राज कॉमिक्स की ‘नागायण’ श्रृंखला भारतीय कॉमिक्स की दुनिया की एक ऐसी बड़ी उपलब्धि है जिसे यूँ ही ‘भारतीय सुपरहीरो का रामायण’ नहीं कहा जाता। संजय गुप्ता की परिकल्पना और अनुपम सिन्हा की लेखनी व चित्रांकन से सजी यह सीरीज़ रामायण के महान ढांचे को भविष्य की साइंस फिक्शन, डार्क फैंटेसी और जबरदस्त सुपरहीरो एक्शन के साथ इस तरह मिलाती है कि पाठक हैरान रह जाता है। ‘वरण’, ‘ग्रहण’, ‘हरण’, ‘शरण’, ‘दहन’ और ‘रण’ काण्ड की ज़बरदस्त सफलता और उनकी गहरी कहानी के बाद अब इसका सातवाँ और सबसे निर्णायक हिस्सा ‘समर काण्ड’ सामने आता है।
‘समर’ यानी युद्ध, और यह काण्ड सच में उस आख़िरी महायुद्ध को दिखाता है जहाँ पूरी मानवता का भविष्य दांव पर लगा है। यह 76 पन्नों का विशेषांक सिर्फ़ लड़ाई-धमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी रहस्यों, कुर्बानियों और चालों का नतीजा है जो पिछले छह भागों से धीरे-धीरे तैयार हो रही थीं। यह समीक्षा इसी कृति के हर छोटे-बड़े पहलू को समझने की कोशिश करती है।
कथानक की विस्तृत रूपरेखा: निर्णायक युद्ध की तैयारी
‘समर काण्ड’ की कहानी वहीं से रफ्तार पकड़ती है जहाँ ‘रण काण्ड’ खत्म हुआ था। ब्रह्मांड के रक्षक नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव अब क्रूरपाशा के गढ़ ‘अलंध्या’ तक पहुँच चुके हैं। यह लड़ाई अब सिर्फ़ दो सुपरहीरो और एक विलेन के बीच नहीं रह जाती, बल्कि यह श्वेत शक्तियों (Light) और ब्लैक पावर्स (Darkness) के बीच होने वाला आख़िरी टकराव बन जाती है।

अध्याय 1: सेतु बंध (The Bridge)
कहानी की शुरुआत अलंध्या के खतरनाक आयाम में प्रवेश से होती है। जैसे राम ने लंका जाने के लिए समुद्र पर सेतु बनाया था, वैसे ही यहाँ नागराज और ध्रुव को अलंध्या की मजबूत सुरक्षा दीवारों को पार करने के लिए विज्ञान और जादू से बना एक अलग तरह का ‘सेतु’ चाहिए। ध्रुव अपनी ग़ज़ब की समझदारी दिखाते हुए ड्राई आइस यानी ठोस कार्बन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल करता है और उन बादलों को खत्म कर देता है जो काली शक्तियों को ताकत दे रहे थे। यह सीन साफ़ दिखाता है कि ध्रुव की असली ताकत उसकी मांसपेशियाँ नहीं, बल्कि उसका दिमाग़ है।
अध्याय 2: भूमिका और काल–सुरमा का संकट
क्रूरपाशा ने अपनी सुरक्षा के लिए ‘काल-सुरमा’ जैसे डरावने ब्लैक पावर दैत्यों को तैनात कर रखा है। ये दैत्य लेज़र एनर्जी तक को पी जाते हैं और आम हथियारों से इनका कुछ नहीं बिगड़ता। ऐसे में ध्रुव की रणनीति काम आती है। वह ‘बूमर फोम’ नाम के एक खास फैलने वाले पदार्थ से इन दैत्यों का मुँह बंद कर देता है, जिससे वे अपनी ही ऊर्जा के दबाव में फट जाते हैं। यह हिस्सा तकनीक और चालाकी का बेहतरीन उदाहरण बन जाता है।

अध्याय 3: घात–प्रतिघात और पारिवारिक रहस्य
यह अध्याय भावनाओं से भरा हुआ है। सुपर कमांडो ध्रुव का परिवार—नताशा और उसका बेटा ऋषि—ग्रैंड मास्टर रोबो की कैद में है। यहीं एक बड़ा खुलासा होता है कि ध्रुव की बहन श्वेता, जिसे सब मरा हुआ मान चुके थे, असल में ‘ममी’ के रूप में ज़िंदा है। रोबो ने उसे एक मशीन जैसा गुलाम बना दिया था। ध्रुव और नताशा के बीच का संवाद, और नताशा को यह सच्चाई पता चलना कि ‘जलज’ असल में उसका वही बेटा है जिसे रोबो ने बदल दिया था, कहानी में जबरदस्त भावनात्मक तूफान पैदा करता है।
अध्याय 4: एक और नागराज और यतियों का विद्रोह
अलंध्या के भीतर नागराज यतियों की सेना से भिड़ रहा है। यहाँ नागराज का ‘ब्लैक नागराज’ रूप और उसका असली व्यक्तित्व आमने-सामने आ जाता है। विसर्पी, जो क्रूरपाशा की कैद में है, अपना आत्मसम्मान नहीं खोती। वह बार-बार क्रूरपाशा को चेतावनी देती है कि नागराज का न्याय एक दिन उसे जला कर राख कर देगा। इसी दौरान यतिराज जिंगालू की वापसी होती है, जो नागराज का साथ देता है और यति सेना को सच्चाई से रूबरू कराता है।

अध्याय 5: आगाज़ और महाकालछिद्र का संवाद
आख़िरी अध्याय में महाकालछिद्र, यानी काली शक्तियों के स्वामी, और बाबा गोरखनाथ के बीच विचारों की जंग दिखाई जाती है। यह लड़ाई सिर्फ़ शरीर की नहीं, सोच और दर्शन की है। महाकालछिद्र जहाँ विनाश और अंधकार की सत्ता की बात करता है, वहीं गोरखनाथ सृष्टि के संतुलन और रोशनी की जीत पर भरोसा जताते हैं। इसी बीच भारती, जो नागराज की पहली पत्नी है, ‘साकार-आकार’ रूप धारण करती है और नागराज के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देती है। यह पल इस काण्ड का सबसे दुखद और सबसे गौरवपूर्ण क्षण बन जाता है।
पात्रों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
नागराज: मर्यादा का कठिन रास्ता
‘समर काण्ड’ में नागराज को एक ऐसे नायक के रूप में दिखाया गया है जो ताकत के मामले में अजेय है, लेकिन अंदर से टूटा हुआ है। विसर्पी का अपहरण और भारती का बलिदान उसे उस हालत में पहुँचा देता है जहाँ वह ‘ब्लैक नागराज’ बनने के बेहद करीब आ जाता है। उसका गुस्सा ही उसकी ताकत है, लेकिन वही गुस्सा उसके पतन की वजह भी बन सकता है। अनुपम सिन्हा ने नागराज की आँखों में छुपे दर्द और दृढ़ निश्चय को बेहद असरदार ढंग से उकेरा है।

सुपर कमांडो ध्रुव: दिमाग़ की ताकत
ध्रुव इस पूरी श्रृंखला में एक साथ हनुमान भी है और विभीषण भी। वह योजनाएँ बनाता है, विज्ञान का सहारा लेता है और जब सब उम्मीद छोड़ देते हैं, तब अपनी समझदारी से रास्ता निकालता है। पत्नी नताशा के धोखे और बहन श्वेता की हालत देखने के बाद भी वह अपने लक्ष्य से नहीं भटकता। ध्रुव साबित करता है कि बिना किसी सुपरपावर के भी इंसान देवताओं को चुनौती दे सकता है।
क्रूरपाशा और नगीना: बुराई का असली चेहरा
नागपाशा अब सिर्फ़ एक अपराधी नहीं रह गया है, बल्कि वह खुद को एक डार्क भगवान बनाना चाहता है। उसका अहंकार इतना बढ़ चुका है कि वह अपने गुरु काल-छिद्र को भी चुनौती देने लगता है। नगीना यहाँ एक चालाक साजिशकर्ता की तरह सामने आती है, जो बार-बार खेल पलटती रहती है। उसके भीतर विषांक के लिए ममता और सत्ता की भूख के बीच चल रहा संघर्ष कहानी को और रोचक बना देता है।
भारती: खामोश बलिदान की कहानी
भारती का किरदार इस सीरीज़ में सबसे ज़्यादा अनदेखा किया गया, लेकिन सबसे अहम भी वही है। वह जानती है कि नागराज का दिल विसर्पी के पास है, फिर भी वह उसकी रक्षा के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा देती है। ‘साकार-आकार’ रूप में उसका बदलना और फिर उसका अंत पाठकों के दिल को गहराई से छू जाता है।
चित्रांकन और दृश्य भाषा (Visual Storytelling)

अनुपम सिन्हा को भारतीय कॉमिक्स का बेताज बादशाह क्यों कहा जाता है, इसका जीता-जागता सबूत ‘समर काण्ड’ है। अलंध्या की ऊँची-ऊँची इमारतें, उड़ते हुए यान, और हज़ारों यति व नाग योद्धाओं के महायुद्ध को इतनी बारीकी से दिखाया गया है कि हर पैनल पर घंटों नज़र टिक जाती है। भावनात्मक क्लोज़-अप्स में जब ध्रुव अपनी बहन को पहचानता है या जब नागराज भारती के बलिदान पर चीख उठता है, तो उनके चेहरों की लकीरें और आँखों की नमी सीधे पाठक के दिल तक पहुँच जाती है। काली शक्तियों को दिखाने के लिए डार्क रंगों, गहरी छायाओं और धुएँ जैसी आकृतियों का इस्तेमाल माहौल में डर और रहस्य भर देता है। वहीं डायनेमिक पैनलिंग के ज़रिए लड़ाई के दृश्यों में किरदारों का फ्रेम से बाहर निकलता हुआ एक्शन और तेज़ रफ्तार मूवमेंट सचमुच देखने लायक बन पड़ता है।
तकनीक बनाम आध्यात्मिकता (Science vs. Spirit)
‘नागायण’ की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह ‘मंत्र’ और ‘यंत्र’ के बीच एक मजबूत पुल बनाती है। इसमें ‘संपीड़न बाण’, ‘थर्मल डिटेक्टर’, ‘बूमर फोम’ और ‘स्निफर ड्रोन’ जैसे वैज्ञानिक हथियार साफ़ दिखाते हैं कि ध्रुव का विज्ञान किसी भी अलौकिक शक्ति से कम नहीं है। वहीं दूसरी ओर, दिव्यास्त्रों का आह्वान, बाबा गोरखनाथ की दिव्य शक्तियाँ और ‘साकार-आकार’ का रहस्यमय तिलिस्म भारतीय पौराणिक कथाओं के जादुई और आध्यात्मिक पक्ष को सामने लाता है। लेखक ने बहुत सरल और प्रभावी तरीके से यह बात रखी है कि जहाँ विज्ञान अपनी सीमा पर आकर रुक जाता है, वहीं आस्था और विश्वास रास्ता दिखाते हैं।
संपादन और प्रस्तुति (Green Pages Analysis)

संपादक संजय गुप्ता ने कॉमिक्स के अंत में दिए गए ‘ग्रीन पेज’ (Green Page No. 280) में पाठकों से बेहद सच्चे और सीधे अंदाज़ में बात की है। उन्होंने खुले तौर पर माना है कि ‘नागायण’ जैसी इतनी बड़ी और जटिल श्रृंखला को समय पर निकाल पाना किसी काम से ज़्यादा एक जुनून था। 128 पृष्ठों के अंतिम भाग ‘इति काण्ड’ का वादा उस समय पाठकों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं था।
इसके साथ ही, ‘प्रेम हिरण’, ‘परमात्मा’ और ‘प्रथम भोकाल’ जैसी आने वाली कॉमिक्स के विज्ञापनों ने उस दौर में राज कॉमिक्स की लोकप्रियता को सचमुच शिखर पर पहुँचा दिया था।
समीक्षा के मुख्य बिंदु: सबल और निर्बल पक्ष
सबल पक्ष (Strengths):
इस कॉमिक्स में जबरदस्त सस्पेंस है, जहाँ हर पन्ने के साथ कोई न कोई नया मोड़ सामने आता है। श्वेता का ममी होना जैसे बड़े रहस्यों का खुलना पाठक को चौंका देता है। एक्शन का स्तर इतना विशाल और भव्य है कि इसे भारतीय कॉमिक्स के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाइयों में गिना जा सकता है। इसके साथ ही, भावनात्मक गहराई को भी बहुत खूबसूरती से बुना गया है, जहाँ सुपरहीरो सिर्फ़ लड़ते हुए नहीं दिखते, बल्कि टूटते हुए, दर्द सहते हुए और बलिदान देते हुए भी नज़र आते हैं। सबसे अहम बात यह है कि अनुपम सिन्हा की विश्वस्तरीय आर्ट इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की मार्वल या डीसी कॉमिक्स के बराबर खड़ा कर देती है।

निर्बल पक्ष (Weaknesses):
कहानी की जटिलता कुछ ज़्यादा है, जिसकी वजह से अगर किसी पाठक ने इसके पहले के छह भाग नहीं पढ़े हैं, तो उसके लिए पात्रों और अलग-अलग आयामों (Dimensions) को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, किरदारों की संख्या इतनी ज़्यादा है कि कई बार मुख्य कहानी, खासकर नागराज और विसर्पी के रिश्ते पर पूरा ध्यान टिकाना आसान नहीं रह जाता।
सामाजिक और नैतिक संदेश
‘समर काण्ड’ यह सिखाता है कि युद्ध सिर्फ़ हथियारों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों से जीते जाते हैं। यह रिश्तों की पेचीदगियों को भी सामने लाता है—कैसे एक पिता, यानी रोबो, अपने स्वार्थ के लिए अपने ही बच्चों का इस्तेमाल करता है, और कैसे एक सच्चा मित्र, ध्रुव, अपने दोस्त के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार रहता है। यह कॉमिक्स न्याय, निष्ठा और सत्य की उसी जीत का प्रतीक है जो रामायण का मूल संदेश रहा है।
निष्कर्ष और रेटिंग
‘नागायण: समर काण्ड’ सिर्फ़ एक कॉमिक बुक नहीं है, बल्कि भारतीय सुपरहीरो कहानियों की ऊँचाई का प्रतीक है। यह हमें हमारे पौराणिक गौरव की याद दिलाती है और साथ ही एक आधुनिक और भविष्य की दुनिया की कल्पना करने का मौका भी देती है। संजय गुप्ता, अनुपम सिन्हा और पूरी राज कॉमिक्स टीम ने मिलकर ऐसा नायाब रत्न गढ़ा है जिसकी चमक समय के साथ कभी फीकी नहीं पड़ेगी।
यह पूरी श्रृंखला का सबसे रोमांचक और निर्णायक हिस्सा है। विसर्पी की कैद, ध्रुव का संघर्ष और नागराज का ‘रण’ अब अपने अंतिम मुकाम पर पहुँच चुका है। कॉमिक्स के अंत में छोड़ा गया सस्पेंस—क्या ध्रुव सच में मर गया है, जैसा कि कवर पर इशारा किया गया है—पाठकों को अगले और आख़िरी भाग ‘इति काण्ड’ के लिए बेचैन कर देता है।
अंतिम रेटिंग: 5/5
