्रयोग, जिसने इस पूरी तबाही की नींव रखी।

नागराज का प्रवेश और वर्तमान संघर्ष
कहानी वहीं से आगे बढ़ती है, जहाँ ‘ब्रह्मांड योद्धा’ के अंत में नागराज की नागरस्सी हमलावर यान को तबाह कर देती है। नागराज का प्रवेश इस पूरी श्रृंखला के लिए एक सच्चा ‘गेम-चेंजर’ साबित होता है। अब तक जो ध्रुव और परमाणु रक्षात्मक स्थिति में थे, वे नागराज के आने के बाद खुलकर आक्रामक हो जाते हैं। यहाँ नितिन मिश्रा ने नागराज के व्यक्तित्व को बेहद प्रभावशाली और ताकतवर रूप में पेश किया है।

नागराज, परमाणु और ध्रुव के बीच का तालमेल देखने लायक है। परमाणु, जिसकी शक्तियाँ धीरे-धीरे उसके काबू से बाहर होती जा रही हैं, नागराज की मौजूदगी में खुद को ज्यादा संतुलित और ऊर्जावान महसूस करता है। केप टाउन में मैक्ट्रियाम्स (Mactriams) की सेना के साथ होने वाला युद्ध इस कॉमिक के सबसे शानदार एक्शन सीक्वेंस में से एक बन जाता है। आधुनिक मशीनों के खिलाफ नागराज जिस तरह अपनी सर्प-शक्तियों का इस्तेमाल करता है, वह पाठकों को पूरी तरह बाँध लेता है।
अतीत का रहस्य: आई.एस.आर.सी. (I.S.R.C.) मुख्यालय
कॉमिक का सबसे अहम हिस्सा वह फ्लैशबैक (Flashback) है, जो कहानी को कुछ महीने पीछे ले जाता है। नई दिल्ली स्थित ‘इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर’ (I.S.R.C.) के मुख्यालय में प्रोफेसर इब्रित विकराल (Professor Ibrit Vikral) और प्रोफेसर कृतिका (Professor Krutika), ध्रुव और परमाणु को अपनी एक अद्भुत खोज दिखाते हैं—ब्रह्म-कण (The Divine Particle)।

प्रोफेसर विकराल इसे मानव जाति के लिए एक ऐसे द्वार की तरह देखते हैं, जो इंसान को सीधे ‘पाँचवीं सदी’ से ‘पच्चीसवीं सदी’ में पहुँचा सकता है। लेकिन ध्रुव और परमाणु, जो हमेशा प्रकृति के संतुलन में विश्वास रखते हैं, इस खोज को लेकर गंभीर चिंता जताते हैं। वे प्रोफेसर को चेतावनी देते हैं कि प्रकृति के नियमों के साथ इतनी बड़ी छेड़छाड़ का नतीजा विनाश भी हो सकता है। यह हिस्सा कहानी को एक मजबूत नैतिक सवाल देता है—क्या वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर ब्रह्मांड के नियमों को तोड़ना सही है?
दिव्य परिषद (The Divine Council)
कहानी की एक कड़ी हमें अंतरिक्ष के उस रहस्यमय स्थान तक ले जाती है, जहाँ ‘दिव्य परिषद’ (Divya Parishad) मौजूद है। ये वे शक्तियाँ हैं जो पूरे ब्रह्मांड और ग्रहों के संतुलन पर नजर रखती हैं। उनके लिए मनुष्य एक ऐसा अपराधी है, जिसने वर्जित सीमाओं को पार कर लिया है। उनके संवादों से साफ हो जाता है कि पृथ्वी पर जो ‘ट्रांसफ्यूजन’ हो रहा है, वह दरअसल मनुष्यों द्वारा किए गए इस उल्लंघन की सजा है। इसी दौरान परमाणु और ध्रुव को ‘ब्रह्मांड के नियमों का उल्लंघनकर्ता’ घोषित कर दिया जाता है।
एंथोनी और प्रिंस का प्रवेश: एक नया खतरा

कॉमिक के अंत में कहानी अचानक एक डरावनी और अंधेरी दिशा में मुड़ जाती है। मुर्दों के शहर में एंथोनी (Anthony) और प्रिंस (Prince) को भेजा जाता है। वहाँ उनका सामना ‘पिप्सोन’ (Planet Pipsone) ग्रह के अजीब और खौफनाक जीवों से होता है। ये साधारण ज़ॉम्बी नहीं, बल्कि पूरी तरह ‘रक्तपिपासु’ (Vampires) हैं। अपने ग्रह पर खून के स्रोत खत्म हो जाने के बाद ये जीव पृथ्वी पर आ पहुँचे हैं। एंथोनी का शांत और संयमित स्वभाव इस भयानक माहौल के बीच कहानी में एक मजबूत हॉरर का तड़का लगा देता है।
पात्रों का गहन विश्लेषण

नागराज: वह सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि एक सच्चा नेता भी है। उसकी आँखों में दिखने वाली गंभीरता यह साफ बताती है कि वह पृथ्वी का विनाश चुपचाप देखने वालों में से नहीं है।
सुपर कमांडो ध्रुव: यहाँ ध्रुव एक ‘एनालिस्ट’ (Analyst) की भूमिका में नजर आता है। फ्लैशबैक में भी वह अपनी तार्किक सोच से प्रोफेसर की अंधी महत्वाकांक्षा को चुनौती देता है। उसे अच्छी तरह पता है कि हथियार सिर्फ लड़ाइयाँ जिताते हैं, लेकिन युद्ध हमेशा दिमाग से जीते जाते हैं।
परमाणु: इस पूरी श्रृंखला में परमाणु एक दुखद नायक (Tragic Hero) के रूप में उभरता है। वह उसी ब्रह्म-कण के प्रयोग का हिस्सा बना, जिसकी कीमत अब उसका शरीर चुका रहा है। असीमित ऊर्जा को सँभालने की उसकी जद्दोजहद उसकी आँखों और चेहरे के भावों में साफ दिखाई देती है।
प्रोफेसर विकराल: वह उस वैज्ञानिक अहंकार का प्रतीक है, जो ‘विकास’ के नाम पर किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है।
चित्रांकन और रंग-संयोजन: धीरज वर्मा का मास्टरक्लास
धीरज वर्मा का आर्टवर्क ‘विश्व रक्षक’ को एक अलग ही वैश्विक पहचान देता है। खासतौर पर पेज 4 पर नागराज और परमाणु के आधे-आधे चेहरों वाला दृश्य राज कॉमिक्स के इतिहास के सबसे यादगार और प्रतिष्ठित चित्रों में गिना जा सकता है। I.S.R.C. की लैब और कोलाइडर मशीन का चित्रण इतना बारीक और विस्तार से किया गया है कि वह पूरी तरह असली जैसा महसूस होता है। वहीं जब नागराज या परमाणु हवा में हमला करते हैं, तो धीरज वर्मा द्वारा दिया गया ‘मोशन ब्लर’ का असर इसे सिर्फ एक कॉमिक नहीं, बल्कि किसी एनिमेटेड फिल्म जैसा अनुभव देता है।
भक्त रंजन की कलरिंग ने इस अंक को एक खास ‘मैटालिक’ और ‘ब्राइट’ लुक दिया है। लैब की नीली रोशनी और युद्धक्षेत्र की धूल भरी पीली रंगत के बीच का कंट्रास्ट कहानी के माहौल को और ज्यादा गहराई देता है।
संवाद और लेखन: नितिन मिश्रा की पकड़

नितिन मिश्रा ने विज्ञान और फैंटेसी को जिस संतुलन के साथ जोड़ा है, वह सच में सराहनीय है। संवाद भले ही छोटे हों, लेकिन उनका असर बहुत गहरा है। “ब्रह्मांड के नियमों का उल्लंघन” जैसे वाक्य कहानी की गंभीरता को और मजबूत करते हैं। एंथोनी और पिप्सोन के जीवों के बीच होने वाली बातचीत में जो रहस्यमय माहौल बनता है, वह लेखक की लेखन क्षमता और सोच की गहराई को साफ दिखाता है।
समीक्षात्मक मूल्यांकन: क्या इस भाग को महान बनाता है?
सकारात्मक पक्ष:
अंततः पाठकों को यह साफ समझ आ जाता है कि यह पूरी कहानी शुरू कहाँ से हुई थी। ‘ब्रह्म-कण’ का कॉन्सेप्ट कहानी को एक मजबूत आधार देता है। वहीं नागराज, ध्रुव और परमाणु की तिकड़ी को एक साथ काम करते देखना किसी भी कॉमिक्स प्रेमी के लिए सपने के सच होने जैसा है। एक ही कॉमिक में हाई-टेक साइंस, ब्रह्मांडीय फैंटेसी और डार्क हॉरर का ऐसा मिश्रण इसे कहीं से भी उबाऊ नहीं बनने देता।
नकारात्मक पक्ष:
‘प्रोटोकॉल डी-कोड’, ‘यूनकोडेड सिम्बल्स’ और ‘कोलाइडर को चार्ज करना’ जैसी तकनीकी बातें कुछ साधारण पाठकों को थोड़ी मुश्किल लग सकती हैं। इसके अलावा कॉमिक का अंत एक बहुत बड़े सस्पेंस पर होता है, जो पाठकों को लंबे समय तक बेचैन कर सकता है।
निष्कर्ष: ‘विश्व रक्षक’ – एक अनिवार्य संग्रह
राज कॉमिक्स की ‘आखिरी’ श्रृंखला का यह अंक यह साबित करता है कि भारतीय सुपरहीरो कहानियाँ किसी भी मार्वल या डीसी की कहानियों को टक्कर देने की पूरी ताकत रखती हैं। ‘विश्व रक्षक’ सिर्फ एक साधारण अंतराल नहीं है, बल्कि यह उस तूफान से पहले की शांति है, जो आने वाले भागों में फूटने वाला है।
यह कॉमिक एक गहरी सीख भी देती है—“अगर शक्ति और प्रगति की कीमत विनाश है, तो वह प्रगति नहीं कहलाती।” यहाँ नायक सिर्फ परग्रहियों से नहीं लड़ रहे, बल्कि वे अपनी ही प्रजाति की उस गलती को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, जिसने पूरे ब्रह्मांड का संतुलन बिगाड़ दिया।
अगले भाग ‘अदृश्य षड्यंत्र’ (Invisible Conspiracy) की नींव यहाँ बहुत मजबूती से रख दी गई है। एंथोनी और प्रिंस का प्रवेश इस बात का संकेत है कि अब खतरा सिर्फ मशीनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्तपिपासु राक्षस भी इस युद्ध का हिस्सा बनने वाले हैं।
अंतिम रेटिंग: 5/5
